चंद्रयान-5 की तैयारियां तेज, इसरो–जाक्सा ने जापान में किया लॉन्च साइट का निरीक्षण

चंद्रयान-5 की तैयारियां तेज, इसरो–जाक्सा ने जापान में किया लॉन्च साइट का निरीक्षण

Chandrayaan-5 preparations in full swing, ISRO-JAXA inspects launch site in Japan

भारत और जापान के बीच अंतरिक्ष सहयोग को नया आयाम देते हुए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) और जापान एयरोस्पेस एक्सप्लोरेशन एजेंसी (JAXA) ने चंद्रयान-5 मिशन की तैयारियों को आगे बढ़ाया है। इस दिशा में ISRO की एक टीम ने जापान के तानेगाशिमा स्पेस सेंटर का दौरा कर लॉन्च से जुड़ी व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया।

 

यह दौरा जापान में लूनर पोलर एक्सप्लोरेशन मिशन (LUPEX) के नाम से जाने चंद्रयान-5 की लॉन्च तैयारियों का मूल्यांकन करने के लिए किया गया। निरीक्षण के दौरान इसरो के अधिकारियों ने उन सुविधाओं, उपकरणों और प्रणालियों की जांच की, जिनका उपयोग अंतरिक्ष यान को जापान के H3 रॉकेट पर स्थापित करने में किया जाएगा। विशेषज्ञों के अनुसार, ये प्री-लॉन्च परीक्षण मिशन की सफलता के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं, ताकि प्रक्षेपण के समय किसी तरह की तकनीकी बाधा न आए।

इस महत्वाकांक्षी मिशन में भारत लैंडर उपलब्ध कराएगा, जबकि जापान एक उन्नत रोवर विकसित कर रहा है। लगभग 350 किलोग्राम वजनी यह रोवर चंद्रमा की सतह पर करीब पांच फीट गहराई तक ड्रिलिंग कर सकेगा और वहां मौजूद नमूनों का विश्लेषण करेगा।

मिशन का मुख्य उद्देश्य चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर जल-बर्फ (water ice) की मौजूदगी और उसकी प्रकृति का अध्ययन करना है। इस क्षेत्र को वैज्ञानिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि यहां स्थायी छाया वाले इलाकों में बर्फ के बड़े भंडार होने की संभावना जताई जाती है।

इस मिशन में NASA और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के उपकरण भी शामिल किए जाएंगे, जिससे यह एक बहुपक्षीय वैज्ञानिक प्रयास बन गया है। इससे मिशन की वैज्ञानिक क्षमता और डेटा संग्रह की गुणवत्ता में वृद्धि होने की उम्मीद है।

वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि चंद्रमा पर मौजूद बर्फ को पीने के पानी, ऑक्सीजन या रॉकेट ईंधन में परिवर्तित किया जा सका, तो भविष्य में चंद्रमा पर लंबे समय तक मानव मिशन संभव हो सकेंगे। इससे अंतरिक्ष अन्वेषण की लागत भी कम हो सकती है।

चंद्रयान-5 मिशन का प्रक्षेपण 2028 से पहले होने की संभावना नहीं है। यह मिशन कम से कम साढ़े तीन महीने तक संचालित होगा, जिसे आगे बढ़ाकर एक वर्ष तक किया जा सकता है। यह भारत के चंद्रयान-3 मिशन की सफलता के बाद अगला बड़ा कदम माना जा रहा है।

हालिया दौरे के दौरान दोनों देशों के वैज्ञानिकों ने साझा बैठकें कीं और सहयोग को और मजबूत करने पर जोर दिया। विशेषज्ञों के अनुसार, यह मिशन न केवल तकनीकी दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि भारत और जापान के बीच रणनीतिक संबंधों को भी नई मजबूती देगा।

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