आसाम विधानसभा चुनाव 2026: सत्ता में लौटने को तैयार हिमंत बिस्वा सरमा की सरकार

चार राज्यों में अकेले मौजूदा मुख्यमंत्री जो बचा पाएंगे कुर्सी

आसाम विधानसभा चुनाव 2026: सत्ता में लौटने को तैयार हिमंत बिस्वा सरमा की सरकार

Himanta Biswa Sarma will become the Chief Minister for the second consecutive time, the date has been fixed

आसाम विधानसभा चुनाव 2026 में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाला राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) प्रचंड जीत की ओर बढ़ता नजर आ रहा है। शुरुआती रुझानों के अनुसार, मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा एक बार फिर सत्ता में वापसी करते दिख रहे हैं और वे आसाम, केरल, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के चार राज्यों में चुनाव के बाद अपनी कुर्सी बरकरार रखने वाले इकलौते मौजूदा मुख्यमंत्री बन सकते हैं।

मतगणना के दौरान सुबह तक मिले रुझानों में 126 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत के लिए जरूरी 64 सीटों का आंकड़ा एनडीए ने आसानी से पार कर लिया है। गठबंधन 90 से अधिक सीटों की ओर बढ़ता दिख रहा है और कुछ रुझानों में यह आंकड़ा 100 के पार जाता नजर आ रहा है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, एनडीए लगभग 102 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है, जबकि कांग्रेस के नेतृत्व वाला विपक्षी गठबंधन महज 24 सीटों तक सिमटता दिख रहा है।

चुनाव आयोग के आधिकारिक रुझानों के अनुसार, भाजपा 78 सीटों पर आगे है, जबकि उसके सहयोगी आसाम गण परिषद (AGP) 10 और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (BPF) 10 सीटों पर बढ़त बनाए हुए हैं। इस तरह एनडीए का कुल आंकड़ा 97 सीटों तक पहुंच रहा है। वहीं कांग्रेस 24 सीटों पर और AIUDF सिर्फ 2 सीटों पर आगे है।

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा खुद जलुकबाड़ी सीट से बड़े अंतर से आगे चल रहे हैं। शुरुआती दौर में ही वे 8,000 से अधिक वोटों की बढ़त बना चुके हैं, जो उनकी व्यक्तिगत लोकप्रियता और राज्य में एनडीए की मजबूत पकड़ को दर्शाता है। सहयोगी दल भी अपने पारंपरिक क्षेत्रों में अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं, जिससे गठबंधन की जीत और मजबूत होती दिख रही है।

इसके विपरीत, आसाम कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई के नेतृत्व वाला विपक्षी गठबंधन बुरी तरह पिछड़ता नजर आ रहा है। जोरहाट सीट से चुनाव लड़ रहे गौरव गोगोई शुरुआती राउंड में भाजपा के हितेंद्र नाथ गोस्वामी से पीछे चल रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई के पुत्र और तीन बार के लोकसभा सांसद रहे गौरव गोगोई का विधानसभा चुनाव में उतरने का दांव फिलहाल उल्टा पड़ता दिख रहा है।

केवल गौरव गोगोई ही नहीं, बल्कि अन्य प्रमुख विपक्षी नेता भी पीछे चल रहे हैं। रायजोर दल के नेता अखिल गोगोई और असम जातीय परिषद के प्रमुख लुरिंज्योति गोगोई भी अपने-अपने क्षेत्रों में संघर्ष करते नजर आ रहे हैं, जिससे विपक्ष के ‘महागठबंधन’ को बड़ा झटका लगा है।

गौरतलब है कि इस बार राज्य में 85.9 प्रतिशत से अधिक मतदान हुआ, जो 1951 के बाद सबसे ज्यादा है। विपक्ष ने जहां ‘साइलेंट वेव’ का दावा किया था, वहीं नतीजों के रुझान बताते हैं कि मतदाताओं ने विकास, बुनियादी ढांचे और घुसपैठ जैसे मुद्दों पर एनडीए की नीतियों को समर्थन दिया है।

अन्य राज्यों की बात करें तो पश्चिम बंगाल में बीजेपी और तृणमूल कांग्रेस के बीच कड़ा मुकाबला दिख रहा है, जबकि केरल में सत्ता परिवर्तन की संभावना जताई जा रही है। तमिलनाडु में भी त्रिशंकु स्थिति बनती दिख रही है। इस पूरे परिदृश्य में असम का जनादेश खास बन गया है, जहां हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व में एनडीए लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी की ओर अग्रसर है, जो राज्य की राजनीति में एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है।

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