रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए भारत ने लखनऊ में निर्मित ब्रह्मोस मिसाइलों की पहली खेप भारतीय सेना को सौंप दी है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इसकी आधिकारिक घोषणा की और इसे देश के रक्षा उत्पादन में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर बताया।
लखनऊ में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान युद्ध नायकों और ‘वीर नारियों’ को सम्मानित किया गया, राजनाथ सिंह ने कहा कि ब्रह्मोस मिसाइल का निर्माण अब उत्तर प्रदेश की राजधानी में शुरू हो चुका है। उन्होंने लखनऊ को आगरा और कानपुर के साथ एक प्रमुख डिफेंस हब के रूप में उभरता हुआ बताया।
अपने संबोधन में रक्षा मंत्री ने कहा कि वित्त वर्ष 2024-25 में भारत का घरेलू रक्षा उत्पादन ₹1.5 लाख करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। इसके साथ ही, 2025-26 में रक्षा निर्यात भी बढ़कर ₹38,424 करोड़ के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि ये आंकड़े भारत की रक्षा क्षमता को मजबूत करने और वैश्विक स्तर पर अपनी स्थिति सुदृढ़ करने की दिशा में बड़े संकेत हैं।
रक्षा मंत्री ने यह भी बताया कि लखनऊ और आसपास के क्षेत्रों में रक्षा उपकरणों से जुड़ी कई छोटी और बड़ी फैक्ट्रियां स्थापित की जा रही हैं। इसे उन्होंने ‘आत्मनिर्भर भारत’ के व्यापक विजन का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया।
राजनाथ सिंह ने अपने संबोधन में राष्ट्रीय सुरक्षा को ‘विकसित भारत’ की आधारशिला बताते हुए कहा कि देश की सुरक्षा केवल सेना की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक का कर्तव्य है। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे कानून का पालन करें, गलत सूचनाओं से बचें और देशहित को प्राथमिकता दें।
उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक और घरेलू चुनौतियों के बीच भारत तेजी से रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है और जल्द ही दुनिया के अग्रणी रक्षा शक्तियों में शामिल हो सकता है। इस उपलब्धि के साथ भारत ने स्वदेशी रक्षा निर्माण को नई गति दी है, जो न केवल सैन्य क्षमता को मजबूत करेगा बल्कि देश की रणनीतिक स्वतंत्रता को भी और सुदृढ़ करेगा।
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