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अमित शाह ने जारी किया ‘श्वेत पत्र’, बंगाल में 15 साल के शासन पर उठाए गंभीर सवाल!

पश्चिम बंगाल में बांग्लादेश के साथ लगने वाली 2,216.7 किमी लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा में से 569 किमी हिस्सा अभी तक बिना बाड़ (फेंसिंग) के है।

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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की ओर से पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के 15 साल के शासन पर 35 पन्नों का ‘श्वेत पत्र’ जारी किया। इस रिपोर्ट में पांच बड़े मुद्दों को उठाया गया है, जिसमें घुसपैठ, व्यवस्था में भ्रष्टाचार और संस्थाओं की कमजोरी, आर्थिक और औद्योगिक गिरावट, सुरक्षा और कानून-व्यवस्था और “सामाजिक ढांचे का कमजोर होना शामिल है।

“घुसपैठ” के मुद्दे पर ‘श्वेत पत्र’ में दावा किया गया है कि पश्चिम बंगाल में बांग्लादेश के साथ लगने वाली 2,216.7 किमी लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा में से 569 किमी हिस्सा अभी तक बिना बाड़ (फेंसिंग) के है।राज्य सरकार द्वारा जमीन अधिग्रहण में देरी के कारण यह काम नहीं हो पाया, जिससे घुसपैठ को बढ़ावा मिला।

दस्तावेज में यह भी आरोप लगाया गया है कि तृणमूल कांग्रेस ने “वोट बैंक” बनाने के लिए घुसपैठियों को फर्जी पहचान पत्र दिलाने में सिंडिकेट चलाए, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा और जनसंख्या संतुलन पर असर पड़ा।

“व्यवस्था में भ्रष्टाचार और संस्थाओं के कमजोर होने” के मुद्दे पर कहा गया है कि अलग-अलग क्षेत्रों में फैले भ्रष्टाचार और ‘कट-मनी’ की संस्कृति से आम लोगों को मिलने वाली सेवाएं प्रभावित हुई हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि करीब 20 लाख सरकारी कर्मचारियों को महंगाई भत्ता नहीं मिला और सातवें वेतन आयोग को लागू नहीं किया गया, जिससे उनमें नाराजगी है।

इसके अलावा, मतदाता सूची में बदलाव की प्रक्रिया में रुकावट और सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया के निर्देशों की अनदेखी के आरोप भी लगाए गए हैं, जिससे हालात और खराब हुए। रिपोर्ट के अनुसार, 2016 के बाद से 300 से ज्यादा राजनीतिक हत्याएं और हत्या के 13,000 से अधिक प्रयास हुए हैं। साथ ही, राज्य के कई इलाकों में सांप्रदायिक तनाव की घटनाएं भी सामने आईं, जिससे डर का माहौल बना हुआ है।

श्वेत पत्र में महिलाओं के खिलाफ अपराधों को लेकर भी चिंता जताई गई है। रिपोर्ट में कहा गया कि 2023 में ऐसे 34,738 मामले दर्ज किए गए। इसके अलावा विधानसभा में विपक्ष के नेता को निलंबित करने और विपक्षी विधायकों की आवाज दबाने के आरोप भी लगाए गए, जिससे लोकतांत्रिक व्यवस्था कमजोर हुई।

“आर्थिक और औद्योगिक गिरावट” के तहत दावा किया गया है कि 15 साल में 6,688 कंपनियां राज्य छोड़कर चली गईं और 18,450 छोटे उद्योग बंद हो गए, जिससे बड़े पैमाने पर पूंजी का नुकसान हुआ। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि बेरोजगारी के कारण 40 लाख से ज्यादा युवाओं को राज्य छोड़ना पड़ा। स्नातकोत्तर स्तर पर बेरोजगारी दर 47.6 प्रतिशत बताई गई है।

कृषि क्षेत्र में भी संकट की बात कही गई है। आलू और धान के किसानों की समस्याएं, मछली पालन और डेयरी क्षेत्र में वसूली (उगाही) के आरोप, और उत्तर बंगाल के करीब 5 लाख चाय बागान मजदूरों की अनदेखी का जिक्र श्वेत पत्र में किया गया है।

“सामाजिक ढांचे के कमजोर होने” के तहत बताया गया कि सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया के आदेश के बाद राज्य के स्कूलों में 26,000 शिक्षकों और गैर-शिक्षक कर्मचारियों की नौकरियां रद्द करनी पड़ीं, क्योंकि नियुक्तियों में गड़बड़ी पाई गई थी।

श्वेत पत्र में स्वास्थ्य क्षेत्र में गिरावट का भी आरोप लगाया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य ने आयुष्मान भारत योजना लागू नहीं की और फर्जी दवाओं के घोटालों के मामले सामने आए। साथ ही, सुपर-स्पेशियलिटी अस्पतालों में बुनियादी सुविधाओं की कमी बताई गई।

शहरी समस्याओं का जिक्र करते हुए कहा गया कि कोलकाता में बुनियादी ढांचे की हालत खराब हो रही है, जहां अवैध निर्माण, फ्लाईओवर गिरने की घटनाएं और बार-बार आग लगने जैसी समस्याएं सामने आई हैं।

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