दक्षिण दिल्ली के साकेत मेट्रो स्टेशन के पास शनिवार (30 मई)शाम एक पांच मंजिला इमारत के अचानक ढह जाने से बड़ा हादसा हो गया। इस दुर्घटना में अब तक दो लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि कई अन्य घायल हुए हैं। राहत और बचाव दलों को आशंका है कि अभी भी कुछ लोग मलबे के नीचे फंसे हो सकते हैं। इसी कारण रातभर बड़े पैमाने पर रेस्क्यू ऑपरेशन जारी रहा।
हादसा सईदुलाजाब इलाके में शाम करीब 7:44 बजे हुआ। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, इमारत में कोचिंग संस्थान, कैफे और कई कार्यालय संचालित हो रहे थे। साथ ही तीसरी मंजिल पर निर्माण कार्य भी चल रहा था। अचानक पूरी संरचना भरभराकर गिर गई और देखते ही देखते वहां मलबे का विशाल ढेर लग गया।
घटना की सूचना मिलते ही दिल्ली अग्निशमन सेवा, पुलिस और अन्य आपातकालीन एजेंसियां मौके पर पहुंच गईं। बचावकर्मियों ने तत्काल मलबे में फंसे लोगों को निकालने का अभियान शुरू किया। अब तक कुल 10 लोगों को मलबे से बाहर निकाला जा चुका है। इनमें से सात लोगों को दिल्ली फायर सर्विस की टीमों ने बचाया, जबकि तीन लोगों को स्थानीय नागरिकों और पुलिस कंट्रोल रूम के कर्मियों ने फायर ब्रिगेड के पहुंचने से पहले बाहर निकाल लिया था।
सभी घायलों को तुरंत एम्स जय प्रकाश नारायण एपेक्स ट्रॉमा सेंटर पहुंचाया गया। अस्पताल सूत्रों के अनुसार, तीन लोगों की हालत गंभीर बनी हुई है और उनका गहन चिकित्सा इकाई (ICU) में इलाज चल रहा है। छह अन्य घायल फिलहाल स्थिर हैं और निगरानी में रखे गए हैं। वहीं दो लोगों को अस्पताल पहुंचने पर मृत घोषित कर दिया गया।
मुख्यमंत्री ने लिया घटनास्थल का जायजा
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता भी घटनास्थल पर पहुंचीं और राहत कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “साकेत मेट्रो स्टेशन के पास इमारत गिरने की घटना बेहद चिंताजनक है।” उन्होंने कहा कि बचाव दल “युद्ध स्तर” पर काम कर रहे हैं और फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए हर संभव प्रयास किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में कहा, “हर नागरिक की सुरक्षा और भलाई हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।”
हादसे में घायल हुई नीलम के पिता बलवंत यादव ने बताया कि उनकी 25 वर्षीय बेटी घटना के समय इमारत के पास स्थित कैंटीन में मौजूद थी। नीलम हाल ही में विदेश से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी कर लौटी थीं और साकेत स्थित अराइज मेडिकल अकादमी में स्नातकोत्तर मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रही थीं।
बलवंत यादव के अनुसार, हादसे के समय कैंटीन में लगभग 30 से 35 छात्र मौजूद थे, जिनमें अधिकांश मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी कर रहे थे। उन्होंने बताया कि उनकी बेटी के पैर में फ्रैक्चर हुआ है और उसका उपचार जारी है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह इलाका दिनभर छात्रों, कर्मचारियों और अन्य लोगों से भरा रहता है। कैंटीन और आसपास का क्षेत्र हमेशा व्यस्त रहता है, जिससे हादसे के समय बड़ी संख्या में लोगों के मौजूद होने की आशंका जताई जा रही है।
5 से 6 लोगों के अभी भी फंसे होने की आशंका
सिविल डिफेंस के अधिकारियों ने बताया कि अभी भी पांच से छह लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका है। सिविल डिफेंस के डिप्टी चीफ वार्डन (मुख्यालय) धर्मवीर सेजवाल ने कहा, “हमारे सभी वरिष्ठ अधिकारी यहां मौजूद हैं। पांच से छह लोग अभी भी फंसे हुए हो सकते हैं। बचाव कार्य लगातार जारी है।” उन्होंने यह भी संकेत दिया कि इमारत से जुड़े कुछ निर्माण या प्रशासनिक स्तर के संभावित नियम उल्लंघन की जांच की जानी चाहिए। उन्होंने कहा, “यह एक व्यावसायिक क्षेत्र है। यहां कहीं न कहीं गलती हुई है।”
हादसे के बाद बहु-एजेंसी राहत अभियान शुरू किया गया। इसमें राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), दिल्ली अग्निशमन सेवा, दिल्ली पुलिस, दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA), नगर निगम (MCD), सिविल डिफेंस और CATS एंबुलेंस सेवाएं शामिल हैं।
मौके पर फ्लडलाइट, कटिंग मशीनें, भारी बचाव उपकरण और आधुनिक खोजी उपकरण लगाए गए हैं। बचावकर्मी मलबे को सावधानीपूर्वक हटाकर संभावित जीवित लोगों की तलाश कर रहे हैं।
पुलिस ने क्या कहा?
दक्षिण दिल्ली के पुलिस उपायुक्त (DCP) अनंत मित्तल ने बताया कि शाम करीब 7:35 बजे पुलिस को पहले एक विस्फोट जैसी आवाज और इमारत गिरने की सूचना मिली। इसके कुछ ही मिनट बाद पीसीआर कॉल के जरिए हादसे की पुष्टि हुई।
उन्होंने कहा कि मौके पर पहुंचने पर पता चला कि एक पुरानी इमारत ढह गई थी और उसका मलबा पास में स्थित एक पोर्टा केबिन संरचना पर गिरा, जिसका उपयोग मेडिकल छात्रों की कैंटीन के रूप में किया जा रहा था।
पुलिस ने घायलों को अस्पताल पहुंचाने के लिए ग्रीन कॉरिडोर बनाया, जिससे एंबुलेंस तेजी से अस्पताल तक पहुंच सकीं। NDRF, DDMA, दिल्ली फायर सर्विस और दिल्ली पुलिस के संयुक्त प्रयासों से बचाव अभियान लगातार जारी है।
कारणों की जांच होगी
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, इमारत का कुछ हिस्सा निर्माणाधीन था। हालांकि अधिकारियों ने अभी तक यह पुष्टि नहीं की है कि हादसा निर्माण कार्य में लापरवाही, संरचनात्मक कमजोरी या किसी अन्य कारण से हुआ। बचाव अभियान पूरा होने के बाद विस्तृत जांच शुरू की जाएगी।
फिलहाल पूरा ध्यान मलबे में फंसे संभावित लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने पर केंद्रित है। जैसे-जैसे समय बीत रहा है, बचाव दलों के सामने चुनौती बढ़ती जा रही है और यह अभियान समय के खिलाफ एक कठिन लड़ाई में बदल गया है।
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