आर्थिक संकट और बढ़ती महंगाई के बीच ईरान ने 1 करोड़ रियाल (10 मिलियन रियाल) का नया बैंकनोट जारी किया है, जो अब तक का सबसे बड़ा मूल्यवर्ग है। यह कदम देश में नकदी की कमी और बैंकिंग व्यवस्था पर बढ़ते दबाव के बीच उठाया गया है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, इस सप्ताह से बैंकों ने नए नोट का वितरण शुरू कर दिया है, जिसकी कीमत लगभग 7 अमेरिकी डॉलर के बराबर बताई जा रही है। नकदी की कमी की आशंका के चलते लोग बड़ी संख्या में बैंकों और एटीएम के बाहर कतारों में नजर आए, जबकि कई एटीएम में नकदी खत्म होने की खबर भी सामने आई।
नया गुलाबी रंग का नोट ऐतिहासिक धरोहरों को दर्शाता है। इसमें यज़्द की जामे मस्जिद की तस्वीर है, जो 9वीं सदी की है, जबकि पीछे की ओर बाम गढ़ को दर्शाया गया है, जो करीब 2500 वर्ष पुराना किला है।
ईरान के केंद्रीय बैंक ने कहा है कि यह नया नोट “जनता को नकदी तक आसान पहुंच सुनिश्चित करने” के लिए जारी किया गया है। हालांकि, उसने यह भी स्पष्ट किया कि डेबिट कार्ड, मोबाइल और इंटरनेट बैंकिंग जैसे डिजिटल माध्यम ही भुगतान का मुख्य साधन बने रहेंगे।
इसके बावजूद, जमीनी स्तर पर स्थिति अलग नजर आ रही है। बैंकों द्वारा निकासी की सीमा तय किए जाने के कारण लोगों को सीमित मात्रा में ही नकदी मिल रही है। एक स्थानीय नागरिक ने बताया, “मैंने एक घंटे तक इंतजार किया और क्लर्क ने कहा कि वह केवल 10 मिलियन रियाल ही दे सकता है। लेकिन जब मैंने जोर दिया कि मेरे पास पैसे नहीं हैं, तो मुझे 30 मिलियन रियाल मिल गए।”
ईरान की अर्थव्यवस्था पहले से ही अमेरिकी प्रतिबंधों, घटती तेल आय, लगातार बढ़ती महंगाई और भ्रष्टाचार जैसी समस्याओं से जूझ रही है। हालिया संघर्ष के चलते स्थिति और बिगड़ गई है, जहां बैंक और अन्य बुनियादी ढांचे भी हमलों का निशाना बने हैं।
रिपोर्ट्स के अनुसार, इजराइल और अमेरिका के हमलों में कई महत्वपूर्ण संस्थान प्रभावित हुए हैं, जिनमें बैंक सिपाह की इमारत भी शामिल है। विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले वर्ष के युद्ध के बाद लगभग 40% तक रियाल की कीमत में भारी गिरावट ने हालात को और गंभीर बना दिया है। आर्थिक संकट के चलते देश में विरोध प्रदर्शन भी हुए, जिन पर सख्ती से कार्रवाई की गई।
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