भारत की स्वदेशी रक्षा क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के तहत भारतीय सेना ने उच्च हिमालय इलाके में लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर ‘प्रचंड’ का सफल लाइव फायर परीक्षण किया। यह अभ्यास सेना की गजराज कोर के तत्वावधान में आयोजित किया गया, जिसमें हेलीकॉप्टर की सटीक मारक क्षमता और बहु-क्षेत्रीय युद्धक संचालन क्षमता का प्रदर्शन किया गया।
हाल ‘प्रचंड’(लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर) को औपचारिक रूप से लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर (LCH) कहा जाता है और इसे भारत की स्वदेशी एयरोस्पेस क्षमता का महत्वपूर्ण प्रतीक माना जाता है। इसे हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड ने रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन के सहयोग से विकसित किया है। कई चरणों के परीक्षण के बाद इसे वर्ष 2022 में भारतीय सेना में शामिल किया गया था।
हालिया अभ्यास के दौरान इस हेलीकॉप्टर ने 15,000 फीट से अधिक ऊंचाई वाले कठिन पहाड़ी इलाकों में अपनी संचालन क्षमता का सफल प्रदर्शन किया। गजराज कोर भारत की पूर्वोत्तर सीमाओं की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालती है। कोर के सैनिकों ने इस अभ्यास में सिमुलेटेड दुश्मन लक्ष्यों पर मिसाइल और तोप से लाइव फायरिंग की।
परीक्षण के दौरान प्रचंड के हथियारों की क्षमता विशेष रूप से प्रभावशाली रही। हेलीकॉप्टर ने हेलिना एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल का सफल उपयोग किया, जो 7 किलोमीटर से अधिक दूरी पर बख्तरबंद लक्ष्यों को निशाना बनाने में सक्षम है। ऊंचाई वाले क्षेत्रों की पतली हवा में भी इस प्रणाली ने प्रभावी प्रदर्शन किया।
इसके अलावा हेलीकॉप्टर में लगी 20 मिमी ट्विन-बैरेल तोप ने जमीन पर मौजूद दुश्मन के ठिकानों पर सटीक और प्रभावी फायर किया। उन्नत इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल सेंसर और हेलमेट-माउंटेड साइट की मदद से पायलटों ने पहले ही प्रयास में लक्ष्य भेदने में सफलता हासिल की।
उच्च हिमालयी युद्ध में केवल मारक क्षमता ही नहीं, बल्कि जीवित रहने की क्षमता भी अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। प्रचंड को विशेष रूप से ऐसे ही वातावरण के लिए डिजाइन किया गया है। इसकी संरचना में कम रडार सिग्नेचर और इंफ्रारेड सप्रेसर जैसी तकनीकें शामिल हैं, जिससे यह दुश्मन की निगरानी प्रणालियों से बचते हुए संचालन कर सकता है। यह क्षमता विशेष रूप से चीन के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के पास संभावित अभियानों के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है।
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इस अभ्यास में प्रचंड हेलीकॉप्टर को मानवरहित विमानों और जमीनी तोपखाने के साथ समन्वित किया गया। इस तरह के संयुक्त संचालन से सेना की बहु-डोमेन युद्ध रणनीति को बल मिलता है, जिसमें वायु, भूमि और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध के तत्वों का एकीकृत उपयोग किया जाता है।
गजराज कोर के कमांडर राजीव घई ने परीक्षण के बाद कहा कि प्रचंड की क्षमता पहाड़ी इलाकों में सेना की आक्रमण क्षमता को और मजबूत करती है। उन्होंने कहा, “यह स्वदेशी प्लेटफॉर्म हमारी उच्च ऊंचाई पर स्ट्राइक क्षमता को एक नया आयाम देता है।”
‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल के तहत प्रचंड हेलीकॉप्टर का उत्पादन तेजी से बढ़ाया जा रहा है। 2030 तक सेना और वायुसेना के लिए 150 से अधिक हेलीकॉप्टर तैयार करने की योजना है। इनका निर्माण कर्नाटक के तुमकुर स्थित HAL संयंत्र में किया जा रहा है।
रणनीतिक दृष्टि से यह हेलीकॉप्टर हिमालयी क्षेत्रों में भारत की सैन्य क्षमता को मजबूत करता है, जहां प्रतिद्वंद्वी देश चीन और पाकिस्तान भारी हेलीकॉप्टर प्लेटफॉर्म जैसे Z-10 और Mi-17 के विभिन्न संस्करण तैनात करते हैं। प्रचंड का वजन 6 टन से कम होने के कारण यह अग्रिम हेलिपैड से भी संचालन कर सकता है, जहां बड़े हेलीकॉप्टर नहीं पहुंच पाते।
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