यूपी के किसानों को बड़ी राहत, बिना रजिस्ट्रेशन गेहूं बिक्री संभव अब

अधिकारियों के मुताबिक, किसानों को योग्य होने के लिए अब 'फार्म रजिस्ट्री' की जरूरत नहीं होगी और वे नई खरीद व्यवस्था लागू होने से पहले की तरह ही अपनी फसलें बेच सकेंगे।

यूपी के किसानों को बड़ी राहत, बिना रजिस्ट्रेशन गेहूं बिक्री संभव अब

Major Relief for UP Farmers: Wheat Sale Now Possible Without Registration. The Uttar Pradesh government provided significant relief to farmers on Monday, allowing wheat-producing farmers to sell their crops at government procurement centers without the need for prior registration. This move by the government is being viewed as a major relief for a large section of the farming community, as it eliminates the existing requirement for farmers to register themselves at government centers before selling their produce. According to officials, farmers will no longer require a 'Farm Registry' to qualify and will be able to sell their crops just as they did prior to the implementation of the new procurement system. District Magistrates across the state have also been directed to implement these instructions with immediate effect and to ensure a "hassle-free procurement process" for everyone. This decision was evidently taken following numerous reports highlighting the inconveniences and difficulties faced by farmers.

उत्तर प्रदेश सरकार ने सोमवार को किसानों को बड़ी राहत दी है। अब गेहूं उत्पादक किसान बिना रजिस्ट्रेशन के ही सरकारी खरीद केंद्रों पर अपनी फसल बेच सकेंगे। सरकार के इस कदम को किसानों के एक बड़े तबके के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है। क्योंकि इससे अपनी फसलों को बेचने के लिए सरकारी केंद्रों पर पहले खुद को रजिस्टर करवाने की मौजूदा शर्त खत्म हो गई है।

अधिकारियों के मुताबिक, किसानों को योग्य होने के लिए अब ‘फार्म रजिस्ट्री’ की जरूरत नहीं होगी और वे नई खरीद व्यवस्था लागू होने से पहले की तरह ही अपनी फसलें बेच सकेंगे। पूरे राज्य के जिलाधिकारियों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे इन निर्देशों को तुरंत प्रभाव से लागू करें और सभी के लिए “आसान खरीद” सुनिश्चित करें। यह फैसला जाहिर तौर पर किसानों को होने वाली असुविधाओं और परेशानियों की कई रिपोर्टें सामने आने के बाद लिया गया है।

इस निर्देश से उन किसानों और गांवों को सबसे अधिक फायदा होने की उम्मीद है, जहां ‘चकबंदी’ चल रही है। इनमें से कई किसान अपने-अपने ग्राम पंचायतों में चल रही इस प्रक्रिया की वजह से अपने ‘किसान रजिस्ट्री’ सर्टिफिकेट हासिल नहीं कर पाए थे।

पाबंदियों के चलते किसान अपनी गेहूं की पैदावार सरकारी केंद्रों तक नहीं पहुंचा पाए और उन्हें अपनी फसल बिचौलियों को बहुत कम कीमतों पर बेचने पर मजबूर होना पड़ा, जिससे उनकी परेशानी और बढ़ गई। जैसे ही कई किसानों ने अपना गुस्सा जाहिर किया, प्रशासन ने स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए नियमों में ढील देने की घोषणा की। इसके तहत खास तौर पर ‘चकबंदी’ से प्रभावित किसानों को गेहूं खरीद की पुरानी व्यवस्था का ही पालन करने की अनुमति दी गई।

गेहूं उत्पादक किसानों को दी गई इस ‘छूट’ का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि उन्हें अपनी फसल बेचने के लिए दर-दर भटकना न पड़े और उन्हें अपनी फसल का न्यूनतम समर्थन मूल्य पाने के मामले में पंजीकृत किसानों के बराबर ही दर्जा मिले।

राज्य सरकार द्वारा नियमों में ढील दिए जाने के बाद अब किसानों के पास यह सुविधा होगी कि वे अपनी पैदावार सरकारी खरीद केंद्रों तक ले जा सकें और ऐसा करते हुए वे पहले से तय प्रक्रिया का पालन कर सकें। इसके साथ ही अपनी कृषि उपज का सही दाम हासिल कर सकें।

 
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