ईरान और अमेरिका के बीच जारी वार्ताओं में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। रिपोर्टों के अनुसार, ईरान ने सिद्धांततः अपने अत्यधिक समृद्ध यूरेनियम भंडार को छोड़ने पर सहमति जताई है। यह कदम पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष समाप्त करने और व्यापक शांति समझौते की दिशा में अहम माना जा रहा है।
अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से प्रकाशित एक रिपोर्ट में कहा गया है कि यह प्रस्तावित समझौता अमेरिका और ईरान के बीच शत्रुता समाप्त करने, होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने और परमाणु विवाद को नियंत्रित करने के उद्देश्य से तैयार किया जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी संकेत दिया है कि वॉशिंगटन और तेहरान एक समझौते को अंतिम रूप देने के करीब पहुंच चुके हैं।
हालांकि ट्रंप ने समझौते का पूरा विवरण सार्वजनिक नहीं किया, लेकिन अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि ईरान ने अपने निकट हथियार ग्रेड यूरेनियम भंडार को त्यागने पर प्रारंभिक सहमति दी है। अभी इस बात पर अंतिम फैसला नहीं हुआ है कि इस यूरेनियम को किस प्रकार निष्क्रिय किया जाएगा। भविष्य की वार्ताओं में यह तय किया जाएगा कि ईरान इसे किसी अन्य देश को हस्तांतरित करेगा, इसकी शुद्धता कम करेगा या किसी अन्य तकनीकी प्रक्रिया के जरिए इसे निष्प्रभावी बनाया जाएगा।
यह घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि हाल ही में ईरानी सूत्रों ने दावा किया था कि सर्वोच्च नेता के करीबीयों ने यूरेनियम भंडार को देश से बाहर भेजने के खिलाफ निर्देश दिए थे। इसके बावजूद अब वार्ता में लचीलापन दिखाई देना अमेरिका के लिए बड़ी कूटनीतिक सफलता माना जा रहा है।
अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के अनुसार, ईरान के पास वर्तमान में लगभग 400 किलोग्राम यूरेनियम है जिसे 60 प्रतिशत तक समृद्ध किया जा चुका है। यह स्तर हथियार-ग्रेड शुद्धता के काफी करीब माना जाता है। इजरायली अधिकारियों का लंबे समय से दावा रहा है कि इस सामग्री को आगे शुद्ध कर कई परमाणु बमों के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।
यही मुद्दा वार्ता में सबसे बड़ा गतिरोध बना हुआ था। ईरानी वार्ताकार इस विषय पर अंतिम प्रतिबद्धता को बाद की बातचीत तक टालना चाहते थे, लेकिन अमेरिका ने स्पष्ट किया कि शुरुआती समझौते में कम से कम प्राथमिक प्रतिबद्धता जरूरी होगी। अमेरिकी पक्ष ने चेतावनी दी थी कि यदि ऐसा नहीं हुआ तो बातचीत टूट सकती है और सैन्य कार्रवाई फिर शुरू हो सकती है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि हाल के दिनों में अमेरिकी सैन्य योजनाकारों ने ईरान के यूरेनियम भंडार पर हमले के विकल्प भी तैयार किए थे। माना जाता है कि यूरेनियम का बड़ा हिस्सा इस्फहान परमाणु केंद्र के भूमिगत हिस्सों में रखा गया है। यह वही केंद्र है जिस पर पिछले वर्ष अमेरिकी टॉमहॉक मिसाइलों से हमला किया गया था। कथित तौर पर बंकर-बस्टर बमों के इस्तेमाल पर भी चर्चा हुई थी।
रिपोर्ट के अनुसार, एक समय अमेरिकी प्रशासन ने अमेरिका-इजरायल संयुक्त कमांडो अभियान के विकल्प पर भी विचार किया था, जिसका उद्देश्य यूरेनियम भंडार पर कब्जा करना था। हालांकि अत्यधिक जोखिम के कारण इस योजना को मंजूरी नहीं दी गई।
संभावित समझौते के तहत 2015 के परमाणु समझौते जैसा मॉडल अपनाने पर भी चर्चा चल रही है। उस समय ईरान ने अपने बड़े हिस्से के समृद्ध यूरेनियम भंडार को रूस भेजा था। दूसरा विकल्प यूरेनियम की शुद्धता को इतना कम करना है कि उसका सैन्य उपयोग संभव न रहे।
आगामी वार्ताओं में ईरान के यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम के भविष्य पर भी चर्चा होगी। अमेरिका लंबे समय तक संवर्धन गतिविधियों पर रोक चाहता है, जबकि ईरान अपेक्षाकृत कम अवधि के प्रतिबंध की मांग कर रहा है।
इस प्रस्तावित समझौते में विदेशों में जमे ईरानी अरबों डॉलर की संपत्तियों को जारी करने का प्रावधान भी शामिल हो सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, पुनर्निर्माण सहायता से जुड़ी अधिकांश राशि अंतिम परमाणु समझौते के बाद ही जारी की जाएगी, ताकि ईरान वार्ता जारी रखने के लिए प्रोत्साहित रहे।
गौरतलब है कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के 12 सप्ताह बाद भी पूरे पश्चिम एशिया में तनाव बना हुआ है। इन हमलों में ईरान के कई वरिष्ठ अधिकारी मारे गए थे और परमाणु वार्ताएं फिर बाधित हो गई थीं। जवाबी कार्रवाई में ईरान ने इजरायल और उन पड़ोसी देशों को निशाना बनाया था जहां अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद हैं, जिससे खाड़ी क्षेत्र में अस्थिरता और बढ़ गई।
यह भी पढ़ें:
देशमें 19वां रोजगार मेला, हजारों युवाओं को मिले नियुक्ति पत्र!
दिल्ली जिमखाना क्लब का परिसर खाली करने से इनकार; केंद्र के ‘री-एंट्री’ आदेश के खिलाफ जाएगा कोर्ट
गर्मियों में आम पन्ना देता डिहाइड्रेशन और कमजोरी से प्राकृतिक राहत!
डांडेवाला फील्ड में Oil India को बड़ी सफलता, 950 मीटर गहराई में मिला नया प्राकृतिक गैस भंडार



