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दक्षिण चीन सागर में अमेरिकी युद्धपोत की ‘घुसपैठ’ का चीन ने लगाया आरोप!

बीजिंग बोला—संप्रभुता का उल्लंघन, सुरक्षा को खतरा; अमेरिका ने आरोप को खारिज किया

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चीन ने अमेरिका पर अपने ह्वांगयान द्वीप (Scarborough Shoal) के पास के जलक्षेत्र में घुसपैठ कर उसकी संप्रभुता का उल्लंघन करने और सुरक्षा को कमजोर करने का आरोप लगाया है। दक्षिण चीन सागर में स्थित इस द्वीप पर चीन और फिलीपींस के बीच लंबे समय से विवाद है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय का बड़ा हिस्सा, जिसमें भारत और अमेरिका भी शामिल हैं, इस द्वीप पर फिलीपींस के दावे को मान्यता देता है।

चीन के अनुसार, जापान स्थित अमेरिकी 7वें बेड़े का विध्वंसक पोत यूएसएस हिगिंस (USS Higgins) उसके कथित ‘क्षेत्रीय जल’ में प्रवेश कर गया, जिसके बाद चीनी नौसेना ने उसे चेतावनी देकर खदेड़ दिया। दक्षिणी थिएटर कमांड नौसेना के प्रवक्ता सीनियर कर्नल हे तियेशेंग ने कहा कि चीनी बलों ने पोत की निगरानी, ट्रैकिंग और चेतावनी के बाद उसे क्षेत्र से बाहर कर दिया।

चीनी बयान में कहा गया, “अमेरिकी युद्धपोत की यह कार्रवाई चीन की संप्रभुता और सुरक्षा का गंभीर उल्लंघन है, दक्षिण चीन सागर में शांति और स्थिरता को कमजोर करती है और अंतरराष्ट्रीय कानून व संबंधों के मूल सिद्धांतों के विपरीत है। दक्षिणी थिएटर कमांड नौसेना हमेशा उच्च सतर्कता पर रहेगी और राष्ट्रीय संप्रभुता व सुरक्षा की रक्षा करेगी।”

अमेरिका ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि यूएसएस हिगिंस अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत “फ्रीडम ऑफ नेविगेशन ऑपरेशन” (स्वतंत्र नौवहन अभियान) चला रहा था। अमेरिकी 7वें बेड़े की प्रवक्ता सारा मेरिल ने सीएनबीसी से कहा, “चीन का इस मिशन को लेकर दिया गया बयान झूठा है… अमेरिका वहां उड़ान भरने, नौकायन करने और संचालन करने का अपना अधिकार अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत प्रयोग कर रहा है, जैसा कि यूएसएस हिगिंस ने किया। चीन की बातें हमें रोक नहीं सकतीं।”

चीन लगभग पूरे दक्षिण चीन सागर पर दावा करता है, जिसे वह अपनी तथाकथित ‘नाइन डैश लाइन’ के आधार पर दर्शाता है। लेकिन 2016 में स्थायी पंचाट न्यायालय (PCA) ने संयुक्त राष्ट्र समुद्री क़ानून (UNCLOS) के तहत इस दावे को खारिज कर दिया था और कहा था कि ‘नाइन डैश लाइन’ का कोई कानूनी आधार नहीं है।

PCA ने यह भी माना कि चीन ने फिलीपींस के विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) में मत्स्य पालन और तेल खोज में बाधा डालकर तथा कृत्रिम द्वीप बनाकर उसके संप्रभु अधिकारों का उल्लंघन किया। अमेरिका, भारत, ऑस्ट्रेलिया, जापान, ब्रिटेन और यूरोपीय संघ ने PCA के फैसले का समर्थन किया है, जिससे फिलीपींस के दावे को मजबूती मिली है।

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