राजधानी के VVIP इलाके सफदरजंग रोड पर स्थित ऐतिहासिक दिल्ली जिमखाना क्लब ने केंद्र सरकार द्वारा जारी ‘री-एंट्री’ (भूमि पर पुनः कब्जा करने) के आदेश के बाद अपनी 27.3 एकड़ की बेशकीमती संपत्ति को तुरंत खाली करने से साफ इनकार कर दिया है। क्लब प्रबंधन ने कहा है कि वे बिना किसी व्यवधान के अपनी गतिविधियों को जारी रखना चाहते हैं और इस सरकारी आदेश को अदालत में चुनौती देने की तैयारी कर रहे हैं।
सरकार के कड़े रुख के बाद क्लब की गवर्निंग काउंसिल (GC) ने एक आपातकालीन बैठक बुलाई। बैठक में विस्तृत चर्चा के बाद भूमि एवं विकास कार्यालय (L&DO) को एक पत्र भेजकर तुरंत जवाब मांगा गया है। इस पत्र में क्लब के सदस्यों और सैकड़ों कर्मचारियों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए कई मुद्दों पर लिखित स्पष्टीकरण की मांग की गई है। साथ ही, केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय के उच्च अधिकारियों के साथ एक तत्काल बैठक का समय भी मांगा गया है।
क्लब ने अपने आधिकारिक बयान में कहा, “क्लब की गवर्निंग काउंसिल (जीसी) ने आज आपातकालीन बैठक की और विस्तृत विचार-विमर्श के बाद एलएंडडीओ को एक तत्काल प्रतिक्रिया भेजने का निर्णय लिया, जिसमें क्लब के सदस्यों और कर्मचारियों के हित से जुड़े कई मुद्दों पर स्पष्टता मांगी गई है। इस संचार के माध्यम से जीसी सदस्यों ने आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय के अधिकारियों से मिलने के लिए एक तत्काल अपॉइंटमेंट का भी अनुरोध किया है। जीसी की तत्काल प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि क्लब का संचालन बिना किसी रुकावट के जारी रहे।”
इस मामले पर क्लब की सदस्य और अधिवक्ता रिया सचदेवा ने समाचार एजेंसी एएनआई (ANI) से बात करते हुए कहा कि केंद्र सरकार को इस आदेश को पूरी तरह स्पष्ट करने की जरूरत है। उन्होंने कहा, “आदेश में ‘री-एंट्री’ शब्द का इस्तेमाल किया गया है, लेकिन एक आम आदमी नहीं समझ पाएगा कि री-एंट्री का असल मतलब क्या है।”
दरअसल केंद्र सरकार द्वारा शुक्रवार ( 22 मई) को जारी किए गए आदेश के बाद मामला सुर्खियों में आया है, जिसमें मूल लीज डीड (पट्टा विलेख) के क्लॉज 4 (धारा 4) का हवाला देते हुए लीज को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया गया था। सरकार ने आदेश में मांग की है कि 5 जून 2026 तक पूरी संपत्ति और परिसर का कब्जा सरकार को सौंप दिया जाए। इस जमीन को वापस लेने के पीछे केंद्र सरकार ने नई दिल्ली के इस बेहद संवेदनशील इलाके में रक्षा बुनियादी ढांचे (डिफेंस इंफ्रास्ट्रक्चर), सार्वजनिक सुरक्षा और अत्यंत आवश्यक सार्वजनिक उद्देश्यों (अर्जेंट पब्लिक पर्पस) जैसे रणनीतिक कारणों का हवाला दिया है।
सरकारी आदेश पालन करने के बजाय इस क्लब ने कानूनी लड़ाई लड़ने का मन बना लिया है। क्लब के सदस्य सिद्धार्थ ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि क्लब इस आदेश को अपील के जरिए अदालत में चुनौती देगा। उन्होंने सरकार के सुरक्षा संबंधी तर्कों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा, “अगला कदम इस आदेश के खिलाफ अपील दायर करना होगा। क्लब बहुत पुराना है और इसके कई सदस्य हैं। यहां कोई सुरक्षा खतरा या ऐसी कोई चिंता नहीं है।” हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि अगर अदालत परिसर खाली करने का आदेश देती है, तो क्लब उसका पालन करेगा।
बता दें की, दिल्ली जिमखाना क्लब का इतिहास बेहद पुराना और रसूखदार रहा है। साल 1913 में ब्रिटिश शासन के दौरान इसकी स्थापना ‘इम्पीरियल दिल्ली जिमखाना क्लब’ के रूप में की गई थी। यह सरकारी पट्टे पर दी गई जमीन पर बना राजधानी का एक प्रमुख सामाजिक और खेल संस्थान है। साल 1947 में देश की आजादी के बाद इसके नाम से ‘इम्पीरियल’ शब्द को हटा दिया गया और यह ‘दिल्ली जिमखाना क्लब’ बन गया।
दशकों से यह क्लब दिल्ली के सबसे शक्तिशाली लोगों का केंद्र रहा है। इसके सदस्यों में देश के शीर्ष नौकरशाह, राजनयिक, बड़े व्यवसायी, राजनेता और दिल्ली के बेहद प्रभावशाली परिवार शामिल हैं। क्लब के विशाल हरे-भरे लॉन, औपनिवेशिक काल की इमारतें और इसकी सख्त सदस्यता प्रणाली हमेशा से इसे पुराने रसूखदारों के विशेषाधिकार का प्रतीक बनाती रही है। इस क्लब की सदस्यता हासिल करना बेहद कठिन है, जिसके लिए लोगों को दशकों लंबा इंतजार करना पड़ता है और इसके नियम बेहद चुनिंदा और कड़े हैं। अब सरकार और इस रसूखदार लोगों के क्लब के बीच की यह जंग अदालत के गलियारों में तय होगी।
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