ईरान और अमेरिका के बीच संघर्ष अभी चरम पर है और होर्मुज़ जलडमरूमध्य को लेकर तनाव अभी भी जारी है। अमेरिका ने अपने नौसैनिक बल यहां तैनात कर दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री मार्गों में से एक पर नाकेबंदी लागू की है। हालांकि, प्राप्त जानकारी के अनुसार कई टैंकर इस नाकेबंदी को पार कर इस समुद्री मार्ग से गुजर रहे हैं। कई विश्लेषकों ने एक ऐसे मार्ग की ओर भी ध्यान दिलाया है, जिसके जरिए जहाज ईरान के खर्ग द्वीप से सीधे मुंबई तक यात्रा कर सकते हैं।
इस मार्ग से गुजरने वाले भारतीय जहाज का ताजा उदाहरण ‘देश गरिमा’ है। यह जहाज इस तनावपूर्ण रास्ते पर ईरानी गोलीबारी का सामना करने के बावजूद पिछले बुधवार मुंबई पहुंचा। इस टैंकर ने कतर के रास लाफान से 97,000 मीट्रिक टन कच्चा तेल लाया था। केवल ‘देश गरिमा’ ही नहीं, बल्कि 13 अप्रैल को अमेरिकी नाकेबंदी शुरू होने के बाद से 30 से अधिक अन्य टैंकर भी होर्मुज़ जलडमरूमध्य पार कर चुके हैं। फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट बताती है की ईरान से जुड़े कम से कम 34 टैंकरों ने अमेरिकी नाकेबंदी को पार किया है।
विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रणधीर जयसवाल के अनुसार, वर्तमान में होर्मुज़ क्षेत्र में 14 भारतीय जहाज मौजूद हैं। वित्तीय शोध और बाजार विश्लेषण कंपनी बियांको रिसर्च के अध्यक्ष और मैक्रो स्ट्रैटेजिस्ट जिम बियांको ने एक संभावित मार्ग की जानकारी दी। उन्होंने एक नक्शे के साथ बताया कि भारतीय जहाज किस रास्ते से गुजर सकते हैं। कुछ दिनों बाद, कारोबारी विश्लेषक और पॉडकास्ट होस्ट मारियो नॉफल ने भी इसी मार्ग की ओर इशारा किया। उनके अनुसार, जहाज ईरान के क्षेत्रीय जल के किनारे-किनारे चलते हुए आगे बढ़ सकते हैं और नाकेबंदी पार करने से पहले पाकिस्तानी जलक्षेत्र में प्रवेश कर सकते हैं।
भारत आने वाले जहाज कौन से मार्ग अपना सकते हैं?
यदि कोई टैंकर खर्ग द्वीप पर लोड होता है, तो वह दो संभावित मार्गों से पर्शियन गल्फ और ओमान की खाड़ी के जरिए आगे बढ़ सकता है। पहला मार्ग पाकिस्तान के मकरान तट के साथ-साथ जाता है। इस रास्ते पर चलते हुए जहाज अंतरराष्ट्रीय जल में प्रवेश किए बिना सीधे ईरानी जलक्षेत्र से पाकिस्तानी जलक्षेत्र में पहुंचा जा सकता है। हालांकि यह तकनीकी रूप से संभव है, लेकिन पाकिस्तान के जलक्षेत्र से गुजरने के कारण भारत के लिए यह थोड़ा जटिल मामला बन जाता है। खास बात यह है कि सामान्य परिस्थितियों में अमेरिकी नौसेना किसी अन्य देश के क्षेत्रीय जल में जहाजों को आसानी से रोक नहीं सकती।
दूसरा संभावित मार्ग यह है कि जहाज ईरान के तट के साथ-साथ चलते हुए चाबहार बंदरगाह तक पहुंचे और वहां से दक्षिण की ओर मुड़कर अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में प्रवेश करे। इसके बाद वह महाराष्ट्र, गुजरात, गोवा, कर्नाटक या केरल के किसी भी पश्चिमी तट तक सीधे पहुंच सकता है।
फिलहाल, अमेरिकी नाकेबंदी का अधिकार क्षेत्र केवल अंतरराष्ट्रीय समुद्री सीमा तक ही सीमित है, जो ईरान के साथ संघर्ष के संदर्भ में लागू होता है। जब तक कोई अवैध गतिविधि शामिल न हो, तब तक नौसेना अंतरराष्ट्रीय जलडमरूमध्य में होने वाले वैध व्यापारिक आवागमन को रोक नहीं सकती।
संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून (UNCLOS) के अनुसार, हर तटीय देश को 12 समुद्री मील (लगभग 22 किमी) तक अपने क्षेत्रीय जल पर नियंत्रण होता है। विदेशी व्यापारिक जहाजों को इन जलक्षेत्रों से ‘निर्दोष मार्ग’ (Innocent Passage) का अधिकार प्राप्त है। इसका मतलब है कि वे बिना रुके, बिना व्यापार या मछली पकड़ने की गतिविधि किए और बिना किसी खतरे के शांतिपूर्वक गुजर सकते हैं। जब तक जहाज केवल मार्ग से गुजर रहा है, तब तक तटीय देश को आमतौर पर उसे रोकना नहीं चाहिए।
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