आईएएनएस से बातचीत करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने कहा, “वे गठबंधन नहीं करेंगे, इसलिए उन्हें किसी गलतफहमी में नहीं रहना चाहिए। अखिलेश यादव और राहुल गांधी खुद को मुस्लिम समुदाय का नेता मानते हैं। ओवैसी चाहते हैं कि कोई मुस्लिम मुख्यमंत्री बने। अखिलेश यादव और राहुल गांधी को यह पसंद नहीं है, तो ये लोग गठबंधन कैसे करेंगे?”
उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री जयवीर सिंह ने कहा, “ओवैसी क्या कहते हैं, यह उनकी अपनी बात है। हम एक मजबूत पार्टी हैं और अपनी ताकत के दम पर चुनाव लड़ेंगे। चाहे सब मिलकर लड़ें या अलग-अलग, इससे हमें कोई फर्क नहीं पड़ता। 50 प्रतिशत से ज्यादा वोट और समर्थन हमारे पक्ष में होगा और हम स्पष्ट बहुमत के साथ सरकार बनाएंगे। वे अलग-अलग लड़ें या साथ मिलकर, इससे हम पर कोई असर नहीं पड़ेगा।”
उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री अनिल राजभर ने कहा, “ये सब उनकी लुकाछिपी का खेल है। भाजपा को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। इन लोगों की ओर से चाहे जितना भी तिकड़म कर लिया जाए, जनता ने फैसला कर लिया है कि यूपी में 2017 की पुनरावृत्ति 2027 में होना तय है।”
भाजपा नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा, “जब भी चुनाव होता है, ओवैसी गठबंधन के लिए गुहार लगाते हैं। लेकिन गठबंधन के लिए उनकी गुहार न तो कोई सुनता है और न ही कोई उसका जवाब देता है। तो अब देखिए, उनके अपने साथी हैं, उनकी अपनी टीम है, चाहे वे गठबंधन बनाएं या अपना बोरिया-बिस्तर समेटकर भाग जाएं।”
भाजपा नेता राम कदम ने कहा, “उत्तर प्रदेश में चुनाव अब नजदीक आ गए हैं। ओवैसी कह रहे हैं कि अकेले भाजपा को रोकना मुमकिन नहीं है और सभी को साथ आना होगा। अब एक तरफ ओवैसी का यह बयान है, तो दूसरी तरफ अखिलेश यादव की तीखी बातें हैं, कभी ‘चवन्नी’ कहना, तो कभी कुछ और।
शिवसेना नेता साइना एनसी ने कहा, “ओवैसी को जितना भी जोर लगाना है वे लगाएं, जीतेंगे तो सिर्फ योगी आदित्यनाथ और एनडीए। ओवैसी की तुष्टीकरण की राजनीति को मतदाता स्वीकार नहीं करेंगे।”




