कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को आसाम के मुख्यमंत्री की पत्नी पर मानहानि पूरक मनगढंत आरोप लगाने के मामले में अग्रिम जमानत माँग ख़ारिज की गई । गुवाहाटी हाईकोर्ट ने शुक्रवार (24 अप्रैल )को उनकी याचिका खारिज कर दी। यह मामला मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुयान सरमा द्वारा दर्ज कराई गई FIR से जुड़ा है। इसमें पवन खेड़ा पर आरोप है कि उन्होंने उनके खिलाफ कई पासपोर्ट रखने और विदेशी संपत्तियों से जुड़े झूठे आरोप लगाए थे।
हाईकोर्ट के इस फैसले से पहले सर्वोच्च न्यायलय भी इस मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर चुका है। ऐसे में अब पवन खेड़ा के आत्मसमर्पण कर नियमित जमानत के लिए आवेदन करने की संभावना जताई जा रही है। इससे पहले 10 अप्रैल को तेलंगाना उच्च न्यायलय ने उन्हें एक सप्ताह की अग्रिम जमानत दी थी। हालांकि, आसाम पुलिस ने इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, जिसके बाद शीर्ष अदालत ने इस राहत पर रोक लगा दी।
17 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने न केवल इस रोक को हटाने से इनकार किया, बल्कि पवन खेड़ा की अंतरिम राहत बढ़ाने की मांग भी खारिज कर दी, जिससे उन्हें गुवाहाटी हाईकोर्ट जाने का अवसर मिल सके।
विवाद की शुरुआत तब हुई जब असम विधानसभा चुनाव से पहले पवन खेड़ा ने आरोप लगाया कि रिनिकी भुयान सरमा के पास यूएई, मिस्र और एंटीगुआ-बारबुडा जैसे देशों के कई पासपोर्ट हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि 2021-22 के बीच उन्होंने विदेशी नागरिकता हासिल की और मुख्यमंत्री ने अपने चुनावी हलफनामे में उनकी विदेशी संपत्तियों का खुलासा नहीं किया। वहीं जांच में सामने आया की यह आरोप तथ्यविरहीत, तथा भ्रामक थे।
इन आरोपों को हिमंता बिस्वा सरमा और उनकी पत्नी ने “मनगढ़ंत” और “AI-जनित झूठ” बताते हुए खारिज कर दिया। उन्होंने यह भी कहा कि ये दावे एक पाकिस्तानी नागरिक के पासपोर्ट की नक़ल कर बनाए गए है और मतदाताओं को गुमराह करने के उद्देश्य से फैलाए गए।
इसके बाद रिनिकी भुयान सरमा ने पवन खेड़ा के खिलाफ आपराधिक और सिविल मानहानि के मामले दर्ज कराए। मामले को लेकर राजनीतिक हलकों में बहस तेज है, जबकि कानूनी प्रक्रिया जारी है और आगे की कार्रवाई अदालत में तय होगी।
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