28.9 C
Mumbai
Wednesday, October 21, 2026
होमदेश दुनियाभारतीय पर्यटकों के बहिष्कार से संकट में मालदीव की अर्थव्यवस्था?

भारतीय पर्यटकों के बहिष्कार से संकट में मालदीव की अर्थव्यवस्था?

पिछले साल तक मालदीव भारत के अच्छे दोस्तों में गिना जाता था| पिछले साल अक्टूबर में मोहम्मद मोइज़ो के राष्ट्रपति बनने के बाद दोनों देशों के रिश्ते थोड़े ख़राब होने लगे थे,लेकिन इस ताज़ा मामले से भारत के लोग भी नाराज़ हो गए हैं|

Google News Follow
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लक्षद्वीप यात्रा, वहां पर्यटन का आनंद और उसके बाद मालदीव के मंत्रियों की तिरस्कारपूर्ण प्रतिक्रिया, हालांकि सीधी प्रतीत होती है, मालदीव को आर्थिक संकट में डालने की अधिक संभावना है। क्योंकि लक्षद्वीप और भारतीय प्रधानमंत्री पर मालदीव के मंत्री के बयान के बाद भारत में सोशल मीडिया पर ट्रेंड होने लगा और वहीं, हजारों भारतीयों ने मालदी में अपनी बुकिंग रद्द कर दी है और एयरलाइंस को भी नुकसान हो रहा है। क्योंकि मालदीव की अर्थव्यवस्था पर्यटन पर निर्भर करती है और इसमें सबसे बड़ी हिस्सेदारी भारतीय पर्यटकों की होती है|पिछले साल तक मालदीव भारत के अच्छे दोस्तों में गिना जाता था| पिछले साल अक्टूबर में मोहम्मद मोइज़ो के राष्ट्रपति बनने के बाद दोनों देशों के रिश्ते थोड़े ख़राब होने लगे थे,लेकिन इस ताज़ा मामले से भारत के लोग भी नाराज़ हो गए हैं|
आख़िर मामला क्या है?: 2 जनवरी को भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लक्षद्वीप पहुंचे। इस बार उन्होंने सोशल मीडिया पर कुछ तस्वीरें और वीडियो शेयर किए हैं, जिसमें वह समुद्र किनारे टहलते नजर आ रहे हैं। इन तस्वीरों और वीडियो को शेयर करते हुए प्रधानमंत्री ने भारतीय पर्यटकों से लक्षद्वीप घूमने की अपील की| उनकी अपील के बाद मालदीव के मंत्रियों ने प्रधानमंत्री मोदी और लक्षद्वीप पर बयानबाजी शुरू कर दी| भारतीय लोगों द्वारा आपत्ति जताने और मालदीव के बहिष्कार की प्रवृत्ति शुरू करने के बाद, मालदीव सरकार ने तीन महत्वपूर्ण मंत्रियों को इस्तीफा दे दिया। लेकिन ठीक इसी वजह से अब मालदीव की समस्या खड़ी होने की आशंका है|
हर साल कितने भारतीय पर्यटक जाते हैं मालदीव?: इस पूरे मामले के दौरान सवाल यह उठता है कि भारत द्वारा मालदीव के बहिष्कार का द्वीप की अर्थव्यवस्था पर कितना असर पड़ेगा? इस देश में हर साल कितने लोग आते हैं? मालदीव के पर्यटन मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, दिसंबर 2023 तक करीब 2 लाख 09 हजार 198 भारतीय पर्यटक द्वीप पहुंचे थे|  इससे पहले 2022 में 2.41 लाख भारतीयों ने मालदीव का दौरा किया था। कोरोना महामारी के बावजूद 2021 में 2.91 लाख और 2020 में 63,000 भारतीयों ने मालदीव का दौरा किया।
अन्य देशों के पर्यटकों की तुलना में भारत कहां है?: मालदीव के पर्यटन मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, दिसंबर 2023 तक द्वीप पर कुल 17 लाख 57 हजार 939 पर्यटक आए थे। अधिकांश पर्यटक भारतीय थे। भारतीयों के बाद सबसे अधिक लोग रूस और चीन से आये।
