दिल्ली जिमखाना क्लब ने केंद्र से मांगी राहत, कहा- पुनर्वास पर स्पष्टता तक सेवाएं बाधित न हों

सफदरजंग रोड स्थित 27.3 एकड़ परिसर खाली करने के आदेश के बाद क्लब ने वैकल्पिक जमीन, स्थानांतरण और कर्मचारियों के भविष्य पर उठाए सवाल

दिल्ली जिमखाना क्लब ने केंद्र से मांगी राहत, कहा- पुनर्वास पर स्पष्टता तक सेवाएं बाधित न हों

Delhi Gymkhana Club seeks relief from Centre, says services should not be disrupted till clarity on rehabilitation

देश के सबसे प्रतिष्ठित और प्रभावशाली व्यक्तियों के लिए बनाए गए दिल्ली जिमखाना क्लब ने केंद्र सरकार से अपील की है कि पुनर्वास और वैकल्पिक जमीन को लेकर स्थिति स्पष्ट होने तक क्लब की गतिविधियों और संचालन में किसी प्रकार का व्यवधान न डाला जाए। केंद्र सरकार ने क्लब को 5 जून 2026 तक सफदरजंग रोड स्थित अपने 27.3 एकड़ परिसर को खाली करने का आदेश दिया है।

लुटियंस दिल्ली में प्रधानमंत्री आवास के समीप स्थित यह औपनिवेशिक दौर का प्रतिष्ठित क्लब अब अस्तित्व के संकट का सामना कर रहा है। यहां देश के गिने चुने शीर्ष नौकरशाह, राजनयिक, सैन्य अधिकारी और राजधानी के प्रभावशाली वर्ग को सदस्यता मिलती रही है।

दिल्ली जिमखाना क्लब ने 23 मई को आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय के अधीन भूमि एवं विकास अधिकारी (एल एंड डीओ) को पत्र लिखकर कहा कि क्लब के स्थानांतरण को लेकर अभी कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर स्पष्टता नहीं है। क्लब ने पूछा है कि क्या उसे किसी अन्य स्थान पर स्थानांतरित किया जाएगा और क्या इसके लिए वैकल्पिक भूमि आवंटित की जाएगी। क्लब ने यह भी कहा कि जब तक इन मुद्दों पर स्थिति साफ नहीं होती, तब तक संस्था के संचालन को प्रभावित करने वाला कोई कदम नहीं उठाया जाना चाहिए।

दरअसल केंद्र सरकार ने 22 मई को दिल्ली जिमखाना क्लब परिसर को दोबारा अपने नियंत्रण में लेने और लीज समाप्त करने का आदेश जारी किया था। सरकार ने कहा कि यह भूमि मूल रूप से इम्पीरियल दिल्ली जिमखाना क्लब लिमिटेड को सामाजिक और खेल गतिविधियों के लिए लीज पर दी गई थी।

सरकार के आदेश में कहा गया कि यह परिसर राष्ट्रीय राजधानी के अत्यंत संवेदनशील और रणनीतिक क्षेत्र में स्थित है तथा रक्षा अवसंरचना को मजबूत करने और सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़े अन्य उद्देश्यों के लिए इसकी आवश्यकता है। आदेश में यह भी कहा गया कि यह भूमि तत्काल संस्थागत जरूरतों, प्रशासनिक अवसंरचना और जनहित परियोजनाओं के लिए आवश्यक है।

सरकार ने स्थायी लीज डीड की धारा 4 का हवाला देते हुए सार्वजनिक हित में संपत्ति में पुनः प्रवेश और लीज समाप्त करने के अधिकार का उपयोग करने की बात कही। आदेश के अनुसार, पूरा 27.3 एकड़ परिसर, जिसमें भवन, लॉन, ढांचे और अन्य फिटिंग्स शामिल हैं, अब भूमि एवं विकास कार्यालय के माध्यम से भारत के राष्ट्रपति के अधिकार में आ जाएगा।

क्लब को निर्देश दिया गया है कि वह 5 जून तक परिसर का शांतिपूर्ण कब्जा सौंप दे, अन्यथा कानून के अनुसार कार्रवाई कर कब्जा लिया जाएगा।

अपने जवाब में क्लब ने कहा कि भूमि एवं विकास कार्यालय के साथ लीज किराया बढ़ाने को लेकर पहले से चर्चा चल रही है और इस बढ़े हुए किराये को चुनौती देने वाली याचिका दिल्ली हाई कोर्ट में लंबित है। क्लब ने यह भी बताया कि वर्तमान में इसका संचालन राष्ट्रीय कंपनी विधि अधिकरण (NCLT) के 2022 के आदेश के तहत कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय द्वारा नियुक्त जनरल कमेटी कर रही है। यह व्यवस्था तब तक के लिए है जब तक निर्वाचित निकाय कार्यभार नहीं संभाल लेता।

क्लब ने अपने वित्तीय प्रदर्शन का भी उल्लेख किया। पत्र में कहा गया कि वर्ष 2023-24 के अनुमानित वित्तीय परिणामों में 925.10 लाख रुपये का लाभ दर्ज किया गया, जबकि 2021-22 में 1,239.26 लाख रुपये का घाटा हुआ था। क्लब ने बताया कि संस्था लगभग 14,000 सदस्यों और उपयोगकर्ताओं को सेवाएं देती है तथा 500 से अधिक लोगों को रोजगार प्रदान करती है। इसके अलावा दशकों में खेल सुविधाओं, अवसंरचना और प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर बड़े निवेश किए गए हैं।

जनरल कमेटी ने मंत्रालय से आग्रह किया कि यदि स्थानांतरण की योजना बनाई जा रही है तो क्लब को वैकल्पिक भूखंड आवंटित किया जाए। साथ ही सदस्यों, कर्मचारियों और अन्य हितधारकों की चिंताओं पर चर्चा के लिए अधिकारियों के साथ जल्द बैठक बुलाने की मांग भी की गई। क्लब के अनुसार जब तक सभी मुद्दों पर समाधान नहीं निकलता, तब तक उसकी गतिविधियों और संचालन में किसी प्रकार का व्यवधान नहीं होना चाहिए।

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