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सांस लेना होगा आसान, ‘ब्रोंकियल अस्थमा’ की समस्या से राहत दिलाएंगे ये आसन

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विश्व योग दिवस में अब केवल 21 दिन शेष रह गए हैं। इस मौके पर भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने ब्रोंकियल अस्थमा से पीड़ित लोगों के लिए कुछ विशेष योग अभ्यासों और शुद्धिकरण प्रक्रियाओं की जानकारी साझा की है। मंत्रालय का कहना है कि नियमित रूप से इन अभ्यासों को अपनाकर श्वसन तंत्र को बेहतर बनाने और सांस संबंधी समस्याओं को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।

मंत्रालय के अनुसार, स्वस्थ जीवन के लिए बेहतर श्वसन क्षमता बेहद जरूरी है। हमारी हर सांस शरीर और मन को ऊर्जा प्रदान करती है। ऐसे में सांस लेने की प्राकृतिक प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की बाधा दिनचर्या को प्रभावित कर सकती है। मंत्रालय का मानना है कि सही योगाभ्यास और नियमित दिनचर्या के माध्यम से श्वसन तंत्र को मजबूत बनाया जा सकता है।

ऐसे में मंत्रालय ने ब्रोंकियल अस्थमा से जूझ रहे लोगों के लिए जलनेति, कपालभाति, सूत्रनेति, सरल मत्स्यासन, भ्रामरी और भुजंगासन जैसे अभ्यासों की विशेष रूप से सिफारिश की है। इनका उद्देश्य श्वसन मार्ग को साफ रखना, फेफड़ों की कार्यक्षमता बढ़ाना और सांस लेने की प्रक्रिया को अधिक सहज बनाना है।

जलनेति और सूत्रनेति को योग की शुद्धिकरण क्रियाओं में शामिल किया जाता है। इनके माध्यम से नाक के मार्गों की सफाई होती है, जिससे श्वसन तंत्र को राहत मिल सकती है। वहीं, कपालभाति श्वास संबंधी मांसपेशियों को सक्रिय करने और फेफड़ों की क्षमता बढ़ाने में सहायक माना जाता है।

भ्रामरी प्राणायाम को मानसिक शांति और तनाव कम करने के लिए उपयोगी माना जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि तनाव और चिंता कई बार अस्थमा के लक्षणों को बढ़ा सकते हैं। ऐसे में भ्रामरी का नियमित अभ्यास मन को शांत रखने में मदद कर सकता है। इसी तरह भुजंगासन और सरल मत्स्यासन जैसे योगासन छाती को फैलाने, श्वसन क्षमता बढ़ाने और शरीर में लचीलापन विकसित करने में मददगार माने जाते हैं। इन आसनों के नियमित अभ्यास से फेफड़ों को बेहतर तरीके से कार्य करने में मदद मिल सकती है।

योग एक्सपर्ट्स का कहना है कि शारीरिक लचीलेपन के साथ-साथ नियमित योगाभ्यास आंतरिक मजबूती और मानसिक संतुलन विकसित करने में भी मदद करते हैं। ये आदतें शरीर से अवरोधों को दूर करने, सहनशक्ति बढ़ाने और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा लाने का काम करती हैं। एक्सपर्ट्स लोगों को योग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाने के लिए प्रेरित कर रहा है। हालांकि, विशेषज्ञों की सलाह है कि गंभीर बीमारी से पीड़ित लोग इन अभ्यासों को शुरू करने से पहले योग विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें।

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