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Friday, August 14, 2026
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हैदराबाद में विरासत भूमि नीलामी पर बीआरएस ने उठाए सवाल!

पूर्व मंत्री हरीश राव ने आरोप लगाया कि तेलंगाना में गाचीबोवली, लागाचार्ला, मौलाना आजाद नेशनल उर्दू यूनिवर्सिटी क्षेत्र और रायदुर्ग समेत विभिन्न स्थानों की जमीनों को बेचने की साजिश चल रही है।

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भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के तेलंगाना विधानसभा में उपनेता टी. हरीश राव ने हैदराबाद के आईटी कॉरिडोर के प्रमुख इलाके रायडुर्ग में 10.63 एकड़ कथित ‘विरासत’ भूमि की प्रस्तावित नीलामी तत्काल रोकने की मांग की है। उन्होंने मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी को पत्र लिखकर 17 और 21 अगस्त को प्रस्तावित नीलामी पर रोक लगाने का आग्रह किया।

पूर्व मंत्री हरीश राव ने आरोप लगाया कि तेलंगाना में गाचीबोवली, लागाचार्ला, मौलाना आजाद नेशनल उर्दू यूनिवर्सिटी क्षेत्र और रायदुर्ग समेत विभिन्न स्थानों की जमीनों को बेचने की साजिश चल रही है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी जब विपक्ष में थे, तब सरकारी जमीनों को पूर्वजों की विरासत और राष्ट्रीय संपत्ति बताते हुए इनके संरक्षण की बात करते थे, लेकिन अब सरकारी संपत्तियों को नीलामी के जरिए बेचा जा रहा है।

हरीश राव ने कहा कि हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी की पर्यावरणीय भूमि से लेकर रायदुर्ग की विरासत वाली चट्टानी भूमि तक, तेलंगाना की बहुमूल्य सार्वजनिक संपत्तियां खतरे में हैं।

उन्होंने तेलंगाना इंडस्ट्रियल इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरपोरेशन द्वारा रायदुर्ग पनमक्था गांव में 10.63 एकड़ भूमि की नीलामी पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि सर्वे नंबर 83 को विरासत स्थल घोषित किया जा चुका है और इस जमीन पर एसबीआई तथा वक्फ से जुड़े स्वामित्व दावे भी कानूनी जांच के दायरे में हैं।

हरीश राव ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट भी ऐसे विवादित मामलों में तीसरे पक्ष के अधिकार पैदा होने से रोकने की जरूरत पर जोर दे चुका है। उन्होंने याद दिलाया कि वर्ष 2020 में रेवंत रेड्डी ने खुद अदालत का रुख कर रायदुर्ग की इन जमीनों की सुरक्षा की मांग की थी।

उन्होंने सवाल किया कि मुख्यमंत्री बनने के बाद अब वह ऐसे विवादित भूखंड की नीलामी की अनुमति कैसे दे सकते हैं, जिससे तीसरे पक्ष के अधिकार पैदा हो सकते हैं।

बीआरएस नेता ने कहा कि सरकार को पहले जमीन के वैध स्वामित्व और कानूनी स्थिति को स्पष्ट करना चाहिए। जब तक स्वामित्व का अंतिम निर्धारण नहीं हो जाता, तब तक किसी भी तरह की नीलामी की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।

उन्होंने बताया कि इसी सर्वे नंबर की 6.2 एकड़ जमीन पहले करीब 237 करोड़ रुपये प्रति एकड़ की दर से नीलाम की जा चुकी है। इसके बाद एसबीआई ने इस जमीन पर स्वामित्व का दावा किया और मामला फिलहाल तेलंगाना हाईकोर्ट में लंबित है।

हरीश राव ने कहा कि ऐसी स्थिति में उसी विवादित सर्वे नंबर की अतिरिक्त 10.63 एकड़ भूमि को 5.25 और 5.38 एकड़ के दो भूखंडों में बांटकर नीलाम करना गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने इसे प्रशासनिक सावधानी, उचित जांच-पड़ताल और प्रक्रिया की पारदर्शिता के लिहाज से चिंताजनक बताया।

उन्होंने विवादित भूमि की बिक्री, हस्तांतरण, पंजीकरण और विकास गतिविधियों पर तब तक रोक लगाने की मांग की, जब तक स्वामित्व का कानूनी रूप से अंतिम निर्धारण नहीं हो जाता।

हरीश राव ने विरासत संपत्ति से जुड़े गायब, गलत जगह रखे गए या छेड़छाड़ किए गए रिकॉर्ड की जांच और संरक्षण की भी मांग की। उन्होंने पहले हुई 6.2 एकड़ की नीलामी, एसबीआई के स्वामित्व दावे और हाईकोर्ट में लंबित मामले की समीक्षा तथा वक्फ रिकॉर्ड के कथित गायब या गलत जगह रखे जाने की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की।

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