कारगिल युद्ध के वीर नायक कर्नल सोनम वांगचुक का निधन, हार्ट अटैक से ली अंतिम सांस

कारगिल युद्ध के वीर नायक कर्नल सोनम वांगचुक का निधन, हार्ट अटैक से ली अंतिम सांस

Kargil War hero Colonel Sonam Wangchuk passes away after suffering a heart attack.

“लायन ऑफ लद्दाख” नाम से मशहूर सोनम वांगचुक का शुक्रवार (10 अप्रैल) को दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। 61 वर्षीय सेवानिवृत्त कर्नल ने लेह स्थित अपने आवास पर अंतिम सांस ली। उनके निधन से पूरे देश, विशेषकर लद्दाख और सेना के पूर्व सैनिकों में शोक की लहर है।

कर्नल वांगचुक कारगिल युद्ध के प्रमुख नायकों में से एक थे और उन्हें उनकी वीरता के लिए महावीर चक्र से सम्मानित किया गया था, जो भारत का दूसरा सर्वोच्च सैन्य वीरता पुरस्कार है। उनका सैन्य करियर तीन दशकों तक फैला रहा, लेकिन 1999 के युद्ध में उनका साहसिक नेतृत्व उन्हें विशेष पहचान दिलाता है।

कारगिल युद्ध के दौरान, तब मेजर रहे वांगचुक ने 30 मई 1999 को लद्दाख के चोरबाट ला सेक्टर में एक बेहद कठिन सैन्य अभियान का नेतृत्व किया। बर्फीली ऊंचाइयों (करीब 5,500 मीटर) और प्रतिकूल मौसम के बावजूद उन्होंने अपनी टुकड़ी के साथ दुश्मन को पीछे हटने पर मजबूर किया और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण स्थानों को सुरक्षित किया। उनकी सूझबूझ, नेतृत्व क्षमता और साहस ने उन्हें सेना में एक प्रेरणादायक व्यक्तित्व बना दिया।

कर्नल वांगचुक अपने पीछे पत्नी पद्मा आंगमो को छोड़ गए हैं, जो दिल्ली में एक सिविल सर्वेंट हैं। परिवार के अनुसार, अंतिम संस्कार से पहले बौद्ध रीति-रिवाजों का पालन किया जाएगा।

भारतीय सेना ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया। वहीं रक्षा मंत्री राजनाथ सिंग ने भी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा, “कर्नल सोनम वांगचुक के निधन से बहुत दुख हुआ। वह भारतीय सेना के एक बहुत सम्मानित अधिकारी थे, जो अपनी बहादुरी, पक्के नेतृत्व और कर्तव्य के प्रति पक्के इरादे के लिए जाने जाते थे।” उन्होंने आगे कहा,”ऑपरेशन विजय के दौरान खुद मिसाल बनकर लीड करने के उनके हिम्मत वाले कामों ने बहुत मुश्किल हालात में, बहुत ऊंचाई पर, उनके आदमियों को हिम्मत दी।”

कर्नल वांगचुक का जीवन साहस, त्याग और देशभक्ति का प्रतीक रहा है। उनकी वीरता की कहानियां आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेंगी और देश हमेशा उनके योगदान को याद रखेगा।

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