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Wednesday, April 29, 2026
होमन्यूज़ अपडेटUAE के OPEC छोड़ने से भारत को मिलेगा फायदा ?

UAE के OPEC छोड़ने से भारत को मिलेगा फायदा ?

नई दिल्ली के लिए संभावनाएँ

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संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने मंगलवार (28 अप्रैल) को एक अहम घोषणा करते हुए कहा कि वह 1 मई से तेल उत्पादक देशों के संगठन OPEC और उसके विस्तारित समूह OPEC+ से अलग हो जाएगा। ईरान युद्ध के दूसरे महीने में प्रवेश कर जाने और वैश्विक ऊर्जा बाजार में तेल की कीमतों में अस्थिरता के कारण UAE ने यह कदम उठाया है। दौरान विशेषज्ञों का दावा है की UAE के OPEC और OPEC+ को छोड़ने के का फायदा भारत को हो सकता है।

यूएई ने अपने बयान में कहा कि यह निर्णय उसकी दीर्घकालिक रणनीतिक और आर्थिक दृष्टि के तहत लिया गया है और अब वह अपने राष्ट्रीय हितों पर अधिक ध्यान केंद्रित करना चाहता है। हालांकि UAE का यह कदम ओपेक की एकजुटता को कमजोर कर सकता है, खासकर तब जब संगठन पर सऊदी अरब का प्रभाव प्रमुख माना जाता है। हालांकि, भारत के लिए यह स्थिति अवसर लेकर आ सकती है।

भारत अपनी तेल जरूरतों का लगभग 40 प्रतिशत ओपेक देशों से आयात करता है, जबकि यूएई अकेले लगभग 10 प्रतिशत आपूर्ति करता है। अब यूएई के OPEC के उत्पादन कोटा से मुक्त होने के बाद, उसके लिए अधिक तेल उत्पादन और निर्यात संभव हो सकता है। इससे भारत को सस्ता कच्चा तेल मिल सकता है और उसका आयात बिल कम हो सकता है। बता दें की UAE में तेल उत्पादन की लागत सऊदी अरब में लगने वाली लागत के आधे निवेश में संभव होती है।

ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञों के अनुसार, यह बदलाव भारत के लिए महंगाई और आयात लागत दोनों के संदर्भ में लाभकारी साबित हो सकता है। वहीं, स्वतंत्र ऊर्जा नीति संस्थान के अध्यक्ष नरेंद्र तनेजा ने भी कहा कि भारत और UAE के गहरे संबंध इस फैसले के बाद और मजबूत हो सकते हैं। इस कदम से भारत और UAE के बीच द्विपक्षीय ऊर्जा सहयोग के नए अवसर भी खुल सकते हैं। विश्लेषकों का मानना है कि OPEC के उत्पादन प्रतिबंधों से मुक्त होकर यूएई भारत के साथ अधिक लचीले और दीर्घकालिक समझौते कर सकता है।

हालांकि, विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि इस फैसले का पूरा असर तभी दिखेगा जब होर्मुज जलडमरूमध्य में जारी अवरोध समाप्त होगा। यह जलमार्ग खाड़ी देशों से तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और वर्तमान बाधा वैश्विक आपूर्ति को प्रभावित कर रही है।

UAE दुनिया के प्रमुख तेल उत्पादकों में शामिल है, जिस कारण से उसका OPEC छोड़ने का फैसला OPEC देशों के लिए झटका है।  इस संघटन की स्थापना 1960 में बगदाद सम्मेलन में हुई थी, का उद्देश्य सदस्य देशों की पेट्रोलियम नीतियों का समन्वय और वैश्विक बाजार में स्थिरता बनाए रखना रहा है। यूएई 1971 में इस संगठन का सदस्य बना था, जबकि अबू धाबी 1967 से ही इससे जुड़ा हुआ था।

अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों के अनुसार, UAE का यह कदम संकेत देता है कि OPEC देशों के बीच संबंध पहले की तुलना में ढीले हो रहे हैं और भविष्य में वैश्विक तेल आपूर्ति बढ़ सकती है।

कुल मिलाकर, UAE का OPEC से अलग होना वैश्विक ऊर्जा बाजार में एक बड़ा बदलाव है, जिसका असर आने वाले समय में साफ दिखाई देगा। भारत के लिए यह स्थिति संभावित रूप से फायदेमंद साबित हो सकती है, बशर्ते वैश्विक आपूर्ति बाधाएं दूर हों और बाजार स्थिरता की ओर बढ़े।

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