पहलगाम आतंकी हमले में शहीद लेफ्टिनेंट विनय नरवाल की अस्थियां गंगा में विसर्जित !

घाट पर पहुंचे पूर्व कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक और भाजपा कार्यकर्ताओं समेत तमाम श्रद्धालुओं ने "शहीद विनय अमर रहें" और "भारत माता की जय" के गगनभेदी नारों के साथ अपने वीर बेटे को श्रद्धांजलि अर्पित की।

पहलगाम आतंकी हमले में शहीद लेफ्टिनेंट विनय नरवाल की अस्थियां गंगा में विसर्जित !

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जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए कायरतापूर्ण आतंकी हमले में हरियाणा के करनाल निवासी भारतीय नौसेना के जांबाज़ अधिकारी लेफ्टिनेंट विनय नरवाल की शहादत से देशभर में शोक की लहर है। शुक्रवार (25 अप्रैल) को हरिद्वार की पवित्र धरती पर, हर की पैड़ी घाट पर उनके अस्थियों का विधिवत पूजा-पाठ के साथ गंगा में विसर्जन किया गया। राष्ट्र ने नम आंखों से अपने वीर सपूत को अंतिम विदाई दी।

इस भावुक क्षण में शहीद के पिता राजेश नरवाल, उनके मामा और परिवार के अन्य सदस्य उपस्थित रहे। घाट पर पहुंचे पूर्व कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक और भाजपा कार्यकर्ताओं समेत तमाम श्रद्धालुओं ने “शहीद विनय अमर रहें” और “भारत माता की जय” के गगनभेदी नारों के साथ अपने वीर बेटे को श्रद्धांजलि अर्पित की।

शहीद के पिता राजेश नरवाल ने मीडिया से बात करते हुए कहा, “मेरा बेटा तो शहीद हो गया, लेकिन दुआ है कि भविष्य में किसी और के घर ऐसा हादसा न हो।” उन्होंने इस कठिन समय में देशवासियों के समर्थन और प्रेम के लिए आभार भी जताया और सरकार से आग्रह किया कि “भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों, इसके लिए पुख्ता कदम उठाए जाएं।”

विनय नरवाल की शहादत की त्रासदी को और भी गहरा बना देती है यह सच्चाई कि वह हाल ही में विवाह बंधन में बंधे थे और अपनी पत्नी संग छुट्टियां मनाने कश्मीर पहुंचे थे। कोच्चि में तैनात विनय महज दो साल पहले नौसेना में भर्ती हुए थे और देशसेवा के इस छोटे से सफर में ही उन्होंने सर्वोच्च बलिदान दे दिया।

उनकी शहादत के बाद राजनीतिक नेतृत्व ने भी गहरी संवेदना व्यक्त की। कांग्रेस सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा और राज्यसभा सांसद कार्तिकेय शर्मा ने उनके परिजनों से भेंट कर दुख साझा किया। दीपेंद्र हुड्डा ने कहा, “यह घटना न केवल करनाल के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए एक बड़ी क्षति है… यह घिनौनी वारदात हर देशवासी की आत्मा को झकझोरने वाली है।” वहीं कार्तिकेय शर्मा ने इसे “अमानवीय और बर्बर हमला” बताते हुए सरकार से दोषियों को कठोरतम सजा दिलाने की मांग की।

लेफ्टिनेंट विनय नरवाल न केवल एक वीर सैनिक थे, बल्कि वे आज उन लाखों युवाओं के प्रतीक बन गए हैं जो देश की सेवा के लिए हर खतरे से खेलने को तत्पर हैं। देश का यह कर्ज उनके परिवार पर सदैव रहेगा, और अब समय है कि यह बलिदान केवल श्रद्धांजलि में न रह जाए—बल्कि निर्णायक जवाबी नीति में तब्दील हो।

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