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Wednesday, July 8, 2026
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मध्य प्रदेश में ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण देने पर सभी दल सहमत!

सभी दलों के विधायक विधानसभा में 27 प्रतिशत आरक्षण देने की बात उठाते रहे हैं। इस मामले में अलग-अलग वकील केस लड़ रहे हैं, जिस पर न्यायालय ने एक निर्णय लिया है।

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मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में गुरुवार को हुई सर्वदलीय बैठक में सभी दलों ने अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को 27 प्रतिशत आरक्षण दिए जाने पर सहमति जताई है। इसके साथ ही एक संकल्प भी पारित किया गया है।

ओबीसी को 14 से बढ़ाकर 27 प्रतिशत आरक्षण दिए जाने का मामला सर्वोच्च न्यायालय में लंबित है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बुधवार को राज्य के ओबीसी वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण दिए जाने की प्रतिबद्धता दोहराते हुए गुरुवार को सर्व सर्वदलीय बैठक बुलाने का आह्वान किया था।

उसी क्रम में मुख्यमंत्री आवास पर गुरुवार को सर्वदलीय बैठक हुई। इस सर्वदलीय बैठक में भाजपा, कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, कम्युनिस्ट पार्टी, और आम आदमी पार्टी के प्रतिनिधि शामिल हुए। बैठक के बाद संवाददाताओं से चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि सर्वदलीय बैठक में सभी दलों ने सर्वोच्च न्यायालय में ओबीसी को लेकर जो प्रकरण चल रहा है उस पर चर्चा की।

सभी दलों के विधायक विधानसभा में 27 प्रतिशत आरक्षण देने की बात उठाते रहे हैं। इस मामले में अलग-अलग वकील केस लड़ रहे हैं, जिस पर न्यायालय ने एक निर्णय लिया है।

इसी के मुताबिक 23 सितंबर से डे-टु-डे सुनवाई की जाने वाली है। ओबीसी आरक्षण को लेकर न्यायालय में कई याचिकाएं हैं। इसकी चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री यादव ने कहा कि इस मामले में सभी अधिवक्ता मत एक हों, इसके लिए सभी अधिवक्ता बैठकर तय कर लें।

सभी दलों के विधायक विधानसभा में ओबीसी आरक्षण का समर्थन करते रहे हैं। अब एक साथ बैठे हैं, सर्वदलीय संकल्प पारित किया है जिसके आधार पर ओबीसी आरक्षण देने के लिए एकजुट होकर एक मंच पर आए हैं।

वहीं वकील भी 10 सितंबर के पहले बैठकर बात करेंगे।

सर्वोच्च न्यायालय में लंबित मामले की चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री यादव ने कहा कि यह बात सही है कि 13 प्रतिशत आरक्षण पेंडिंग चल रहा है। अगर इस पर न्यायालय जल्दी से न्याय करेगी, तो जो विद्यार्थी 13 प्रतिशत में आते हैं और जो आयु सीमा पार कर गए हैं, उन्हें भी इसका लाभ मिलेगा।

दरअसल, कमलनाथ के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने ओबीसी आरक्षण 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत किए जाने का प्रस्ताव पारित किया था। उसके बाद मामला न्यायालय में लंबित है।
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