पाकिस्तानी सेना का अफ़ग़ानिस्तान पर कायराना हमला, 13 लोगों की मौत

कुनार, खोस्त और पक्तिका प्रांतों में रातभर हुए हमलों में 11 बच्चों समेत 13 लोगों की जान गई, दोनों पक्षों के बीच तनाव लगातार गहराया

पाकिस्तानी सेना का अफ़ग़ानिस्तान पर कायराना हमला, 13 लोगों की मौत

Pakistan Army's cowardly attack on Afghanistan; 13 people killed.

पाकिस्तान द्वारा मंगलवार और बुधवार की दरमियानी रात अफ़ग़ानिस्तान के रिहायशी इलाकों में कायराना तरीक़े से हवाइ हमलें किए गए। इन हमलों में कम से कम 13 लोगों की मौत हो गई, जबकि 14 अन्य घायल हुए है। तालिबान के अनुसार, मृतकों में 11 बच्चे, एक महिला और एक बुजुर्ग व्यक्ति शामिल हैं।

तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने एक बयान जारी कर कहा कि पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के हवाई क्षेत्र का उल्लंघन करते हुए कुनार, खोस्त और पक्तिका प्रांतों में स्थित नागरिक घरों पर बमबारी की। उन्होंने दावा किया कि इस हमले में 14 महिलाएं भी घायल हुई हैं। मुजाहिद ने कथित पीड़ितों की तस्वीरें भी साझा कीं।

पिछले एक वर्ष के दौरान पाकिस्तान द्वारा अफगानिस्तान के भीतर किए गए हमलों और सीमा पार हिंसा में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। मार्च में हुए सबसे बड़े हमले में पाकिस्तान ने काबुल स्थित एक पुनर्वास केंद्र पर बमबारी की थी, जिसमें कम से कम 269 लोगों की मौत हुई थी।

दोनों देशों के बीच वर्षों से चला आ रहा तनाव अक्टूबर 2025 में बड़े सीमा-पार संघर्ष में बदल गया था, जब पाकिस्तान ने काबुल समेत अफगानिस्तान के कई हिस्सों में हवाई हमले किए थे। इसके बाद दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के खिलाफ जवाबी कार्रवाई की, जिससे सैकड़ों लोगों की जान गई और हजारों अफगान नागरिक विस्थापित हुए।

पाकिस्तान अफगानिस्तान के भीतर की गई सैन्य कार्रवाई तालिबान द्वारा तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) और बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) को कथित समर्थन दिए जाने के जवाब हमलें करने के जुमले कस रहा है। बता दें की इन संगठनों ने पिछले एक साल में पाकिस्तान की सेना पर कई हमले किए हैं, जिनमें सैकड़ों पाकिस्तानी सैनिकों की मौत हुई है।

टीटीपी और बीएलए की गतिविधियों में वृद्धि के कारण बीता वर्ष पाकिस्तान के लिए एक दशक से अधिक समय में सबसे हिंसक वर्षों में से एक रहा। इस वर्ष भी दोनों संगठनों के हमले और तालिबान के साथ सीमा-पार संघर्ष जारी है, जबकि पाकिस्तान पश्चिम एशिया के संघर्षों में मध्यस्थ की भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा है।

गौरतलब है कि कई दशकों तक पाकिस्तान को तालिबान का प्रमुख समर्थक माना जाता रहा, लेकिन 2021 में तालिबान के सत्ता में आने के बाद दोनों के बीच के रिश्ते ख़राब हुए। पाकिस्तान हमेशा से अमेरिका का मुफ़ीद रहा, ख़ामियाजा अफगानिस्तान को भरना पड़ा, जो आज भी जारी है। हालांकि पाकिस्तान लगातार आरोप लगाता रहा है कि तालिबान टीटीपी और बीएलए को शरण दे रहा है तथा भारत के इशारे पर पाकिस्तान के भीतर हमलों को बढ़ावा दे रहा है। हालांकि, इन आरोपों पर तालिबान की ओर से अलग रुख अपनाया जाता रहा है।

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