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Saturday, February 24, 2024
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“मोदी विष्णु का तेरहवां अवतार! जो लोग बाबरी गुंबद ढहने पर भाग गए…”,​-​ संजय रा​ऊत ! ​

इतना ही नहीं, इसके लिए उन्होंने एक बार फिर उस दिन का जिक्र करते हुए ​भाजपा की आलोचना की है, जिस दिन बाबरी मस्जिद गिरी थी​| संजय रा​ऊत ने उस पोस्टर की भी आलोचना की है जो ​भाजपा ने तैयार किया है​| 

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आज संजय रा​ऊत ने एक बार फिर ​भाजपा की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि ​भाजपा हमें हिंदुत्व न सिखाए​| इतना ही नहीं, इसके लिए उन्होंने एक बार फिर उस दिन का जिक्र करते हुए ​भाजपा की आलोचना की है, जिस दिन बाबरी मस्जिद गिरी थी​| संजय रा​ऊत ने उस पोस्टर की भी आलोचना की है जो ​भाजपा ने तैयार किया है​| 

मोदी प्रभु राम के वीआईपी भक्त: भगवान राम के एकमात्र वीआईपी भक्त नरेंद्र मोदी हैं। ​भाजपा ने एक पोस्टर छपवा कर कहा है कि वह राम मंदिर के लिए भगवान राम की उंगली लेकर जा रहे हैं​| ऐसा लग रहा है मानो नरेंद्र मोदी विष्णु के अवतार हों​| ये ​भाजपा की बेशर्मी है​| इस पोस्टर से करोड़ों राम भक्तों की भावनाएं आहत होंगी​| चूँकि हम सभी सामान्य भक्त हैं, हम अयोध्या के युद्ध में उतरे थे। जब अयोध्या की लड़ाई चल रही थी तो ये वीआईपी भक्त यह कहकर भाग गए कि हमारा ​इससे कोई लेना-देना नहीं है​| ऐसी आलोचना संजय रा​ऊत ने की है​| 
बाबरी गिरने के बाद उठाए हथियार…: आगे संजय रा​ऊत ने कहा कि हमने बाबरी नहीं ढहाई​| उस समय बाला साहेब ठाकरे ने दहाड़ते हुए कहा था कि अगर बाबरी विध्वंस करने वाले शिवसैनिक थे तो मुझे उन पर गर्व है​| बाबरी विध्वंस का आरोप लगाने वाली ​भाजपा से शिवसेना डरी और सहमी हुई है​| बाला साहेब ठाकरे ने वह जिम्मेदारी ली​| तभी पता चला कि हिंदुत्व में वीआईपी कौन है और पाखंडी कौन है? अब उनका गला टूट गया है​| किसी को भी उद्धव ठाकरे को आमंत्रित करने की जरूरत नहीं है​|‘ हम आपसे पहले ही अयोध्या में हैं​| मातोश्री पर अशोक सिंघल की सभाएं हुईं​| 
जो लोग बाबरी गुंबद ढहने पर भाग गए थे…: उन्हें आज जो करना है करने दीजिए.. विष्णु के तेरहवें अवतार के रूप में ​भाजपा ने भगवान राम को पकड़कर मंदिर ले जाने की घोषणा की है, क्या यह आपका हिंदुत्व है? 2024 के बाद सबको समझ आ जाएगा कि हिंदुत्व किसका है​| ये सभी कायर जो बाबरी गुम्बद के ढहने के बाद भाग गए थे, हमें हिंदुत्व की शिक्षा न दें। यह कहते-कहते उनके पसीने छूट गये कि यह हमारा काम नहीं है​| 
तो वो छाया, आपका सारा साहस कहां चला गया?: ऐसा सवाल संजय रा​ऊत ने भी पूछा है​| उस लड़ाई की जिम्मेदारी बाला साहेब ठाकरे ने ली थी​| उस वक्त उनकी कलाई और छाती टूट गई थी​| अब हमें सत्ता का रौब मत दिखाओ|हम बिना किसी स्वार्थ के इस लड़ाई में उतरे। जो लोग हिंदुत्व की जमीन छोड़कर भाग गए, वे हमें हिंदुत्व न सिखाएं।’ ये चेतावनी संजय रा​ऊत ने दी है​| 
 
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