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Monday, July 20, 2026
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कर्नाटक सरकार फेरबदल की आहट, दिल्ली पहुंचे सिद्धारमैया-डीके शिवकुमार की बैठक पर टिकी नजरें

2028 विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस नेतृत्व कर सकता है बड़ा राजनीतिक रीसेट; मुख्यमंत्री बदलाव से लेकर कैबिनेट पुनर्गठन तक कई विकल्पों पर मंथन

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कर्नाटक में कांग्रेस सरकार के भीतर जारी सत्ता संघर्ष के बीच मंगलवार को दिल्ली में होने वाली अहम बैठक पर राजनीतिक हलकों की नजरें टिक गई हैं। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार सोमवार (25 मई)शाम दिल्ली पहुंचे, जहां उन्हें पार्टी नेतृत्व ने तलब किया है। दोनों नेताओं की बैठक कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर होगी, जिसमें राहुल गांधी भी मौजूद रहेंगे।

सूत्रों के अनुसार, बैठक में कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन, सरकार के प्रदर्शन और 2028 विधानसभा चुनावों से पहले संगठनात्मक रणनीति को लेकर व्यापक चर्चा होने की संभावना है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि अगले चुनाव से पहले प्रशासनिक ढांचे और राजनीतिक संतुलन में बदलाव जरूरी हो सकता है ताकि सरकार की कार्यक्षमता और जनसंपर्क को बेहतर बनाया जा सके।

बताया जा रहा है कि कांग्रेस हाईकमान कर्नाटक में तीन संभावित विकल्पों पर विचार कर रहा है।

पहला विकल्प बिना मुख्यमंत्री बदले कैबिनेट फेरबदल का है। इस स्थिति में पार्टी सामाजिक और राजनीतिक संतुलन साधने की कोशिश कर सकती है। सूत्रों के मुताबिक, “अहिंदा” प्रतिनिधित्व को और मजबूत करने, कमजोर प्रदर्शन वाले मंत्रियों को हटाने और प्रशासनिक छवि सुधारने के लिए बड़े स्तर पर कैबिनेट पुनर्गठन किया जा सकता है। कन्नड़ राजनीति में AHINDA का अर्थ अल्पसंख्यक, पिछड़ा वर्ग और दलित समुदायों के गठजोड़ से है, जिसे सिद्धारमैया की प्रमुख राजनीतिक रणनीति माना जाता है।

सूत्रों का कहना है कि इस संभावित फेरबदल में डीके शिवकुमार के सुझावों को भी महत्व दिया जा सकता है ताकि यह एकतरफा निर्णय न लगे बल्कि दोनों गुटों के बीच सहमति का मॉडल बन सके।

दूसरा और राजनीतिक रूप से सबसे संवेदनशील विकल्प नेतृत्व परिवर्तन का माना जा रहा है। पार्टी के भीतर लंबे समय से यह चर्चा चल रही है कि 2023 में कांग्रेस सरकार बनने के दौरान मुख्यमंत्री पद को लेकर सत्ता साझा करने का फॉर्मूला तय हुआ था। डीके शिवकुमार समर्थक विधायक लगातार सार्वजनिक रूप से उन्हें मुख्यमंत्री बनाए जाने की मांग उठा रहे हैं।

इस विकल्प के तहत डीके शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाया जा सकता है, जबकि सिद्धारमैया को राज्यसभा भेजे जाने पर विचार हो सकता है। हालांकि इस तरह का फैसला दोनों गुटों के बीच नए शक्ति संतुलन और बड़े कैबिनेट पुनर्गठन की मांग करेगा।

तीसरा और अपेक्षाकृत कम संभावित विकल्प खुद मल्लिकार्जुन खड़गे के नाम को लेकर भी चर्चा में है। सूत्रों का कहना है कि यदि सिद्धारमैया और शिवकुमार गुटों के बीच सहमति नहीं बनती है, तो खड़गे को एक सर्वमान्य चेहरे के रूप में आगे लाया जा सकता है। हालांकि ऐसा होने पर कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व ढांचे में बड़ा बदलाव करना पड़ेगा और राहुल गांधी सहित शीर्ष नेतृत्व को नई रणनीति बनानी होगी।

इसी राजनीतिक हलचल के बीच राज्य में तीन राज्यसभा सीटों और नौ विधान परिषद सीटों के चुनाव भी होने वाले हैं। राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन की अंतिम तिथि 8 जून तय की गई है। उम्मीदवार चयन को लेकर भी पार्टी के भीतर नए दौर की खींचतान और गुटबाजी देखने को मिल सकती है।

पिछले कुछ महीनों में कर्नाटक कांग्रेस के भीतर सत्ता संघर्ष लगातार तेज हुआ है। राज्य सरकार ने अपना आधा कार्यकाल पूरा कर लिया है और इसी के साथ नेतृत्व परिवर्तन की चर्चाएं फिर जोर पकड़ने लगी हैं। हालांकि डीके शिवकुमार इस मुद्दे पर सार्वजनिक तौर पर सावधानी बरतते रहे हैं। उन्होंने कई बार कहा है, “समय ही इन सवालों का जवाब देगा।”

केरल में कांग्रेस की सत्ता में वापसी के बाद कर्नाटक इकाई के भीतर भी राजनीतिक पुनर्संतुलन और भविष्य की रणनीति को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

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