राजस्थान सरकार ने रविवार देर रात प्रशासनिक महकमे में व्यापक फेरबदल करते हुए 62 IAS अधिकारियों के तबादले और 21 अफसरों को अतिरिक्त प्रभार सौंपने का आदेश जारी किया। कार्मिक विभाग की सूची के मुताबिक राजधानी से लेकर दूरस्थ ज़िलों तक कई अहम पदों पर नए चेहरे ज़िम्मेदारी संभालेंगे, जिससे राज्य की नौकरशाही में नई हलचल शुरू हो गई है।
पूर्व वित्त विभाग के वरिष्ठ अफसर अखिल अरोड़ा को अब जयपुर में जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED) का नया अतिरिक्त मुख्य सचिव (ACS) बनाया गया है। वहीं सुबोध अग्रवाल को राजस्थान वित्त निगम (RFC) जयपुर का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है, जिससे औद्योगिक वित्त और निवेश प्रोत्साहन को गति मिलने की उम्मीद है।
वरिष्ठ अधिकारी अपर्णा अरोड़ा को सामाजिक न्याय व अधिकारिता विभाग का ACS बनाया गया है, जबकि डॉ. संदीप वर्मा को कौशल एवं उद्यमिता विभाग की कमान सौंपी गई है। उच्च शिक्षा की बागडोर अब कुलदीप रांका के हाथों में होगी, वहीं आनंद कुमार वन एवं पर्यावरण मंत्रालय संभालेंगे। गृह विभाग की ज़िम्मेदारी भास्कर सावंत को मिली है और जनजाति क्षेत्रीय विकास विभाग अब कुंजीलाल मीणा के अधीन रहेगा।
राज्य के कई ज़िलों में कलेक्टर बदल दिए गए हैं:
- काना राम – सवाई माधोपुर
- कल्पना अग्रवाल – टोंक
- कमर उल जमान चौधरी – भरतपुर
- पीयूष समरिया – कोटा
- प्रियंका गोस्वामी – कोटपूतली-बहरोड़
- अरुण कुमार हसीजा – राजसमंद
- कमल राम मीणा – ब्यावर
- श्वेता चौहान – फलौदी
- महेंद्र खड़गावत – डीडवाना-कुचामन
विशेष रूप से 2014 बैच के IAS कमर उल जमान चौधरी को भरतपुर का कलेक्टर और मजिस्ट्रेट बनाकर मैदान में उतारा गया है, जहाँ प्रशासनिक दक्षता को अहम माना जाता है।
बीकानेर के पूर्व संभागीय आयुक्त डॉ. रवि सुरपुर अब राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल के अध्यक्ष होंगे। भरतपुर मंडल की कमान डॉ. टीना सोनी को दी गई है। शक्ति सिंह राठौड़ अजमेर के और विश्राम मीणा बीकानेर के नए संभागीय आयुक्त नियुक्त हुए हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि यह फेरबदल एक तीर से कई निशाने साधने की कोशिश है—विकास परियोजनाओं को गति, वित्तीय अनुशासन और सामाजिक कल्याण योजनाओं पर नया फ़ोकस। साथ ही, आगामी प्रशासनिक चुनौतियों—विशेषकर मॉनसून प्रबंधन, कृषि राहत और बेरोज़गारी जैसे मुद्दों—को देखते हुए कई रणनीतिक ज़िलों में अनुभवी और युवा दोनों तरह के अफसर तैनात किए गए हैं।
तबादलों के बाद नए कलेक्टरों और विभागीय प्रमुखों पर तुरंत प्रभाव से कार्यभार ग्रहण करने का दबाव रहेगा। ग्रामीण रोडमैप से लेकर शहरी जलापूर्ति, वन संरक्षण और कौशल विकास—हर क्षेत्र का प्रदर्शन सीधे इन अफसरों की कार्यकुशलता पर निर्भर करेगा।
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