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Wednesday, January 7, 2026
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“ड्रग्स हमारे बच्चों के लिए गंभीर समस्या” :-फारूक अब्दुल्ला

हम सभी को एकजुट होकर इसके खिलाफ लड़ना चाहिए।

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नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने सोमवार को मीडिया से बातचीत के दौरान राज्य की जमीनी समस्याओं पर दो टूक राय रखी। एक तरफ उन्होंने युवाओं को बर्बादी की ओर ले जा रही ड्रग्स की समस्या को लेकर चिंता जताई, तो दूसरी ओर पाकिस्तान पर आतंकवाद और नशीले पदार्थों को फैलाने का गंभीर आरोप भी लगाया। साथ ही, रामबन में हुई त्रासदी पर गहरा दुख जताते हुए केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की मांग की।

ड्रग्स के मुद्दे पर बोलते हुए फारूक अब्दुल्ला ने कहा, “ड्रग्स हमारे बच्चों के लिए एक गंभीर समस्या बन गई है। इसकी वजह से हमारे बच्चे बर्बाद हो रहे हैं। हम सभी को एकजुट होकर इसके खिलाफ लड़ना चाहिए।” उन्होंने स्पष्ट किया कि यह महज कोई सामाजिक समस्या नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा का सवाल बन चुका है।

रामबन में भूस्खलन और बाढ़ के चलते तीन लोगों की मौत और भारी तबाही पर चिंता जताते हुए अब्दुल्ला ने कहा, “रामबन में भारी नुकसान हुआ है। मलबे में कई वाहन फंसे हुए हैं। एक पुल भी क्षतिग्रस्त हो गया है। मुख्यमंत्री को घटनास्थल का दौरा करना चाहिए और केंद्र को भी तुरंत मदद करनी चाहिए।”

पाकिस्तान की भूमिका पर पूछे गए सवाल पर अब्दुल्ला ने तल्ख़ लहजे में कहा, “पूरा देश जानता है कि पाकिस्तान जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद और ड्रग्स भेजता है। पाकिस्तान को इसके लिए कड़ी सज़ा मिलनी चाहिए।” उन्होंने यह भी दोहराया कि इन गतिविधियों का मकसद जम्मू-कश्मीर को अस्थिर करना है, लेकिन देश की एकता ऐसी चालों से टूटने वाली नहीं।

हालांकि, राहुल गांधी द्वारा विदेश में चुनाव आयोग पर की गई टिप्पणी पर अब्दुल्ला ने चुप्पी साधी और प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया।

जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा वापस देने की मांग पर फारूक अब्दुल्ला ने जोर देते हुए कहा, “जम्मू और कश्मीर को जल्द ही अपना राज्य का दर्जा वापस मिल जाना चाहिए।” उन्होंने याद दिलाया कि एक पूर्ण राज्य के तौर पर जम्मू-कश्मीर की राजनीतिक और प्रशासनिक गरिमा थी, जिसे बहाल करना अब समय की मांग है।

इन बयानों से साफ है कि फारूक अब्दुल्ला ने न सिर्फ जम्मू-कश्मीर की स्थानीय समस्याओं की ओर ध्यान खींचा है, बल्कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी सरकार को एक सख्त संदेश देने की कोशिश की है। अब देखना ये है कि उनकी मांगों और टिप्पणियों पर दिल्ली कितना ध्यान देती है।

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