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Friday, January 16, 2026
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‘मेक इन इंडिया’ को दस साल पुरे; क्या बदला?

'मेक इन इंडिया' प्रधानमंत्री का विजन था जिसके तहर उन्होंने ने तरह तरह की पॉलिसीज लांच की। ऐसे में मेक इन इंडिया से पिछले दस साल में भारतीय अर्थव्यवस्था में हुई क्रांति, मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में हुई क्रांति को समझाना आवश्यक होगा...

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आज मेक इन इंडिया को दस साल पुरे हो चुके है। ऐसे में देश भर से इस मेक इन इंडिया ने लोगों के जीवन में लाए बदलावों की स्तुति करना शुरू किया है। साथ ही मेक इन इंडिया अभियान के चलते लगातार भारतीय इकोनॉमी में होता इजाफा और क्षमता, में वृद्धी से लोगों ने इन पॉलिसी को सराहा है। भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में इससे क्रांति आई है। साथ ही पिछले एक दशक में ‘मेक इन इंडिया’ पहल एक राष्ट्रीय शक्ति बनी है।

‘मेक इन इंडिया’ प्रधानमंत्री का विजन था जिसके तहर उन्होंने ने तरह तरह की पॉलिसीज लांच की। ऐसे में मेक इन इंडिया से पिछले दस साल में भारतीय अर्थव्यवस्था में हुई क्रांति, मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में हुई क्रांति को समझाना आवश्यक होगा, तभी ‘मेक इन इंडिया’ का महत्त्व भी समझा जा सकता है।

  • भारत में ‘मेक इन इंडिया’ तहत मोबाईल फोन मैन्युफैक्चरिंग में सबसे ज्यादा बदलाव आया है। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मैन्युफैक्चरर बन चूका है। इससे भारत में बिकने वाले 99 प्रतिशत मोबाईल फ़ोन भारत में ही बनते है। यही साल 2014-15 के दरम्यान भारत ने 48,609 करोड़ रुपए के फ़ोन 15 देशों से मंगवाएं थे अब यह आयात घटकर महज 7,665 करोड़ रुपए की रह गई है।
  • मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज में 27 अधिक सेक्टर जुड़े। पीआईएल योजनाओं के तहत 1.97 लाख करोड़ का विदेशी निवेश आया, जिससे 8 लाख नौकरियां पैदा हुईं।
  • मेक इन इण्डिया के तहत स्टार्टअप इंडिया के माध्यम से रिसर्च डेवलपमेंट और इनोवेशन को बढ़ावा मिला। जिस कारण भारत में विश्व स्तर का तीसरा सबसे बड़ा तकनीक संचालित स्टार्टअप इकोसिस्टम शामिल हैं। इनमें 45 प्रतिशत स्टार्टअप टियर 2 और 3 शहरों में है, साथ ही 2014 से अब तक 1 करोड़ से अधिक पेटेंट दिए गए हैं।
  • उद्यम पोर्टल पर से 4.91 करोड़ से अधिक एमएसएमई रजिस्टर्ड हुए, जिनमें 1.85 करोड़ महिलाओं द्वारा प्रतिनिधीत एमएसएमई शामिल है। इन एमएसएमई के कारण 21.17 करोड़ नौकरियां पैदा हुई और 2022-23 में सकल घरेलू उत्पाद में एमएसएमई का योगदान 30.1 प्रतिशत का था।
  • भारत का डिफेंस मैनुफैक्चरिंग में आत्मनिर्भरता की तरफ बढ़ता जा रहा है। वर्ष 2023-24 में 1.27 लाख करोड़ तक पहुंचा।
  • कोरोना काल में भारत ने अपनी खुद की वैक्सीन बनायीं, उसका वितरण किया। कोरोना काल से भारत के फर्मास्युटिल इंडस्ट्री को नया मुकाम हासिल हुआ। साथ ही भारत में तैयार किए औषधियों को दुनिया भर में उच्च स्थान मिला। कोरोना काल के दौरान मेक इन इंडिया की वजह से भारत ने आपदा को अवसर में बदला।
  • ‘मेक इन इंडिया’ के तहत कौशल्यवान तरुणों को मैनुफैक्चरिंग सेक्टर में नए अवसर मिलें। 2022 से 2024 तक मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की नौकरियों में 200 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। हाल में 2021 में 29.83 मिलियन नौकरियां बढ़कर 2023 में 35.65 मिलियन हो गईं है।

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वहीं प्रधानमंत्री ने इस मौके पर कहा, “आज हम ‘मेक इन इंडिया’ के 10 साल पूरे होने का जश्न मना रहे हैं। मैं उन सभी लोगों को बधाई देता हूं जो पिछले एक दशक से इस अभियान को सफल बनाने के लिए अथक प्रयास कर रहे हैं। मेक इन इंडिया हमारे देश को मैन्युफैक्चरिंग और इनोवेशन का सेंटर बनाने के लिए 140 करोड़ भारतीयों के सामूहिक संकल्प को दर्शाता है। ये उल्लेखनीय है कि अनेकों सेक्टर में निर्यात कैसे बढ़ा है, क्षमताएं निर्मित हुई हैं और अर्थव्यवस्था मजबूत हुई है।…’ ‘…भारत सरकार हर संभव तरीके से ‘मेक इन इंडिया’ को प्रोत्साहित करने के लिए प्रतिबद्ध है। सुधारों में भारत की प्रगति भी जारी रहेगी। हम सब मिलकर एक आत्मनिर्भर और विकसित भारत का निर्माण करेंगे।”

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