जम्मू-कश्मीर में स्टाइपेंड न बढ़ने से इंटर्न डॉक्टर नाराज, उपराज्यपाल से की दखल की मांग

जम्मू-कश्मीर में स्टाइपेंड न बढ़ने से इंटर्न डॉक्टर नाराज, उपराज्यपाल से की दखल की मांग

Intern doctors in Jammu and Kashmir are upset over the lack of a stipend increase and have sought the Lieutenant Governor's intervention.

जम्मू-कश्मीर में एमबीबीएस और बीडीएस इंटर्न डॉक्टरों की स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग एक बार फिर जोर पकड़ती नजर आ रही है। लंबे समय से इंटर्न डॉक्टर अपनी स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक इस मामले में कोई ठोस फैसला नहीं हो पाया है। ऐसे में अब इंटर्न डॉक्टरों ने जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा से मामले में दखल देने की मांग की है।

इंटर्न डॉक्टरों का कहना है कि उनकी स्टाइपेंड बढ़ाने से जुड़ी फाइल लगातार एक विभाग से दूसरे विभाग में घूम रही है। वित्त विभाग का कहना है कि फाइल मुख्यमंत्री कार्यालय के पास है जबकि विधानसभा में मंत्री सकीना इटू ने कहा कि मामला अभी वित्त विभाग में लंबित है।

इस मुद्दे पर डॉक्टर मोमिन ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में एमबीबीएस और बीडीएस इंटर्न डॉक्टरों को फिलहाल सिर्फ 12,300 रुपये महीना स्टाइपेंड दिया जा रहा है, जो बेहद कम है। उन्होंने कहा कि एक एमबीबीएस छात्र करीब 5 साल की कठिन पढ़ाई करता है, लगातार 36 घंटे तक काम करता है, नाइट शिफ्ट करता है और मरीजों की सेवा में लगा रहता है लेकिन इसके बावजूद उन्हें इतनी कम राशि मिलती है।

डॉ. मोमिन ने दूसरे राज्यों का उदाहरण देते हुए कहा कि बिहार ने हाल ही में इंटर्न डॉक्टरों की स्टाइपेंड बढ़ाने को मंजूरी दी है। वहीं, ओडिशा और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में इंटर्न डॉक्टरों को 30 हजार रुपये से ज्यादा स्टाइपेंड दिया जा रहा है। ऐसे में जम्मू-कश्मीर के डॉक्टर खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि आज एक मजदूर भी दिनभर काम करके 700 से 800 रुपये कमा लेता है लेकिन एक प्रशिक्षित डॉक्टर, जो लोगों की जान बचाने में लगा है, उसे महीने में सिर्फ 12,300 रुपये मिलना बेहद निराशाजनक और अन्यायपूर्ण है।

डॉक्टरों का आरोप है कि इस अहम मुद्दे को लगातार टाला जा रहा है। जब वे वित्त विभाग से संपर्क करते हैं तो कहा जाता है कि फाइल मुख्यमंत्री कार्यालय भेज दी गई है और जब मुख्यमंत्री कार्यालय में पूछताछ की जाती है तो जवाब मिलता है कि जल्द फैसला होगा लेकिन लंबे समय से सिर्फ आश्वासन ही मिल रहे हैं।

अब इंटर्न डॉक्टरों ने जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा से हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि सरकार को इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जल्द से जल्द स्टाइपेंड बढ़ाने पर फैसला करना चाहिए, ताकि युवा डॉक्टरों को राहत मिल सके।

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