पीएम मोदी ने गुरिंदरवीर-अनिमेष को दो दिन के भीतर तीन बार नेशनल रिकॉर्ड तोड़ने पर बधाई दी। उन्होंने कहा, “आप दोनों ने बहुत बड़ा कमाल किया है और सिर्फ दो दिनों के भीतर तीन बार नेशनल रिकॉर्ड तोड़ा है। आपकी जोड़ी ने कमाल किया है। हमने संगीत में तो जुगलबंदी देखी थी, लेकिन चुनौती में जुगलबंदी होती है कि एक बार एक चुनौती दे फिर दूसरा उस चुनौती को उठा ले। फिर तीसरी बार कर ले।”
प्रधानमंत्री ने दोनों एथलीटों से फोन पर बात करते हुए उनके संघर्ष की कहानी भी जानी। अनिमेष ने बताया कि उन्होंने एथलीट की दुनिया में कदम साल 2021 में रखा और वह इससे पहले फुटबॉल खेला करते थे। इसके बाद वह नेशनल लेवल के ट्रायल के लिए गए और उन्हें सिलेक्ट कर लिया गया। वहीं, गुरिंदरवीर ने बताया कि वह अपने पिता का सपना पूरा करना चाहते थे। उन्होंने कहा कि एथलेटिक्स में आने की प्रेरणा उन्हें उनके पिता से मिली।
हालांकि, उन्होंने बताया कि 100 मीटर रेस को चुनने पर लोगों ने कई तरह के सवाल उठाए थे, लेकिन गुरिंदरवीर के पिता ने उन्हें पूरा सपोर्ट किया। उन्होंने कहा कि लोगों का कहना था कि भारत के एथलीटों का शरीर 100 मीटर रेस के लिए नहीं बना है, पर उनके पिता ने उन पर हमेशा भरोसा जताया, जिसकी वजह से वह नया नेशनल रिकॉर्ड कायम कर सके।
अनिमेष ने बताया कि जब उन्होंने एथलेटिक्स में करियर बनाने का फैसला किया, तो उनके इस निर्णय पर लोगों ने कई तरह के सवाल उठाए। हालांकि, अनिमेष के पिता ने उन पर हमेशा भरोसा किया और उन्हें इस खेल में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि कॉमनवेल्थ गेम्स में भी वह और गुरिंदरवीर दमदार प्रदर्शन करने की पूरी कोशिश करेंगे।
गुरिंदरवीर ने 100 मीटर रेस को 10.09 सेकंड में पूरा करके नया नेशनल रिकॉर्ड कायम किया। वहीं, अनिमेष 10.20 के साथ दूसरे नंबर पर रहे। सेमीफाइनल में गुरिंदरवीर ने अनिमेष का रिकॉर्ड तोड़ते हुए रेस को 10.17 सेकंड में पूरा किया था। हालांकि, ठीक 10 मिनट बाद ही अनिमेष ने 100 मीटर रेस को 10.15 सेकंड में पूरा करके नया नेशनल रिकॉर्ड बना दिया था, जिसको फाइनल में गुरिंदरवीर तोड़ने में सफल रहे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरिंदरवीर और अनिमेष से फोन पर बातचीत की। प्रधानमंत्री ने अनिमेष और गुरिंदरवीर से उनका हाल पूछा और उन्हें इस उपलब्धि पर बधाई दी।
प्रधानमंत्री ने दोनों से कहा कि आपने तो बहुत बड़ी उपलब्धि हासिल की है। आपकी जोड़ी ने भी बड़ा कमाल किया है। हमने संगीत में तो जुगलबंदी देखी थी लेकिन चुनौती में अब जुगलबंदी होती है कि एक बार एक चुनौती दे फिर दूसरा उस चुनौती को उठा ले। फिर तीसरी बार कर ले। बड़ा दिलचस्प विषय रहा है आपका। मैं चाहता हूं कि ‘मन की बात’ के दर्शकों को पता चले कि आप लोग के विषय में उनको जानकारी हो। आपने जो पराक्रम किया है उसका पता चले।
