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शिवसेना में बगावत पर सुको में 1 अगस्त को अगली सुनवाई

दोनो पक्षों को 29 जुलाई तक हलफनामा दाखिल करने का आदेश, दोनो पक्षों ने मांगा समय  

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महाराष्ट्र में शिवसेना में बगावत के बाद पैदा हुए राजनीतिक संकट को लेकर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट(सुको ) में सुनवाई शुरू हुई। दोनों पक्षों की तरफ से अदालत से समय मांगने के बाद सर्वोच्च न्यायालय ने दोनों पक्षों को 29 जुलाई तक जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 1 अगस्त को होगी।

बुधवार को अदालत में सुनवाई के दौरान उद्धव ठाकरे पक्ष के वकील कपिल सिब्बल ने कोर्ट में कहा की इस तरह से हर चुनी हुई सरकार को गिराया जा सकता है, क्योंकि शेड्यूल 10 में संरक्षण नहीं दिया गया है। शिवसेना से अलग होने वाले विधायक अयोग्य हैं। उन्होंने किसी के साथ विलय भी नहीं किया। अब मैं राज्यपाल पर कुछ बिंदु रखना चाहता हूँ। सुप्रीम कोर्ट में केस लंबित रहते दूसरे गुट को आमंत्रित कर दिया। उसी तरह विधानसभा अध्यक्ष ने उन्हें वोट डालने का मौका दिया।

सिब्बल ने कहा कि इन सभी बिंदुओं पर सुप्रीम कोर्ट को फैसला लेना है। विधानसभा से सभी रिकॉर्ड तलब करें। यह देखें कि कब क्या कार्रवाई हुई? कैसे हुई? अयोग्य लोगों को लंबे समय तक नहीं रहने देना चाहिए। जल्द सुनवाई हो। उद्धव पक्ष के दूसरे वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कोर्ट में कहा कि अलग होने वाला गुट गुवाहाटी चला गया। डिप्टी स्पीकर को अज्ञात ईमेल से चिट्ठी भेजी कि हमें आप पर विश्वास नहीं। डिप्टी स्पीकर ने इसे खारिज किया। उसे रिकॉर्ड पर नहीं लिया। जब उसे रिकॉर्ड पर ही नहीं लिया गया तो डिप्टी स्पीकर को अविश्वास प्रस्ताव लंबित होने के दम पर काम से कैसे रोका जा सकता था?

सिंघवी: इन विधायकों को वोट डालने का मौका नहीं मिलना चाहिए था। यह कानून ही नहीं, नैतिकता का भी सवाल है। अब नए स्पीकर सब कुछ तय करेंगे तो यह सही नहीं होगा। हम मांग करेंगे कि उन विधायकों को अंतरिम रूप से अयोग्य करार दिया जाए। इस पर चीफ जस्टिस ने पूछा कि नई याचिका क्या दाखिल हुई है?जवाब में सिब्बल ने कहा कि यह सुभाष देसाई की याचिका है। इसमें अब तक के सारे मुद्दे कवर किए गए हैं।

शिंदे ने नहीं छोड़ी है शिवसेना: इस बीच एकनाथ शिंदे पक्ष के वकील हरीश साल्वे ने सुप्रीम कोर्ट से जवाब देने के लिए एक सप्ताह का समय मांगा। साल्वे ने कहा कि शिंदे ने शिवसेना नहीं छोड़ी है। शिवसेना के विधायकों ने बहुमत से उन्हे अपना नेता चुना है। लोकतंत्र में यह जायज है। जिसके पास 15 विधायकों का भी समर्थन नहीं है। वह फिर से सत्ता में कैसे आ सकता है। जबकि शिंदे पक्ष के दूसरे वकील महेश जेठमलानी ने कहा की उद्धव ठाकरे के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा के बाद ये सारे मसले समाप्त हो चुके हैं।

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