अमेरिका और ईरान के बीच 15 दिनों की युद्धविराम अवधि की अंतिम समयसीमा नजदीक आ रही है, लेकिन तनाव अभी भी कम नहीं हुआ है। दोनों देशों ने एक-दूसरे पर युद्धविराम उल्लंघन के आरोप लगाए हैं। इस बीच यह भी कहा जा रहा है कि ईरान ने एक बार फिर होर्मुज़ जलडमरूमध्य को बंद कर दिया है। रविवार (19 अप्रैल) को इस मार्ग से एक भी जहाज नहीं गुजरा, जिससे कच्चे तेल की कीमतों में 6 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत तेल इसी मार्ग से होकर गुजरता है। यूरोप की 39 प्रतिशत जेट ईंधन और केरोसीन की आपूर्ति भी इसी जलडमरूमध्य से होती है। यही कारण है कि एशिया के बाद अब यूरोप में भी हलचल बढ़ गई है।
यूरोप में ऊर्जा संकट और गहरा गया है। यूरोपीय आयोग ने लोगों को घर से काम करने की सलाह दी है। साथ ही पेट्रोल और डीजल की बचत के लिए निजी वाहनों के बजाय सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करने की अपील की है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, यूरोप में केवल छह सप्ताह का जेट ईंधन शेष बचा है। इस वजह से गैर-जरूरी उड़ानों को रद्द किया जा सकता है।
रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण यूरोप पहले से ही ऊर्जा संकट से जूझ रहा था, और अब ईरान से जुड़े तनाव ने स्थिति को और बिगाड़ दिया है। इससे महंगाई बढ़ने की आशंका है। होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजरने वाला अधिकांश तेल एशियाई देशों के लिए होता है, इसलिए एशिया में भी चिंता बढ़ गई है। फिलीपींस ने तो नौ दिन पहले ही ऊर्जा आपातकाल घोषित कर दिया है।
पिछले वर्ष, पर्शियन खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ने वाले होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजरने वाले कच्चे तेल का 45 प्रतिशत हिस्सा एशियाई देशों को गया था। एशियाई देश इसी मार्ग से 30 प्रतिशत पेट्रोल और नैफ्था, 9 प्रतिशत डीजल और 5 प्रतिशत जेट ईंधन आयात करते हैं। इसी तरह, यूरोप का 39 प्रतिशत विमान ईंधन और केरोसीन भी इसी मार्ग से आता है, जबकि अफ्रीका का 41 प्रतिशत जेट ईंधन और 23 प्रतिशत डीजल भी इसी रास्ते से आपूर्ति होता है।
यह भी पढ़ें:
‘धुरंधर 2’ का बॉक्स ऑफिस पर जलवा बरकरार, 30 दिनों में ₹1783 करोड़ की वैश्विक कमाई
3,000 सैनिक, 5 जहाज तैनाती की अनुमति; भारत और रूस साझा करेंगे सैन्य अड्डे
NGO की आड़ में धर्मांतरण और यौन शोषण का खेल; रियाज काजी गिरफ्तार



