28.9 C
Mumbai
Wednesday, April 22, 2026
होमदेश दुनियाअमेरिका यूएई ऑस्ट्रेलिया पाकिस्तान में ईंधन कीमतें बढ़ीं, भारत स्थिर रहीं! 

अमेरिका यूएई ऑस्ट्रेलिया पाकिस्तान में ईंधन कीमतें बढ़ीं, भारत स्थिर रहीं! 

कोटक द्वारा जारी आंकड़ों में भारत और अन्य विकसित व उभरते देशों के बीच बड़ा अंतर देखने को मिला है, जहां इस साल अब तक कई देशों में ईंधन की कीमतें काफी बढ़ी हैं, जबकि भारत में ऐसा नहीं हुआ।

Google News Follow

Related

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने के कारण ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें बढ़ने के बावजूद भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम स्थिर बने हुए हैं। वहीं, कई देशों में ईंधन की कीमतों में 85 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी देखी गई है।

एनडीटीवी प्रॉफिट की रिपोर्ट के अनुसार, कोटक द्वारा जारी आंकड़ों में भारत और अन्य विकसित व उभरते देशों के बीच बड़ा अंतर देखने को मिला है, जहां इस साल अब तक कई देशों में ईंधन की कीमतें काफी बढ़ी हैं, जबकि भारत में ऐसा नहीं हुआ।

डीजल की बात करें भू-राजनीतिक तनावों के चलते हाल के महीनों में कई देशों में इसकी कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई है।

देशों के हिसाब से देखें तो, यूएई में डीजल की कीमतें करीब 85 प्रतिशत बढ़ीं। इसके बाद ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका में 65 प्रतिशत और 62 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज की गई। वहीं, कनाडा, पाकिस्तान, फ्रांस, श्रीलंका और ब्रिटेन में कीमतें 35 से 53 प्रतिशत तक बढ़ीं।

इसके अलावा, चीन और ब्राजील जैसे देशों में बढ़ोतरी थोड़ी कम रही, जबकि रूस में डीजल की कीमतें केवल 1 प्रतिशत से थोड़ी ज्यादा बढ़ीं।

इसके विपरीत, भारत में डीजल की कीमत जनवरी के स्तर पर ही 87.6 रुपए प्रति लीटर बनी हुई है, यानी इसमें कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है, भले ही अमेरिका-ईरान तनाव जारी है।

पेट्रोल की कीमतों में भी ऐसा ही रुझान देखने को मिला। पड़ोसी पाकिस्तान में पेट्रोल के दाम सबसे ज्यादा, यानी 44 प्रतिशत बढ़े। इसके बाद अमेरिका (42 प्रतिशत) और यूएई (36 प्रतिशत) का स्थान रहा।

वहीं, कनाडा, श्रीलंका और चीन में पेट्रोल की कीमतें 34 प्रतिशत तक बढ़ीं, जबकि ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन और फ्रांस में अपेक्षाकृत कम बढ़ोतरी हुई।

कम बढ़ोतरी वाले देशों में ब्राजील और रूस शामिल हैं, जहां कीमतें क्रमशः 7 प्रतिशत और 1 प्रतिशत से थोड़ा ज्यादा बढ़ीं। भारत में पेट्रोल की खुदरा कीमतें जनवरी के स्तर पर 94.7 रुपए प्रति लीटर पर स्थिर बनी हुई हैं, यानी उपभोक्ताओं के लिए कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है।

भारत में ईंधन की कीमतें स्थिर रहना यह दिखाता है कि सरकारी नीतियों और सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों (ओएमसी) की कीमत निर्धारण व्यवस्था ने कीमतों को नियंत्रित रखने में मदद की है। वैश्विक बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद भारतीय उपभोक्ताओं पर इसका सीधा असर नहीं पड़ा है।

रिपोर्ट के अनुसार, पहली बार ऐसा हुआ है कि ईंधन कीमतों के डीरिगुलेशन के बाद सरकारी तेल कंपनियां रिफाइनरियों से पेट्रोल, डीजल, एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) और केरोसीन को कम कीमत पर खरीद रही हैं, ताकि खुदरा कीमतों को स्थिर रखने से होने वाले नुकसान को कम किया जा सके।

एक अन्य रिपोर्ट में ब्रोकरेज फर्म मैक्वेरी ने कहा कि अगर पेट्रोल-डीजल की कीमत 135-165 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर रहती है, तो भारत की तेल कंपनियों को पेट्रोल पर लगभग 18 रुपए प्रति लीटर और डीजल पर 35 रुपए प्रति लीटर का नुकसान हो सकता है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि कच्चे तेल की कीमतों में प्रति बैरल 10 डॉलर की बढ़ोतरी से मार्केटिंग घाटा लगभग 6 रुपए प्रति लीटर बढ़ जाता है।

यह भी पढ़ें-

पाकिस्तान के अटक में सोना खनन: जिनकी जमीन उन्हीं पर मुकदमा दर्ज, मचा बवाल!

National Stock Exchange

लेखक से अधिक

कोई जवाब दें

कृपया अपनी टिप्पणी दर्ज करें!
कृपया अपना नाम यहाँ दर्ज करें

The reCAPTCHA verification period has expired. Please reload the page.

Star Housing Finance Limited

हमें फॉलो करें

151,155फैंसलाइक करें
526फॉलोवरफॉलो करें
303,000सब्सक्राइबर्ससब्सक्राइब करें

अन्य लेटेस्ट खबरें