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60 साल बाद UAE छोड़ेगा तेल संगठन Opec – “यह ओपेक के अंत की शुरुआत है”

विशेषज्ञों का दावा

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वैश्विक तेल बाजार और मध्य-पूर्व की भू-राजनीति में एक युगांतकारी बदलाव की आहट सुनाई दे रही है। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने घोषणा की है कि वह अगले महीने ओपेक (Opec) और ओपेक प्लस (Opec+) समूहों से अपनी सदस्यता समाप्त कर देगा। लगभग 60 वर्षों तक इस शक्तिशाली तेल कार्टेल का हिस्सा रहने के बाद, यूएई का यह फैसला वैश्विक ऊर्जा राजनीति की दिशा बदल सकता है।

यूएई के ऊर्जा मंत्री ने ने कहा है, ओपेक की बंदिशों से बाहर होने पर देश को अपनी तेल नीति में अधिक लचीलापन मिलेगा। यूएई ने हाल के वर्षों में अपनी तेल उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए भारी निवेश किया है। संगठन से बाहर निकलने का उद्देश्य दीर्घकालिक वैश्विक ऊर्जा मांग को पूरा करना और अपनी बढ़ी हुई क्षमता का पूर्ण उपयोग करना है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अबू धाबी लंबे समय से ओपेक के ‘उत्पादन कोटा’ (Production Quotas) के कारण बंधा हुआ महसूस कर रहा था। ओपेक के आंकड़ों के अनुसार, 2024 में यूएई का उत्पादन 2.92 मिलियन बैरल प्रतिदिन था, लेकिन विशेषज्ञों का अनुमान है कि संगठन से बाहर होकर यूएई अपने उत्पादन में 10 लाख बैरल प्रतिदिन की अतिरिक्त वृद्धि कर सकता है।

इस निकास को तेल कार्टेल के लिए एक बड़े आघात के रूप में देखा जा रहा है। ‘SMT फाइनेंशियल’ में ऊर्जा अनुसंधान के प्रमुख सौल कावोनिक ने इस फैसले को ‘ओपेक के अंत की शुरुआत’ बताया है। उनके अनुसार, “यूएई के जाने से ओपेक अपनी क्षमता का लगभग 15% हिस्सा खो देगा। साथ ही, संगठन ने अपने सबसे अनुशासित सदस्यों में से एक को खो दिया है। अब सऊदी अरब के लिए इस समूह को एकजुट रखना बेहद चुनौतीपूर्ण होगा।”

UAE का यह फैसला अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए एक बड़ी कूटनीतिक जीत माना जा रहा है। ट्रंप पहले भी ओपेक पर “पूरी दुनिया को लूटने” का आरोप लगाते रहे हैं। जनवरी में उन्होंने सऊदी अरब और अन्य सदस्य देशों से तेल की कीमतें कम करने की मांग की थी और शुल्क (Tariffs) लगाने की धमकी भी दी थी। UAE के इस कदम से वाशिंगटन और अबू धाबी के बीच संबंध और मजबूत होने की संभावना है।

कैपिटल इकोनॉमिक्स के अर्थशास्त्री डेविड ऑक्सले के अनुसार, UAE के बाहर निकलने से भविष्य में तेल की कीमतों में गिरावट आ सकती है, लेकिन बाजार में अस्थिरता बढ़ेगी। वारविक बिजनेस स्कूल के प्रोफेसर डेविड एल्म्स ने बताया कि यूएई के पास तेल निकालने की लागत दुनिया में सबसे कम है, जो सऊदी अरब की लागत से लगभग आधी है। इसका मतलब है कि कम कीमतों पर भी यूएई मुनाफा कमा सकता है, इसलिए वह ऊंची कीमतों के बजाय अधिक मात्रा में तेल बेचने को प्राथमिकता दे रहा है।

दौरान विश्व बैंक ने चेतावनी दी है कि मध्य-पूर्व में युद्ध के कारण तेल आपूर्ति में ऐतिहासिक कमी आई है। हालांकि, ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) के बंद होने के कारण तत्काल आपूर्ति पर प्रभाव नहीं पड़ेगा, लेकिन लंबी अवधि में यूएई का उत्पादन बाजार के समीकरण बदल देगा।

यूएई के जाने के बाद ओपेक में अब केवल 11 सदस्य रह जाएंगे। सऊदी अरब, इराक, ईरान, कुवैत और वेनेजुएला जैसे संस्थापक सदस्यों के लिए अब बाजार प्रबंधन का पूरा बोझ खुद उठाना होगा। क्रिस्टोल एनर्जी की सीईओ डॉ. कैरोल नखले के अनुसार, ईरान की गतिविधियों ने भी यूएई के इस फैसले को पुख्ता करने में भूमिका निभाई है।

ओपेक उत्पादन क्षमता (2024 – मिलियन बैरल/दिन में):

  • सऊदी अरब: 8.96

  • इराक: 3.86

  • ईरान: 3.26

  • यूएई: 2.92 (अब ओपेक से बाहर)

  • कुवैत: 2.41

  • नाइजीरिया: 1.35

  • लीबिया: 1.14

    (स्रोत: ओपेक वार्षिक सांख्यिकीय बुलेटिन 2025)

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