शुक्रवार (6 फरवरी) को घोषित भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते ने टैरिफ कटौती और बाजार पहुंच को लेकर सुर्खियां बटोरीं, वहीं इसके साथ जुड़े एक प्रतीकात्मक संकेत ने कूटनीतिक हलकों में खासा ध्यान खींचा है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (USTR) की ओर से साझा किए गए एक आधिकारिक पोस्ट में समझौते के साथ भारत का पूर्ण आधिकारिक नक्शा प्रदर्शित किया गया, जिसमें जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को बिना किसी विवादित चिह्न के भारत का अभिन्न हिस्सा दिखाया गया। इस वाकिए के बाद अमेरिका की चापलूसी में अथक प्रयत्नरत पाकिस्तान की फ़जीहत हुई है।
इस कदम को भारत में व्यापक रूप से पाकिस्तान के लिए एक सूक्ष्म लेकिन स्पष्ट कूटनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है। यह प्रतीकात्मक प्रस्तुति दोनों देशों के बीच अंतरिम व्यापार ढांचे के तहत भारतीय उत्पादों पर अमेरिकी टैरिफ को घटाकर 18 प्रतिशत करने पर सहमति बनने के बाद आई है।
USTR द्वारा साझा की गई इन्फोग्राफिक में पूरे जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को भारत की सीमाओं के भीतर दर्शाया गया है। इसमें पाकिस्तान द्वारा कब्जाए कश्मीर (PoK) या चीन द्वारा कब्जे अक्साई चिन के लिए न तो डॉटेड लाइन दिखाई गई, न ही किसी तरह की अलग शेडिंग या विशेष डिमार्केशन।
यह प्रस्तुति 2019 में जम्मू-कश्मीर के पुनर्गठन के बाद से भारत सरकार द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे आधिकारिक राजनीतिक नक्शे के अनुरूप है, जिसमें ये दोनों केंद्र शासित प्रदेश भारत का अभिन्न अंग दिखाए जाते हैं।
कूटनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह केवल एक ग्राफिक विकल्प नहीं, बल्कि एक सोचा-समझा संकेत है, खासकर उस ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को देखते हुए, जिसमें अमेरिका आमतौर पर अपने आधिकारिक नक्शों और बयानों में जम्मू-कश्मीर को विवादित क्षेत्र के रूप में दिखाता रहा है और भारत-पाकिस्तान संबंधों पर संतुलित तटस्थता बनाए रखता आया है।
भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार संबंधों ने फरवरी 2026 की शुरुआत में एक नया मोड़ लेते हुए टैरिफ तनाव कम करने और बाजार पहुंच बढ़ाने के उद्देश्य से अंतरिम व्यापार ढांचे की घोषणा की गई।
6 फरवरी को हुए ऐलान के तहत USTR ने एक पोस्ट साझा की, जिसमें इस ढांचे के तहत कृषि क्षेत्र में अमेरिकी लाभों को रेखांकित किया गया। समझौते के अनुसार, अमेरिकी निर्यातकों नमें ट्री नट्स, रेड सोरघम और ड्राइड डिस्टिलर्स ग्रेन्स जैसे उत्पाद को भारतीय बाजार में शून्य या रियायती शुल्क पर पहुंच मिलेगी। इसके बदले अमेरिका ने भारतीय वस्तुओं पर लगाए जाने वाले टैरिफ को 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने पर सहमति जताई है।
इस पोस्ट के साथ साझा किए गए कैप्शन में कहा गया, “ट्री नट्स और ड्राइड डिस्टिलर्स ग्रेन्स से लेकर रेड सोरघम और ताजे व प्रोसेस्ड फलों तक, अमेरिका-भारत समझौता अमेरिकी उत्पादों के लिए नए बाजार उपलब्ध कराएगा।” इसी कैप्शन के साथ भारत का पूर्ण नक्शा भी प्रदर्शित किया गया।
हालांकि, अमेरिकी प्रशासन की ओर से इस नक्शे को लेकर कोई अलग से आधिकारिक बयान नहीं दिया गया है, लेकिन भारत में इसे वॉशिंगटन के रुख में सूक्ष्म बदलाव या कम से कम भारत की संप्रभुता संबंधी दावों के प्रति संवेदनशीलता के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
पहले, अमेरिका या उसके विदेश विभाग द्वारा जारी किए गए नक्शों में पाकिस्तान की चिंताओं को ध्यान में रखते हुए पाकिस्तान द्वारा कब्जे कश्मीर का सीमांकन किया जाता था। हालांकि, ट्रंप प्रशासन द्वारा जारी नवीनतम नक्शा पाकिस्तान के दावों को स्पष्ट रूप से खारिज कर रहा है, जबकि पिछले वर्ष के ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान ने अमेरिका की चापलूसी में कोई कसर नहीं छोड़ी।
पिछले छह महीनों में पाकिस्तानी चापलूसी काफी सक्रिय रही है, पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर ने तीन बार अमेरिका का दौरा किया है। उन्होंने ट्रंप के साथ दो बैठकें भी की हैं, जिनमें जून में आयोजित एक चर्चित लंच भी शामिल है। यह पहली बार था जब किसी अमेरिकी राष्ट्रपति ने पाकिस्तान के सेना प्रमुख से अकेले मुलाकात की, जिसमें कोई लोकतांत्रिक नेतृत्व मौजूद नहीं था।
अब यह देखना बाकी है कि क्या यह नक्शा भारत की ओर झुकाव दिखाकर अमेरिकी नीति में कोई सूक्ष्म बदलाव का संकेत देता है। हालांकि, यह स्पष्ट है कि इस नक्शे ने भारत को अपनी श्रेष्ठता साबित करने का भरपूर मौका दिया है।
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