इसके जवाब में अनिमेष ने अभिवादन करते हुए कहा कि मैं 200 मीटर और 400 मीटर का नेशनल रिकॉर्ड धारक हूं और मैं छत्तीसगढ़ से हूं। अभी मैं ओडिशा से खेलता हूं। मैंंने पिछले साल एशियन मेडल और वर्ल्ड यूनिवर्सिटी गेम्स मेडल जीता था। मैंने एथलेटिक्स 2021 से चालू किया जब मैं स्कूल से पास आउट हुआ।
प्रधानमंत्री मोदी का अभिवादन करते हुए गुरिंदरवीर ने कहा कि मैं इंडियन नेवी में नौसेना अधिकारी हूं और मैं भारत का सबसे तेज धावक हूं। अभी मैंने 100 मीटर में 10.09 का नेशनल रिकॉर्ड बनाया है। मैं पहला भारतीय हूं जो 10.1 के बैरियर के नीचे भागा है और मैं कोशिश कर रहा हूं कि मैं ट्रैक और वर्दी में भी अपने देश की सेवा करूं।
प्रधानमंत्री की सराहना पर गुरिंदरवीर ने कहा कि मेरे पिता भी वॉलीबॉल खेलते थे। घर की समस्याओं की वजह से उन्होंने अपना खेल छोड़ दिया। उन्होंने मेरे अंदर वो सपना देखा कि मेरा बेटा वो सपना पूरा करेगा तो मैं उनसे बातें करता था, फिर सुनता था मिल्खा सिंह इतनी मेहनत करते थे। मैंने भी उनसे वादा किया कि मैं भी एक दिन आपका सपना पूरा करूंगा। वह बोलते थे कि सपना ऐसे पूरा नहीं होता, उसके लिए बहुत कड़ी मेहनत करनी पड़ती है। मेहनत करनी पड़ती है। उनकी बातें मुझे प्रेरणा देती थीं।
प्रधानमंत्री ने दोनों को बधाई देते हुए कहा कि आप दोनों ने बहुत बड़ा कमाल किया है और सिर्फ दो दिनों के भीतर आप दोनों ने तीन बार नेशनल रिकॉर्ड तोड़ा है। 100 मीटर रेस में दौड़ना, जैसा गुरिंदरवीर ने कहा कि लोग कहते हैं कि भारत के लोगों का तो बदन इस काम के लिए है ही नहीं। इतना मुश्किल होते हुए भी आपने काम किया तो ये दोनों से मैं जानना चाहूंगा और ‘मन की बात’ के श्रोता भी सुनना चाहेंगे कि कौन सा जज्बा था, क्या जिद थी, क्या सोचा था, और कैसे कर रहे थे ? ये कितना मुश्किल होता है।
इसके जवाब में गुरिंदरवीर ने कहा कि शुरुआत में बहुत संघर्ष था, बहुत बार लगा कि मैं सही कर रहा हूं, मैंने सही करियर चुना है, क्योंकि हर बार आप नहीं जीतते, कभी- कभी आप सीखते हैं। जब मैं हारता था या अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाता था।
प्रधानमंत्री मोदी से अनिमेष ने कहा कि सर, मुझे तो सारे लोग बोलते थे कि ये नया फील्ड है, तू कर पाएगा या नहीं, तो मैं बोला कि अब मैं इस फील्ड में घुसा हूं तो करूंगा ही। मेरे पापा भी हमेशा मुझे बोलते थे कि तू इस फील्ड में घुसा है तो कभी पीछे मुड़के मत देखना। तू इस फील्ड में घुसा है तो इसपे अडिग रहना, इस पर आगे बढ़ना है।
प्रधानमंत्री मोदी ने दोनों खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाते हुए कहा कि आप लोगों ने देश का मान बढ़ाया है और देश को भविष्य में इस जगह पर पहुंचाने के लिए और बेहतर करेंगे। मैं मानता हूं कि आपकी ये जो खेल भावना है, एक-दूसरे को चुनौती भी देना है और फिर आगे निकलने के लिए प्रयास करना है और फिर आगे जाने के लिए एक-दूसरे की मदद करना है, ये अद्भुत है।
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