मुंबई: इतिहास में पहली बार शुरू हुआ बांद्रा तालाब का पुनरुद्धार अभियान; प्रदूषण से खत्म हुआ है जलीय जीवन

बीएमसी ने तलाब का पानी निकालकर शुरू की गाद सफाई, सर्वे में नहीं मिला कोई जीवित जलीय प्राणी

मुंबई: इतिहास में पहली बार शुरू हुआ बांद्रा तालाब का पुनरुद्धार अभियान; प्रदूषण से खत्म हुआ है जलीय जीवन

Mumbai: Bandra Lake restoration campaign begins for the first time in history; pollution has destroyed aquatic life

आमतौर पर बांद्रा तालाब के नाम से प्रसिद्ध मुंबई के ऐतिहासिक स्वामी विवेकानंद लेक में पहली बार बड़े स्तर पर पानी और गाद निकालने का पुनरुद्धार कार्य शुरू किया गया है। जैव विविधता सर्वेक्षण में तालाब का पारिस्थितिकी तंत्र गंभीर रूप से प्रभावित होने की रिपोर्ट सामने आने के बाद यह कदम उठाया गया। सर्वेक्षण के अनुसार तालब में कोई भी जलीय जीवित प्रजाति नहीं बची है।

बांद्रा पश्चिम में स्थित यह 7.5 एकड़ में फैला ग्रेड-2 हेरिटेज जलाशय मुंबई के प्रमुख शहरी तालाबों में गिना जाता है। बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के एच-वेस्ट वार्ड द्वारा कराए गए बेसलाइन बायोडायवर्सिटी सर्वे में तालाब की स्थिति को अत्यधिक प्रदूषित और गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त बताया गया। रिपोर्ट में खराब जल गुणवत्ता और आसपास के घनी आबादी वाले क्षेत्र के कारण लगातार हो रहे पर्यावरणीय नुकसान का उल्लेख किया गया है।

एच-वेस्ट वार्ड के सहायक नगर आयुक्त दिनेश पल्लेवाड ने बताया कि तालाब का पूरा पानी निकालने में करीब 15 से 20 दिन लगे। उन्होंने कहा, “फिलहाल गाद निकालने का काम जारी है और इसे मानसून से पहले पूरा कर लिया जाएगा। इसके बाद तालाब में मौजूद प्राकृतिक झरनों और वर्षा जल की मदद से पारिस्थितिकी तंत्र को नए सिरे से विकसित किया जाएगा।”

अधिकारियों के अनुसार, पानी निकालने प्रक्रिया के दौरान तालाब में कोई भी जीवित जलीय प्रजाति नहीं मिली। केवल दो मृत कछुए तालाब के तल से बरामद किए गए।

बीएमसी अधिकारियों ने बताया कि तालाब में जलीय जीवन खत्म होने के पीछे मुख्य कारण वर्षों से बढ़ता प्रदूषण और पानी का ठहराव है। अध्ययन में पाया गया कि तालाब में बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड (BOD) का स्तर लगभग 100 मिलीग्राम प्रति लीटर तक पहुंच गया था, जबकि स्वस्थ जलाशयों में यह सामान्यतः 5 मिलीग्राम प्रति लीटर से कम होता है। उच्च BOD स्तर पानी में अत्यधिक जैविक प्रदूषण और ऑक्सीजन की गंभीर कमी का संकेत माना जाता है।

स्थिति को सुधारने के लिए बीएमसी ने तालाब के पास प्रतिदिन 10 लाख लीटर क्षमता वाला सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) स्थापित करने की योजना बनाई है। अधिकारियों का कहना है कि शुद्ध किए गए पानी को दोबारा तालाब में छोड़ा जाएगा, जिससे जल प्रवाह बेहतर होगा और ठहराव तथा ऑक्सीजन की कमी जैसी समस्याओं को दूर करने में मदद मिलेगी।

इस बीच महाराष्ट्र सरकार में मंत्री और बांद्रा पश्चिम के विधायक आशीष शेलार ने हाल ही में पुनरुद्धार कार्य का निरीक्षण किया और बीएमसी अधिकारियों को परियोजना तेजी से पूरी करने के निर्देश दिए।

पूर्व नगरसेवक आसिफ जकारिया ने भी इस परियोजना को इलाके के लिए बेहद महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा, “बांद्रा तालाब इस इलाके की पहचान का अहम हिस्सा है। वर्षों से पानी के ठहराव और पर्याप्त ऑक्सीजन व्यवस्था नहीं होने के कारण इसकी स्थिति बिगड़ती गई। उम्मीद है कि अब पुरानी गलतियां नहीं दोहराई जाएंगी और नागरिकों को एक स्वच्छ तालाब मिलेगा।”

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