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Thursday, June 25, 2026
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गुरुवायुर के हाथियों को मिल रही 31 दिवसीय चिकित्सा थेरेपी, होगा कायाकल्प!

इस अवसर पर गुरुवायुर देवासम के अध्यक्ष वीके विजयन ने कहा कि गुरुवायुर पुन्नथुरकोट्टा के अंतर्गत 36 हाथी हैं और इस बार 22 हाथियों को चिकित्सा दी जा रही है।

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गुरुवायुर देवासम द्वारा संचालित श्री कृष्ण मंदिर के तहत हाथियों के लिए 31 दिवसीय कायाकल्प चिकित्सा (रिजूविनेशन थेरेपी) मंगलवार सुबह शुरू हुई। इस अवसर पर स्थानीय विधायक के. राजन मौजूद रहे, जो इसी जिले से आते हैं और राजस्व मंत्री भी हैं।

इस अवसर पर गुरुवायुर देवासम के अध्यक्ष वीके विजयन ने कहा कि गुरुवायुर पुन्नथुरकोट्टा के अंतर्गत 36 हाथी हैं और इस बार 22 हाथियों को चिकित्सा दी जा रही है।

पुन्‍नाथुरकोट्टा, जो मंदिर से तीन किलोमीटर दूर है, अपनी स्वर्ण जयंती मना रहा है। 50 साल पहले इस खास हाथी परिसर को खोला गया था।

विजयन ने कहा कि एक महीने तक चलने वाले इस आयोजन पर गुरुवायुर देवसोम पर 12.5 लाख रुपए खर्च होंगे।

विजयन ने कहा, “हर दिन सुबह सभी हाथियों को तेल से नहलाने के साथ दिन की शुरुआत होती है। उनके खाने का सख्त नियम है। हम उन्हें चावल, रागी, दाल, चवन्नप्राश और डॉक्टरों द्वारा बताए गए खनिज देते हैं। विजयन ने कहा कि यह महीने भर का इलाज कई मायनों में मानसून के दौरान इंसानों के कायाकल्प उपचार जैसा है।”

यह हाथी शिविर 11.5 एकड़ भूमि पर स्थित है। यह शिविर प्रसिद्ध श्री कृष्ण मंदिर के स्वामित्व में है, जिसे वैष्णव परंपरा के 108 अभिमान क्षेत्रों में वर्गीकृत किया गया है।

मंदिर का मुख्य चित्र चार भुजाओं वाला विष्णु है, जो पंचजन्य शंख, सुदर्शन चक्र, कौमोदकी गदा और तुलसी की माला के साथ कमल धारण किए हुए हैं। यह भगवान विष्णु के उस रूप को दर्शाता है, जो कृष्ण के जन्म के समय उनके माता-पिता वासुदेव और देवकी को दिखाई दिया था।

इस मंदिर में गैर-हिंदुओं का प्रवेश वर्जित है।

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