कर्नाटक की राजनीति में 2023 विधानसभा चुनावों के बाद सबसे बड़ा राजनीतिक बदलाव देखने को मिल सकता है। कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री सिद्धारमैया गुरुवार को अपने पद से इस्तीफा दे सकते हैं। दिल्ली में कांग्रेस हाईकमान के साथ हुई लंबी बैठकों के बाद राज्य में नेतृत्व परिवर्तन की चर्चाएं तेज हो गई हैं।
सूत्रों के अनुसार सिद्धारमैया गुरुवार (28 मई)को बेंगलुरु में प्रेस कॉन्फ्रेंस भी कर सकते हैं। इससे पहले वह अपने सरकारी आवास पर पूरी कैबिनेट के साथ नाश्ते की बैठक करेंगे। इस बैठक को बेहद अहम माना जा रहा है क्योंकि कांग्रेस नेतृत्व राज्य में संभावित सत्ता परिवर्तन को लेकर अंदरूनी असंतोष को नियंत्रित करने की कोशिश में जुटा है।
दिल्ली में लगभग सात घंटे तक चली बैठकों में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार, केसी वेणुगोपाल और कर्नाटक प्रभारी रणदीप सुरजेवाला शामिल रहे। हालांकि सार्वजनिक रूप से कांग्रेस नेताओं ने नेतृत्व परिवर्तन की बात से इनकार किया और कहा कि बैठक केवल राज्यसभा और विधान परिषद चुनावों को लेकर थी।
बैठक के बाद केसी वेणुगोपाल ने कहा,“आज की चर्चा सिर्फ़ राज्यसभा चुनाव और विधानपरिषद चुनाव के आस-पास थी। आपने जो भी अंदाज़ा लगाया, वह सच नहीं है। हमारी मीटिंग हुई थी। CM, DCM और रणदीप मौजूद थे। आज पूरी चर्चा राज्यसभा और विधानपरिषद सीटों पर ही केंद्रित थी। अंदाज़ा लगाना बंद करें।”
लेकिन सूत्रों का दावा है कि बंद कमरे में सिद्धारमैया को मुख्यमंत्री पद छोड़कर दिल्ली की राजनीति में बड़ी भूमिका निभाने का प्रस्ताव दिया गया। कांग्रेस नेतृत्व ने उन्हें पार्टी का प्रमुख ओबीसी चेहरा बताते हुए 2029 लोकसभा चुनावों से पहले राष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय भूमिका निभाने की बात कही।
एक सूत्र के अनुसार,“उन्हें बताया गया कि वह एक बड़ा OBC चेहरा हैं और पार्टी चाहती है कि वह 2029 के लोकसभा चुनावों से पहले राष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ी भूमिका निभाएं।” सूत्रों का यह भी कहना है कि कांग्रेस नेतृत्व ने सिद्धारमैया को भरोसा दिलाया कि यदि वह राज्यसभा के रास्ते दिल्ली जाते हैं तो बाकी सभी चीज़ों और उनके मामलों का ध्यान रखा जाएगा।
कांग्रेस फिलहाल सिद्धारमैया को सम्मानजनक तरीके से दिल्ली भेजने की रणनीति पर काम कर रही है ताकि यह संदेश न जाए कि उन्हें कर्नाटक की राजनीति से हटाया गया है। पार्टी मानती है कि राज्यसभा के जरिए दिल्ली भेजना उनके राजनीतिक कद और प्रभाव को बनाए रखने का बेहतर रास्ता हो सकता है।
राज्यसभा चुनावों के लिए नामांकन की अंतिम तारीख 8 जून है, इसलिए कांग्रेस नेतृत्व के पास निर्णय लेने के लिए बहुत कम समय बचा है। कर्नाटक से खाली हो रही चार राज्यसभा सीटों में कांग्रेस के तीन सीट जीतने की संभावना है जबकि एक सीट भाजपा के खाते में जा सकती है।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच डीके शिवकुमार एक बार फिर कर्नाटक की सत्ता राजनीति के केंद्र में आ गए हैं। 2023 में कांग्रेस सरकार बनने के समय से ही यह चर्चा रही है कि सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच सत्ता साझा करने का फार्मूला तय हुआ था, जिसके तहत पहले सिद्धारमैया मुख्यमंत्री बने और बाद में शिवकुमार को मौका मिलना था। हालांकि कांग्रेस ने कभी सार्वजनिक रूप से ऐसे किसी समझौते की पुष्टि नहीं की।
अब अगर सिद्धारमैया इस्तीफा देते हैं तो डीके शिवकुमार का मुख्यमंत्री बनना लगभग तय माना जा रहा है। हालांकि कांग्रेस नेतृत्व यह भी सुनिश्चित करना चाहता है कि सत्ता परिवर्तन को किसी एक गुट की जीत और दूसरे की हार के रूप में पेश न किया जाए, क्योंकि इससे प्रदेश कांग्रेस में गुटबाजी और बढ़ सकती है।
कांग्रेस की यह पूरी रणनीति केवल कर्नाटक तक सीमित नहीं मानी जा रही। राहुल गांधी लगातार जातिगत जनगणना, ओबीसी राजनीति को राष्ट्रीय मुद्दा बना रहे हैं। ऐसे में सिद्धारमैया को राष्ट्रीय ओबीसी चेहरे के रूप में आगे बढ़ाना कांग्रेस की 2029 लोकसभा चुनाव की बड़ी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। अब सभी की नजर गुरुवार को सिद्धारमैया की संभावित प्रेस कॉन्फ्रेंस पर टिकी है, जहां कर्नाटक की राजनीति में बड़े बदलाव का औपचारिक ऐलान हो सकता है।
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