भारतीय रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए चेन्नई स्थित कंपनी ज़ुप्पा जियो नेविगेशन टेक्नोलॉजीज ने पिछले तीन महीनों में भारतीय सेना को ‘अजीत’ सीरीज़ के 500 से अधिक स्वदेशी ड्रोन सौंपे हैं। यह डिलीवरी आधुनिक युद्धक्षेत्र में सुरक्षित और विश्वसनीय ड्रोन तकनीक की बढ़ती जरूरत के बीच अहम मानी जा रही है।
कंपनी के अनुसार, इन ड्रोन की तैनाती से पहले सभी आवश्यक परीक्षण और प्रमाणन प्रक्रियाएं सफलतापूर्वक पूरी की गईं। मानकीकरण परीक्षण और गुणवत्ता प्रमाणन निदेशालय (STQC) द्वारा क्लियरेंस मिलने के बाद इनकी संचालन क्षमता और विश्वसनीयता को मान्यता मिली है।
कंपनी के संस्थापक और प्रबंध निदेशक साई पट्टाभिराम ने आधुनिक युद्ध में साइबर-सुरक्षित ड्रोन की अहमियत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ड्रोन तकनीक के बढ़ते सैन्य उपयोग के बीच इलेक्ट्रॉनिक युद्ध (EW) खतरों से सुरक्षा सुनिश्चित करना बेहद जरूरी हो गया है। उन्होंने कहा, “ड्रोन अब केवल निगरानी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि युद्ध संचालन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं। ऐसे में उनकी सुरक्षा और विश्वसनीयता सर्वोच्च प्राथमिकता है।”
पूरी तरह स्वदेशी तकनीक पर आधारित:
‘अजीत’ सीरीज़ के ड्रोन पूरी तरह भारत में डिजाइन और निर्मित किए गए हैं। इन्हें इस तरह तैयार किया गया है कि अग्रिम मोर्चे पर तैनात सैनिक इन्हें आसानी से संचालित कर सकें। इनकी नियंत्रण प्रणाली सरल और उपयोगकर्ता-अनुकूल है, जो इन्हें वैश्विक स्तर के ड्रोन प्लेटफॉर्म्स के बराबर प्रतिस्पर्धी बनाती है।
इन ड्रोन में मजबूत साइबर सुरक्षा संरचना के साथ उच्च प्रदर्शन क्षमता को जोड़ा गया है, जिससे ये इलेक्ट्रॉनिक युद्ध से प्रभावित वातावरण में भी प्रभावी ढंग से काम कर सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल भारत की रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने के साथ-साथ विदेशी तकनीक पर निर्भरता कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
इन ड्रोन की तैनाती से भारतीय सेना को निगरानी, टोही और अन्य सामरिक अभियानों में बेहतर दक्षता और सुरक्षा मिलने की उम्मीद है, जो भविष्य के युद्ध परिदृश्यों में निर्णायक साबित हो सकती है।
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