सीएम सम्राट चौधरी ने मंगलवार को देश के वरिष्ठ पुरातत्वविदों और विशेषज्ञों के प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक की। बैठक में कैमूर जिले के मां मुंडेश्वरी मंदिर परिसर और आसपास बिखरे प्राचीन भग्नावशेषों के वैज्ञानिक संरक्षण और पुनर्स्थापन पर विस्तार से चर्चा हुई।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि विशेषज्ञों की सिफारिशों के अनुरूप चरणबद्ध कार्ययोजना तैयार की जाए। साथ ही पूरे क्षेत्र की पर्यटन क्षमता का समग्र विकास किया जाए, ताकि देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को समृद्ध सांस्कृतिक और ऐतिहासिक अनुभव मिल सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि वैज्ञानिक संरक्षण और सुनियोजित विकास के बाद इन क्षेत्रों को भविष्य में यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल कराने की दिशा में भी प्रयास किए जा सकते हैं। मुख्यमंत्री ने बोधगया स्थित महाबोधि मंदिर परिसर और उसके आसपास अत्याधुनिक लाइट डिटेक्शन एंड रेंजिंग तथा ग्राउंड पेनेट्रेटिंग रडार तकनीक के माध्यम से सर्वेक्षण कराने का भी निर्देश दिया।
उन्होंने कहा कि इन स्थलों की ऐतिहासिक और धार्मिक महत्ता को व्यवस्थित ढंग से संरक्षित और प्रस्तुत किया जाए, ताकि धार्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन को नई गति मिल सके। बैठक में विश्व के सबसे बड़े बौद्ध स्तूपों में शामिल केसरिया स्तूप के शेष हिस्से के वैज्ञानिक उत्खनन का भी निर्णय लिया गया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अब तक स्तूप का केवल आंशिक उत्खनन हुआ है, जबकि इसके बड़े हिस्से में अभी भी महत्वपूर्ण पुरातात्विक अवशेष होने की संभावना है। उन्होंने शेष क्षेत्र के वैज्ञानिक उत्खनन और संरक्षण की प्रक्रिया तेज करने का निर्देश दिया।
उन्होंने कहा कि बिहार की धरती के नीचे अब भी अनेक महत्वपूर्ण पुरातात्विक धरोहर सुरक्षित हैं। इनके वैज्ञानिक सर्वेक्षण, उत्खनन और संरक्षण से राज्य के इतिहास के नए अध्याय सामने आएंगे। साथ ही सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर सृजित होंगे और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
