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धुबरी गोमांस कांड: हनुमान मंदिर को अपवित्र करने के मामले में 38 गिरफ्तार

सीएम हिमंता का सख्त संदेश — ‘देखते ही गोली मारो’ का आदेश

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असम के धुबरी जिले में बकरीद के बाद उपजे सांप्रदायिक तनाव ने नया मोड़ ले लिया है। हनुमान मंदिर के सामने कथित रूप से गोमांस फेंकने की घटना के बाद राज्य सरकार ने सख्त रवैया अपनाया है। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने शनिवार (14जून) को जानकारी दी कि इस मामले में रातोंरात 38 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।

मुख्यमंत्री सरमा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, “धुबरी गोमांस कांड में रात भर में 38 लोग गिरफ्तार।”

ज्ञात हो धुबरी मुस्लिम बहुल इलाका है, जहां बकरीद के अगले ही दिन हनुमान मंदिर के सामने गोमांस फेंका गया। स्थानीय समुदायों के बीच तनाव न फैले, इसके लिए तुरंत बैठकें हुईं, शांति समिति ने हस्तक्षेप किया और मामला फिलहाल सुलझा लिया गया। लेकिन अगले ही दिन फिर से वही हरकत दोहराई गई, जिससे क्षेत्र में तनाव गहरा गया। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि कुछ उपद्रवियों ने पथराव किया और यहां तक कि ‘धुबरी बांग्लादेश का हिस्सा है’ जैसे विवादास्पद पोस्टर भी लगाए गए।

इस घटना को राज्य की सांप्रदायिक शांति पर हमला मानते हुए मुख्यमंत्री हिमंता सरमा ने सख्त कदम उठाए। उन्होंने साफ शब्दों में कहा, “मैंने पुलिस को निर्देश दिया है कि धुबरी जिले में सांप्रदायिक शांति और सद्भाव को बिगाड़ने की कोशिश करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। अगर जरूरत पड़ी, तो पुलिस यहां उपद्रवियों के खिलाफ रात में ‘देखते ही गोली मारने’ के आदेश का पालन करेगी।”

उन्होंने आगे कहा,”पिछले हफ्ते से धुबरी में कानून-व्यवस्था की स्थिति चुनौतीपूर्ण रही है। हम जिले में कानून व्यवस्था लागू करने और सभी सांप्रदायिक ताकतों को हराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।” धुबरी प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी है। संवेदनशील इलाकों में पुलिस की गश्त बढ़ाई गई है और सोशल मीडिया पर फैल रहे किसी भी भड़काऊ कंटेंट को लेकर सख्त निगरानी की जा रही है।

धुबरी की यह घटना केवल एक मंदिर या एक समुदाय से जुड़ा मामला नहीं, बल्कि सांप्रदायिक सौहार्द्र और धार्मिक स्थलों की पवित्रता पर हमला है। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की ‘शून्य सहिष्णुता’ की नीति ने यह स्पष्ट कर दिया है कि असम में किसी को भी सामाजिक ताने-बाने को छेड़ने की छूट नहीं दी जाएगी। अब देखना यह है कि क्या इतनी सख्ती के बाद भी असामाजिक तत्वों की हिम्मत टूटेगी या हालात और गंभीर मोड़ लेंगे।

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