सहारनपुर में धरना पड़ा भारी: सपा सांसद इकरा हसन पर गंभीर धाराओं में FIR दर्ज

डीआईजी दफ्तर के बाहर सड़क जाम और सरकारी कार्य में बाधा डालने का आरोप, 7 नामजद समेत 25 अज्ञात लोगों पर भी केस

सहारनपुर में धरना पड़ा भारी: सपा सांसद इकरा हसन पर गंभीर धाराओं में FIR दर्ज

Saharanpur protest proves costly: FIR registered against SP MP Iqra Hasan under serious sections

समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन के खिलाफ उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में गंभीर धाराओं में FIR दर्ज की गई है। पुलिस ने यह कार्रवाई दो दिन पहले डीआईजी कार्यालय के बाहर समर्थकों के साथ धरना देने और सड़क जाम करने के मामले में की है। इस केस में इकरा हसन के अलावा सात नामजद और 25 अज्ञात लोगों को भी आरोपी बनाया गया है।

जानकारी के अनुसार, सहारनपुर के थाना सदर बाजार में सिविल लाइन चौकी प्रभारी की ओर से तहरीर दी गई, जिसके आधार पर मामला दर्ज किया गया। पुलिस ने आरोप लगाया है कि धरने और प्रदर्शन के दौरान सड़क बाधित हुई तथा सरकारी कार्य में व्यवधान उत्पन्न किया गया।

FIR में इकरा हसन के साथ पूर्व मंत्री मांगेराम कश्यप, शीशपाल, सत्यपाल, अनुज, तेजपाल सिंह और अजय के नाम भी शामिल हैं। पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में समर्थक मौके पर मौजूद थे, जिससे कानून व्यवस्था प्रभावित हुई।

दरअसल, दो दिन पहले सहारनपुर में हुए एक विवाद के बाद इकरा हसन अपने समर्थकों के साथ DIG दफ्तर पहुंची थीं। वहां उन्होंने धरना शुरू कर दिया था और आरोप लगाया था कि पुलिस पीड़ित पक्ष की शिकायतों पर कार्रवाई नहीं कर रही है। इस दौरान पुलिस अधिकारियों और सांसद के बीच तीखी बहस भी देखने को मिली थी।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, प्रदर्शन के चलते कुछ समय के लिए इलाके में यातायात भी प्रभावित हुआ। पुलिस प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों को हटाने की कोशिश की थी, लेकिन स्थिति तनावपूर्ण बनी रही। बाद में मामले को शांत कराया गया।

हालांकि, समाजवादी पार्टी की ओर से अभी तक इस FIR पर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि इकरा हसन पीड़ितों की आवाज उठाने के लिए मौके पर पहुंची थीं और लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज कराया जा रहा था।

वहीं पुलिस प्रशासन का कहना है कि कानून व्यवस्था बनाए रखना उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी है और किसी को भी सड़क जाम करने या सरकारी कामकाज में बाधा डालने की अनुमति नहीं दी जा सकती। पुलिस अब पूरे मामले की जांच कर रही है और घटनास्थल के वीडियो व अन्य साक्ष्यों को भी खंगाला जा रहा है।

यह मामला अब राजनीतिक रंग भी पकड़ता दिख रहा है, क्योंकि विपक्ष इसे जनता की आवाज दबाने की कार्रवाई बता रहा है, जबकि प्रशासन इसे कानून व्यवस्था से जुड़ा मामला बता रहा है।

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