भारत के बहिष्कार का क्या असर होगा?: 2021 में इस द्वीप को पर्यटन राजस्व में लगभग 3.49 बिलियन अमेरिकी डॉलर प्राप्त हुए। इससे आप अंदाजा लगा सकते हैं कि पर्यटन उद्योग इस देश के लिए कितना महत्वपूर्ण है। मालदीव की जीडीपी में पर्यटन का हिस्सा 56 प्रतिशत है। ऐसे में भारत और मालदीव के बीच चल रहे इस विवाद के बाद दोनों देशों के बीच रिश्ते खराब हो गए हैं और अगर भारतीय पर्यटक मालदीव का बहिष्कार करते हैं तो इस द्वीप को करीब 2 लाख पर्यटकों का नुकसान होगा|
पर्यटन के अलावा मालदीव भी भारत पर निर्भर: 2021 के आंकड़ों के मुताबिक, भारत इस साल मालदीव का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार बनकर उभरा है। यह द्वीप मुख्यतः भारत से अयस्क आयात करता है। इतना ही नहीं, भारत मालदीव को विभिन्न प्रकार के इंजीनियरिंग और औद्योगिक उत्पादों का निर्यात करता है। इनमें फार्मास्यूटिकल्स, रडार उपकरण, रॉक बोल्डर, सीमेंट शामिल हैं। इसमें चावल, मसाले, फल, सब्जियां और पोल्ट्री उत्पाद जैसे कृषि उत्पाद भी शामिल हैं।
भारत-मालदीव संबंधों में तनाव: भारत अब तक हमेशा मालदीव की मदद करता रहा है। 1988 में राजीव गांधी ने मौमून अब्दुल गयूम की सरकार को बचाने के लिए सेना भेजी| इतना ही नहीं, 2018 में जब इस द्वीप पर जल संकट गंभीर हो गया था तो भारत ने मालदीव को पानी की आपूर्ति की थी|यही कारण है कि मोहम्मद नशीद ने जरूरत पड़ने पर भारत से मदद की अपील भी की|  मालदीव में आपातकाल के बाद भारत ने अपनी विदेश नीति के कारण वहां अपनी सेना नहीं भेजी, लेकिन यामीन की आलोचना की और आपातकाल ख़त्म करने की मांग की|
लेकिन पिछले साल अक्टूबर महीने में इस देश में मुइज़ो की सरकार सत्ता में आई| सत्ता में आते ही चीन के समर्थक माने जाने वाले मुइज़ो ने सबसे पहले अपने देश से भारतीय सैनिकों को हटाने का ऐलान किया| अब यहीं से इन देशों के बीच रिश्ते खराब होने शुरू हो गए| भारत के लिए चिंता की बात यह है कि मोहम्मद मुइज्जू चीन समर्थक नेता हैं|मालदीव ने चीन को एक द्वीप भी पट्टे पर दिया है। भारत को लगता है कि यहां चीन की मौजूदगी हमारे लिए खतरा है| वहीं, इस जगह पर भारतीय सेना की मौजूदगी न होने से सुरक्षा की दृष्टि से यह भारत के लिए दोहरी चिंता का विषय है।
यह भी पढ़ें-

 

लोकसभा चुनाव-2024: मवि​आ​ में सीट बंटवारे पर प्रकाश अंबेडकर का सांकेतिक बयान​ !

National Stock Exchange

कोई जवाब दें

कृपया अपनी टिप्पणी दर्ज करें!
कृपया अपना नाम यहाँ दर्ज करें

Star Housing Finance Limited
[td_block_social_counter open_in_new_window="y" style="style6 td-social-boxed" block_template_id="td_block_template_9" border_color="#fbd54a" f_header_font_size="26" f_header_font_weight="700" tdc_css="eyJhbGwiOnsibWFyZ2luLXRvcCI6IjAiLCJtYXJnaW4tYm90dG9tIjoiMzAiLCJwYWRkaW5nLXRvcCI6IjAiLCJkaXNwbGF5IjoiIn19" custom_title="हमें फॉलो करें" facebook="NewsDankaHindi" twitter="NewsDanka" youtube="channel/UCqtL0xCsgAmB3XXrh9nln2Q" manual_count_twitter="526" f_header_font_family="668"]

अन्य लेटेस्ट खबरें