भारतीय योग परंपरा में शरीर और मन को साधने के लिए अनगिनत आसनों का वर्णन किया गया है, लेकिन इनमें शीर्षासन स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभदायक माना जाता है। यह शरीर को संतुलित रखने के साथ-साथ एकाग्रता बढ़ाने में भी मदद करता है।
शीर्षासन संस्कृत के दो शब्दों ‘शीर्ष’ (सिर) और ‘आसन’ (मुद्रा) से मिलकर बना है। यह अभ्यास ‘आसनों का राजा’ कहलाता है। इसके नियमित अभ्यास से कंधे, भुजाओं और कोर की मांसपेशियां मजबूत होती हैं।
भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के अनुसार, शीर्षासन एक उन्नत और प्रभावशाली योगासन है, जो शारीरिक शक्ति, मानसिक स्पष्टता और आत्मविश्वास को बढ़ाने में सहायक होता है। यह चेहरे पर प्राकृतिक चमक लाने, बालों का झड़ना कम करने और बालों के विकास में मददगार माना जाता है।
यह पेट से जुड़ी समस्याओं, जैसे कब्ज, गैस और अपच, से राहत दिलाने में भी सहायक हो सकता है। उल्टी स्थिति में किए जाने के कारण शरीर में रक्त संचार बेहतर होता है, जिससे पाचन क्रिया को लाभ मिल सकता है।
शीर्षासन करने से शरीर में, खासकर सिर की ओर, रक्त संचार बेहतर होता है। जब व्यक्ति उल्टा खड़ा होता है, तो मस्तिष्क की ओर रक्त प्रवाह बढ़ जाता है। हालांकि, ब्लड प्रेशर से संबंधित लाभ व्यक्ति की शारीरिक स्थिति पर निर्भर करते हैं, इसलिए उच्च रक्तचाप या अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से पीड़ित लोगों को विशेषज्ञ की सलाह के बाद ही इसका अभ्यास करना चाहिए।
इसे करने के लिए सबसे पहले पैरों को दीवार के सहारे टिकाएं और धीरे-धीरे उन्हें ऊपर की ओर ले जाएं। इस दौरान शरीर का वजन हाथों और भुजाओं पर संतुलित रखें। फिर सिर को सावधानीपूर्वक चटाई पर रखें और धीरे-धीरे पैरों को ऊपर उठाएं, ताकि शरीर शीर्षासन की सही स्थिति में आ सके। इस आसन को करते समय संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी होता है, जिसमें भुजाएं और कंधे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। शुरुआती अभ्यास में दीवार का सहारा लेना अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक माना जाता है।
शुरुआत में इसका अभ्यास केवल 10 से 30 सेकंड तक ही करना चाहिए। नियमित अभ्यास के साथ व्यक्ति अपनी क्षमता के अनुसार इसकी अवधि धीरे-धीरे बढ़ा सकता है।
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