बेंगलुरु के मदीवाला स्थित कृपानिधि कॉलेज में कॉमन एंट्रेंस टेस्ट (CET) के दौरान हिंदुओ की धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला एक गंभीर मामला सामने आया है। परीक्षा केंद्र पर सुरक्षा जांच के नाम पर कई हिंदू छात्रों को उनका पवित्र जनेऊ (यज्ञोपवीत) उतारने के लिए मजबूर किया गया। इस घटना के बाद छात्रों और उनके परिजनों में गहरा रोष है और राज्य की राजनीति में भी उबाल आ गया है।
पीड़ित छात्रों ने मीडिया और पुलिस को आपबीती सुनाते हुए बताया कि वे सुबह करीब 9:40 बजे परीक्षा केंद्र पहुंचे थे। प्रवेश द्वार पर तैनात कर्मचारियों ने उन्हें तब तक अंदर जाने से मना कर दिया जब तक कि उन्होंने अपना जनेऊ नहीं उतार दिया।
एक व्यथित छात्र ने समाचार एजेंसी ANI को बताया, “मैं सुबह करीब 9:40 बजे केंद्र पर पहुंचा था। उन्होंने मेरा जनेऊ देखा और मुझे रोक दिया। वे कहने लगे कि आपको इसे उतारना होगा, वरना हम आपको परीक्षा लिखने की अनुमति नहीं दे सकते। मेरे जैसे करीब सात और छात्रों को भी जनेऊ उतारने को कहा गया। हमारे पास कोई विकल्प नहीं था, इसलिए हमने इसे उतार दिया। मुझे बहुत दुख हुआ और मैं मानसिक तनाव के कारण परीक्षा पर ठीक से ध्यान केंद्रित नहीं कर पाया।”
छात्रों का कहना है कि उन्हें एक महत्वपूर्ण परीक्षा के दबाव के बीच इस तरह की अपमानजनक स्थिति का सामना करना पड़ा, जिससे उनकी एकाग्रता भंग हुई।
हैरानी की बात यह है कि पिछले साल भी शिवमोगा और बीदर जैसे जिलों में इसी तरह की घटनाएं सामने आई थीं। उस समय विवाद बढ़ने के बाद कर्नाटक सरकार ने स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए थे कि छात्रों को परीक्षा के दौरान जनेऊ (जो कपड़ों के अंदर पहना जाता है), कलावा, तिलक उतारने के लिए नहीं कहा जाएगा। इसके बावजूद, 2026 की परीक्षा में फिर से वही घटना दोहराई गई।
दौरान राज्य की कांग्रेस सरकार के उच्च शिक्षा मंत्री एम.सी. सुधाकर ने इस चूक को स्वीकार किया है। उन्होंने मीडिया से कहा,“CET परीक्षा के दौरान कुछ लड़कों को उनका पवित्र धागा हटाने के लिए कहा गया। अधिकारियों ने इसे बेहद परेशान करने वाला बताया है, क्योंकि पिछले साल भी ऐसी घटनाएं हुई थीं जिस पर कड़े निर्देश दिए गए थे। स्पष्ट दिशा-निर्देशों और ड्रेस कोड की निगरानी के लिए विशेष अधिकारियों की तैनाती के बावजूद यह मुद्दा दोहराया गया है, जिससे यह संदेह पैदा होता है कि क्या यह जानबूझकर किया गया था। सरकार इस कृत्य को मानवाधिकारों और निजता का उल्लंघन मानती है। किसी भी छात्र को आस्था और शिक्षा के बीच चुनाव करने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए।”
#WATCH | Bengaluru | A student who appeared for the CET examination at the center in Krupanidhi College, Madivala, Bengaluru, says, "I went to the center around 9.40 am. I kept the bag in the room and they didn't allow me because they saw my 'Janeu'. They started telling that you… https://t.co/5fxFsa8btY pic.twitter.com/2I36COrm7k
— ANI (@ANI) April 24, 2026
मंत्री ने आगे बताया कि परीक्षा केंद्र प्रबंधन के खिलाफ शिकायत दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं और उपायुक्त (DC) को सख्त कार्रवाई करने को कहा गया है।
इस घटना पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने कड़ा रुख अपनाया है। भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या और अन्य नेताओं ने इसे “हिंदू विरोधी” कृत्य करार दिया है। हिजाब जैसे मुद्दों पर बहस होती है, वहीं जनेऊ जैसे धार्मिक प्रतीकों, जिनसे किसी भी प्रकार की नकल की संभावना नहीं है, उसे क्यों निशाना बनाया जा रहा है। भाजपा नेताओं ने सवाल किया कि शरीर से लिपटे एक धागे से परीक्षा की शुचिता को क्या खतरा हो सकता है?
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