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पहले होरमुज़ जलडमरूमध्य खोलें, परमाणु वार्ता बाद में

ईरान का नया शांति प्रस्ताव

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पश्चिम एशिया में जारी तनाव और ठहरे हुए शांति प्रयासों के बीच ईरान ने अमेरिका को एक नया प्रस्ताव भेजा है, जिसमें सबसे पहले होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने और युद्ध समाप्त करने पर जोर दिया गया है, जबकि परमाणु मुद्दे पर बातचीत को बाद के चरण के लिए टालने की बात कही गई है। यह प्रस्ताव पाकिस्तान के माध्यम से वॉशिंगटन तक पहुंचाया गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने दो-चरणीय योजना पेश की है, जिसमें पहले चरण में होरमुज़ जलडमरूमध्य को फिर से खोलने, अमेरिकी नाकेबंदी खत्म करने और युद्ध को रोकने पर सहमति बनाने का प्रस्ताव है। दूसरे चरण में परमाणु कार्यक्रम से जुड़े जटिल मुद्दों पर बातचीत शुरू करने की बात कही गई है।

इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि बातचीत तभी संभव है जब ईरान खुद पहल करे। उन्होंने कहा, “अगर ईरान बातचीत करना चाहता है तो वह हमें कॉल कर सकता है।”  साथ ही ट्रंप ने दोहराया कि तेहरान को कभी परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिया जाएगा। अमेरिकी प्रशासन ने हाल ही में अपने दूतों स्टीव विट्कॉफ और जैरेड कुशनर की इस्लामाबाद यात्रा भी रद्द कर दी, जिससे स्पष्ट है कि वह ईरान के पहले प्रस्ताव से संतुष्ट नहीं था।

अमेरिका की ओर से ईरान पर दबाव है कि वह कम से कम दस वर्षों के लिए यूरेनियम संवर्धन रोक दे और अपने मौजूदा भंडार को देश से बाहर भेजे। हालांकि, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने मध्यस्थों को बताया है कि इन मांगों पर ईरानी नेतृत्व के भीतर अभी कोई सर्वसम्मति नहीं बन पाई है।

सूत्रों के अनुसार, अराघची हाल के दिनों में पाकिस्तान और ओमान के बीच लगातार संपर्क में हैं और आगे व्लादिमीर पुतिन से रूस में बातचीत करने की योजना है। यह संकेत देता है कि ईरान कूटनीतिक समाधान के लिए कई मोर्चों पर प्रयास कर रहा है।

गौरतलब है कि 28 फरवरी को अमेरिका और इज़राइल की सैन्य कार्रवाई के बाद संघर्षविराम लागू हुआ था, लेकिन युद्ध समाप्त करने के लिए अभी तक कोई औपचारिक समझौता नहीं हो पाया है। इस संघर्ष में हजारों लोगों की मौत हो चुकी है और वैश्विक बाजारों पर भी इसका असर पड़ा है।

ईरान ने होरमुज़ जलडमरूमध्य पर अपनी रणनीतिक पकड़ का उपयोग करते हुए दबाव बनाने की कोशिश की है, जहां से दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल की आपूर्ति गुजरती है। दूसरी ओर, अमेरिका द्वारा ईरानी बंदरगाहों पर लगाई गई नाकेबंदी ने तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और बाजार में अस्थिरता बढ़ा दी है।

ईरान का कहना है कि किसी भी सार्थक वार्ता से पहले अमेरिका को नाकेबंदी जैसे “अवरोध” हटाने होंगे। साथ ही, तेहरान ने भविष्य में सैन्य कार्रवाई न करने की गारंटी, मुआवजा और जलडमरूमध्य के लिए एक नया कानूनी ढांचा बनाने की भी मांग की है। वहीं, अमेरिका ईरान के परमाणु कार्यक्रम, मिसाइल विकास और क्षेत्रीय संगठनों जैसे हिज़्बुल्लाह और हमास के प्रति समर्थन को लेकर अपनी चिंताओं पर कायम है। इन मुद्दों को लेकर दोनों देशों के बीच मतभेद अब भी गहरे बने हुए हैं।

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