सीबीआई के अनुसार, यह मामला भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की शिकायत पर दर्ज किया गया था। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड और उससे जुड़े अन्य लोगों को बैंक द्वारा बड़ी मात्रा में ऋण सुविधाएं दी गई थीं, लेकिन इनका दुरुपयोग किया गया।
जांच एजेंसी का कहना है कि प्रारंभिक जांच में यह पाया गया है कि कंपनी के भीतर कुछ अधिकारियों ने मिलकर वित्तीय लेनदेन में गड़बड़ी की। आरोप है कि कई ‘शेल कंपनियों’ यानी कागजों पर मौजूद कंपनियों के माध्यम से पैसों का लेनदेन घुमाया गया।
सीबीआई के अनुसार, डी. विश्वनाथ कंपनी के बैंकिंग और वित्तीय कार्यों के समग्र प्रबंधन के लिए जिम्मेदार थे। उन पर आरोप है कि वे ऋण सुविधाओं को स्वीकृत कराने और उनके उपयोग से जुड़े मामलों में बैंकों के साथ समन्वय करते थे। वहीं अनिल कालिया पर आरोप है कि उन्होंने इस प्रक्रिया में डी. विश्वनाथ का सहयोग किया और कंपनी के वित्तीय संचालन, भुगतान तथा धन के उपयोग से जुड़े मामलों में भूमिका निभाई।
दोनों आरोपियों को संबंधित अदालत में पेश किया जाएगा। मामले की जांच अभी जारी है और एजेंसी अन्य पहलुओं की भी पड़ताल कर रही है। सीबीआई का यह भी कहना है कि पिछले कुछ महीनों में बैंक और एलआईसी की शिकायतों के आधार पर अनिल अंबानी समूह से जुड़े मामलों में कई एफआईआर दर्ज की गई हैं, जो कथित तौर पर बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं से संबंधित हैं।
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