सरकार ने घटना की गहन जांच के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है, जिसमें केंद्रीय गृह सचिव, नागरिक उड्डयन मंत्रालय के प्रतिनिधि, भारतीय वायुसेना और विमानन विशेषज्ञ शामिल हैं।
जांच के तहत फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर, कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डिंग, मेंटेनेंस लॉग, एटीसी लॉग और चश्मदीद गवाहों की गवाही को मुख्य बिंदु बनाया गया है। रिपोर्ट तीन महीनों में प्रस्तुत की जाएगी। शिवसेना नेता शाइना एन.सी. ने विपक्ष पर सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसे संवेदनशील समय में राजनीति नहीं होनी चाहिए और जांच प्रक्रिया को पूरा होने देना चाहिए।
फोरेंसिक जांच और डीएनए मिलान कार्य
गुजरात के गृह मंत्री हर्ष संघवी ने बताया कि फोरेंसिक साइंस प्रयोगशाला में राज्य की विशेषज्ञ टीम ने डीएनए पहचान प्रक्रिया को शीघ्रता से पूरा करने हेतु बैठक की। राष्ट्रीय फोरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय का भी दौरा प्रस्तावित है।
मृतकों की पारिवारिक प्रतिक्रियाएं
दुर्घटना में मारे गए ब्रिटिश नागरिक रमेश पटेल की बेटी प्रीति पंड्या ने बताया कि उनका पिता सिर्फ नौ दिनों के लिए भारत आया था, फल खाने की इच्छा लेकर। पुत्रवधू काजल पटेल ने बताया कि उन्होंने हादसे से पहले उन्हें फोन कर स्थिति सामान्य बताई थी। महादेव और आशा पवार की मृत्यु पर उनके बेटे रमेश पवार ने बताया कि माता-पिता से उन्होंने आखिरी बार वीडियो कॉल की थी और इसके तुरंत बाद हादसे की खबर मिली।
प्रशासनिक राहत और बचाव प्रयास
एनएसजी, एनडीआरएफ, वायुसेना, एफएसएल, डीजीसीए, एएआईबी और सीआईएसएफ की टीमों ने डॉक्टरों के छात्रावास की छत पर गिरे मलबे की जांच शुरू कर दी है। क्लाइव कुंदर, इस उड़ान के सह-पायलट, को उनके शिक्षक ने एक अनुशासित और प्रतिभाशाली छात्र के रूप में याद किया।
पुरानी यादें और प्रत्यक्षदर्शियों की गवाही
परभणी निवासी वसंत चव्हाण, जो 1993 के इंडियन एयरलाइंस हादसे में जीवित बचे थे, ने अपनी घटना साझा करते हुए कहा कि उनकी सीटिंग पोजीशन ने उन्हें जीवनदान दिया। प्रत्यक्षदर्शी मोहन बहादुर क्षत्रिय ने बताया कि घटना के समय उन्होंने धमाका सुना और छात्रावास में घायलों को बचाने में सेना के साथ मिलकर मदद की।
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