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उत्तर प्रदेश SIR प्रक्रिया में दो करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम हटे

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उत्तर प्रदेश में 166 दिनों तक चले विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के समापन के साथ ही अंतिम मतदाता सूची जारी कर दी गई है। इस प्रक्रिया के तहत राज्य की मतदाता सूची से कुल 2,04,45,300 नाम हटाए गए हैं, जो पुनरीक्षण से पहले कुल मतदाताओं का 13.21 प्रतिशत है।

राज्य में SIR प्रक्रिया शुरू होने से पहले कुल मतदाताओं की संख्या लगभग 15.44 करोड़ थी। हालांकि, 6 जनवरी 2026 को जारी प्रारूप सूची में पहले चरण के बाद लगभग 2.88 करोड़ नाम हटाए गए थे, जबकि 84 लाख से अधिक नए मतदाता जोड़े गए थे। अंतिम सूची के अनुसार अब उत्तर प्रदेश में कुल 13,39,84,792 मतदाता हैं।

राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिनवा ने लखनऊ में प्रेस वार्ता के दौरान बताया,“SIR एक्सरसाइज 27 अक्टूबर, 2025 से 10 अप्रैल, 2026 तक चली, जिसमें पूरे राज्य के सभी 75 जिले, 403 विधानसभा क्षेत्र और पोलिंग स्टेशन शामिल थे। 166 दिन की इस पहल के लिए अधिकारियों के बीच बड़े पैमाने पर सहयोग की ज़रूरत थी, जिसमें 75 डिस्ट्रिक्ट इलेक्शन ऑफिसर (DEOs), 403 इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (EROs), 12,758 असिस्टेंट EROs, 18,026 BLO सुपरवाइज़र और 1,77,516 बूथ लेवल ऑफिसर (BLOs) शामिल थे।”

उन्होंने बताया कि अंतिम मतदाता सूची में 7,30,71,071 पुरुष (लगभग 54%), 6,09,09,525 महिला (45.46%) और 4,206 तृतीय लिंग मतदाता शामिल हैं। उन्होंने कहा, “18-19 साल के वोटरों की संख्या में काफ़ी बढ़ोतरी हुई है, जो बढ़कर 17,63,360 हो गई है, जो वोटरों का 1.32% है। लिंग अनुपात में भी सुधार हुआ है और अब हर 1,000 पुरुष वोटरों पर 834 महिला वोटर हैं, जो ड्राफ्ट रोल में 824 से ज़्यादा है। ड्राफ्ट रोल की तुलना में वोटरों की कुल संख्या में 84,28,767 की बढ़ोतरी हुई है।”

जिलावार आंकड़ों में प्रयागराज में सर्वाधिक 3,29,421 नए मतदाता जुड़े, इसके बाद लखनऊ (2,85,961), बरेली (2,57,920), गाजियाबाद (2,43,666) और जौनपुर (2,37,590) का स्थान रहा। वहीं, लखनऊ (22.89%), गाजियाबाद (20.84%), कानपुर नगर (19.42%) और गौतम बुद्ध नगर (19.33%) जैसे जिलों में सबसे अधिक प्रतिशत में नाम हटाए गए।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने कहा कि इस व्यापक प्रक्रिया की सफलता चुनाव अधिकारियों, राजनीतिक दलों और मतदाताओं के समन्वित प्रयासों का परिणाम है।

हालांकि, इस पूरी प्रक्रिया को लेकर विपक्ष ने गंभीर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस ने SIR को लेकर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे मतदाता सूची में हेरफेर का प्रयास बताया है। उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने आरोप लगाया, “इस काम का मुख्य मकसद उन वोटरों को हटाना था जो सत्ताधारी सरकार के खिलाफ़ ताकतों का समर्थन करते हैं। यूपी में कई BLO की मौत सीनियर अधिकारियों के दबाव की वजह से हुई। मुझे बताया गया कि उन्हें कांग्रेस समर्थकों के नाम काटने के लिए कहा गया था। हम इन मौतों पर जवाबदेही की मांग करते हैं। यह काम वोट चुराने का एक संस्थागत तरीका था।”

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