प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार (5 जून)को कहा कि कोविड-19 महामारी, विभिन्न युद्धों और वैश्विक ऊर्जा संकट ने पूरी दुनिया की आर्थिक और राजनीतिक व्यवस्था को प्रभावित किया है, लेकिन इन चुनौतियों के बावजूद भारत मजबूती के साथ आगे बढ़ रहा है और हरित विकास (ग्रीन ग्रोथ) को अपनी विकास यात्रा का प्रमुख आधार बना रहा है। उन्होंने कहा कि दुनिया अब तेजी से हरित भविष्य की ओर बढ़ रही है और भारत इस परिवर्तन में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए प्रतिबद्ध है।
गुजरात के सूरत में लगभग ₹18,800 करोड़ की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करने के बाद आयोजित एक जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वर्तमान दशक दुनिया के लिए सबसे चुनौतीपूर्ण अवधियों में से एक साबित हुआ है।
उन्होंने कहा, “दुनिया अभूतपूर्व चुनौतियों के दौर से गुजर रही है।” प्रधानमंत्री ने अपने पहले के उस बयान का उल्लेख करते हुए कहा कि यह समय कई देशों के लिए “आपदाओं का दशक” बन गया है। उन्होंने बताया कि कोविड महामारी, जारी भू-राजनीतिक संघर्ष और उससे पैदा हुआ ऊर्जा संकट वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गहरा प्रभाव डाल रहे हैं। ईंधन की कीमतों में अस्थिरता और गैस आपूर्ति श्रृंखलाओं में व्यवधान ने कई क्षेत्रों में आर्थिक अनिश्चितता पैदा कर दी है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि इन परिस्थितियों के बावजूद भारत ने अपने नागरिकों के सामूहिक प्रयासों और दृढ़ संकल्प के बल पर विकास की गति बनाए रखी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि देश ने संकटों के बीच भी स्थिरता और मजबूती का परिचय दिया है।
ग्रीन ग्रोथ और स्वच्छ ऊर्जा पर सरकार की प्राथमिकताओं का उल्लेख करते हुए मोदी ने कहा कि भविष्य सतत विकास और स्वच्छ ऊर्जा का है। उन्होंने कहा कि भारत ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने, पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने और टिकाऊ अर्थव्यवस्था के निर्माण के लिए कई महत्वपूर्ण नीतियों पर काम कर रहा है।
प्रधानमंत्री के अनुसार, स्वच्छ ऊर्जा और पर्यावरणीय स्थिरता के क्षेत्र में किए जा रहे निवेश न केवल भविष्य की चुनौतियों से निपटने में मदद करेंगे, बल्कि नवाचार, रोजगार और आर्थिक विकास के नए अवसर भी पैदा करेंगे। उन्होंने कहा कि हरित विकास भारत की दीर्घकालिक आर्थिक रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने “आत्मनिर्भर भारत” अभियान का भी जोरदार बचाव किया। उन्होंने कहा कि आज की अनिश्चित वैश्विक परिस्थितियों में आत्मनिर्भरता किसी भी देश की मजबूती का आधार है। उन्होंने आलोचकों पर निशाना साधते हुए कहा कि कुछ लोग अब भी इस अभियान का मजाक उड़ाते हैं, जबकि वास्तविकता यह है कि आत्मनिर्भरता ही किसी राष्ट्र को दीर्घकालिक आर्थिक शक्ति प्रदान करती है।
मोदी ने कहा कि जो देश दूसरों पर अत्यधिक निर्भर रहते हैं, वे अपनी विकास क्षमता का पूर्ण उपयोग नहीं कर पाते। उनके अनुसार आत्मनिर्भर भारत अभियान देश को आर्थिक रूप से अधिक सक्षम और मजबूत बना रहा है।
प्रधानमंत्री ने इस दौरान कांग्रेस पार्टी पर भी तीखा राजनीतिक हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस राजनीतिक लाभ के लिए अस्थिरता पैदा करने का प्रयास करती रही है। उन्होंने दावा किया कि विभिन्न राज्यों में मतदाताओं ने कांग्रेस के शासन मॉडल को नकारा है और हालिया चुनावी परिणामों में भी यह प्रवृत्ति दिखाई दी है।
उन्होंने हिमाचल प्रदेश और हरियाणा के स्थानीय निकाय चुनावों का उल्लेख करते हुए कहा कि जनता ने कांग्रेस के प्रति असंतोष व्यक्त किया है। वहीं कर्नाटक की राजनीतिक स्थिति पर टिप्पणी करते हुए प्रधानमंत्री ने आरोप लगाया कि राज्य में कांग्रेस सरकार को लेकर लोगों के बीच व्यापक नाराजगी है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि आज का भारत आशा, आकांक्षा और राष्ट्रीय लक्ष्यों को प्राप्त करने के दृढ़ संकल्प से प्रेरित है। उन्होंने कहा कि देश की प्रगति उसके नागरिकों की सामूहिक शक्ति और विश्वास पर आधारित है। “आत्मविश्वासी और महत्वाकांक्षी भारत किसी भी चुनौती को पार करने में सक्षम है,” उन्होंने कहा।
विकास को सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए मोदी ने कहा कि बुनियादी ढांचे का विस्तार और आर्थिक वृद्धि भाजपा-नीत सरकार के प्रमुख लक्ष्य बने हुए हैं। उन्होंने यह भी बताया कि स्थानीय निकाय चुनावों के बाद सूरत का यह उनका पहला दौरा है और उन्होंने गुजरात की जनता को पिछले ढाई दशकों से भाजपा पर भरोसा बनाए रखने के लिए धन्यवाद दिया।
अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री ने हाल ही में पांच देशों की यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि विदेशों में भारत की राजनीतिक और आर्थिक प्रगति को लेकर व्यापक रुचि दिखाई दे रही है। उन्होंने पश्चिम बंगाल, असम और पुडुचेरी में भाजपा-नीत एनडीए की हालिया चुनावी सफलताओं का जिक्र करते हुए इसे सरकार की विकास-केंद्रित नीतियों पर जनता के विश्वास का प्रमाण बताया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि तेजी से बदलते वैश्विक परिदृश्य के बीच भारत का ध्यान सतत विकास, आत्मनिर्भरता और दीर्घकालिक समृद्धि पर केंद्रित है, और देश भविष्य की वैश्विक अर्थव्यवस्था को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए तैयार है।
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