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इमरान खान सरकार का तख़्तापलट करने वाला पाकिस्तान-अमेरिका के बीच का ‘सीक्रेट साइफर’ लीक

अमेरिकी अधिकारी डोनाल्ड लू की धमकीयां, 3 पन्नों के गोपनीय दस्तावेज की तस्वीरें, अविश्वास प्रस्ताव को लेकर वॉशिंगटन के दबाव का बड़ा खुलासा

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पाकिस्तान की सियासत में सालों तक भूचाल मचाने वाला और पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की सत्ता छीनने की वजह बना वह खुफिया ‘साइफर’ (गोपनीय संदेश) आखिरकार पूरी तरह बेनकाब हो गया है। यह साइफर सबूत है की अमेरिका पाकिस्तान पर दबाव बनाता रहा और आर्मी की मदद से इमरान खान की लोकप्रिय सत्ता का तख़्तापलट किया गया।  अमेरिकी न्यूज वेबसाइट ‘ड्रॉप साइट’ ने इस 3 पन्नों के अत्यंत गुप्त दस्तावेज की तस्वीरें सार्वजनिक की हैं। इस लीक रिपोर्ट ने दावों की पुष्टि कर दी है जिसके दम पर इमरान खान बार-बार आरोप लगाते रहे कि उनकी सरकार को एक सोची-समझी अमेरिकी साजिश के तहत गिराया गया था।

यह साइफर असल में वाशिंगटन में तैनात पाकिस्तान के तत्कालीन राजदूत असद मजीद खान और अमेरिकी विदेश विभाग के दक्षिण और मध्य एशियाई मामलों के सहायक सचिव डोनाल्ड लू के बीच हुई एक बेहद संवेदनशील मुलाकात का आधिकारिक लिखित रिकॉर्ड है।

7 मार्च 2022 को हुई इस बातचीत का ब्यौरा जब इस्लामाबाद स्थित विदेश मंत्रालय को भेजा गया, तो इसे ‘साइफर’ कोड नाम दिया गया। इस लीक दस्तावेज से सामने आई बातचीत के 10 सबसे बड़े और महत्वपूर्ण बिंदु इस प्रकार हैं:

1. यूक्रेन नीति पर अमेरिका की सीधी आपत्ति:

मुलाकात की शुरुआत में ही अमेरिकी अधिकारी डोनाल्ड लू ने रूस-यूक्रेन युद्ध पर पाकिस्तान के स्टैंड पर कड़ा ऐतराज जताया। साइफर के मुताबिक, लू ने कहा, “अमेरिका और यूरोप में लोग समझ नहीं पा रहे कि पाकिस्तान इतना आक्रामक तटस्थ रुख क्यों अपना रहा है।” अमेरिकी प्रशासन का मानना था कि यह झुकाव पूरी तरह से तत्कालीन प्रधानमंत्री इमरान खान का व्यक्तिगत फैसला था।

2. पाकिस्तान की अंदरूनी राजनीति पर अमेरिकी नजर

दस्तावेज दर्शाता है कि अमेरिका पाकिस्तान के घरेलू राजनीतिक घटनाक्रमों की बारीकी से निगरानी कर रहा था। डोनाल्ड लू ने पाकिस्तानी राजदूत से कहा कि इमरान खान की यह विदेश नीति इस्लामाबाद के मौजूदा राजनीतिक हालात से प्रेरित है, जहां प्रधानमंत्री अपना एक विशिष्ट तौर से लोकप्रियता हासिल करने का प्रयास कर रहे हैं और अपना ‘पब्लिक फेस’ चमका रहें है। इसके जवाब में पाकिस्तानी राजदूत असद मजीद खान ने स्पष्ट किया कि यूक्रेन संकट पर पाकिस्तान का रुख व्यक्तिगत नहीं, बल्कि कई सरकारी संस्थाओं के बीच गहन विचार-विमर्श के बाद सामूहिक रूप से तय किया गया था।

3. संयुक्त राष्ट्र में वोटिंग और मॉस्को दौरे की तल्खी

जब पाकिस्तानी राजदूत ने पूछा कि क्या वाशिंगटन की यह नाराजगी संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में पाकिस्तान के मतदान से दूर रहने के कारण है, तो डोनाल्ड लू ने साफ इनकार कर दिया। लू ने खुलकर कहा कि असली विवाद की जड़ प्रधानमंत्री इमरान खान की मॉस्को यात्रा है।

4. अविश्वास प्रस्ताव और “सब माफ” करने की अमेरिकी शर्त

साइफर का सबसे चौंकाने वाला हिस्सा इमरान खान को सत्ता से बेदखल करने की खुली धमकी से जुड़ा है। अमेरिकी अधिकारी डोनाल्ड लू ने सीधे शब्दों में कहा, “अगर प्रधानमंत्री के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव सफल हो जाता है तो वॉशिंगटन में सब माफ कर दिया जाएगा, वरना आगे मुश्किलें बढ़ सकती हैं।” इन्हीं विशिष्ट धमकियों और दबाव के आधार पर इमरान खान ने लगातार दावा किया था कि उनकी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव के पीछे सीधे तौर पर अमेरिका का हाथ था।

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5. इमरान खान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग करने की धमकी

दस्तावेज के अनुसार, लू ने पाकिस्तानी राजनयिक को चेताया कि यदि इमरान खान अविश्वास प्रस्ताव के बावजूद किसी तरह अपनी सत्ता बचाने में कामयाब रहते हैं, तो अमेरिका और यूरोप दोनों ही मोर्चों पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री का “अलगाव” (Isolate) काफी बढ़ जाएगा। वाशिंगटन में उनके मॉस्को दौरे को एक बड़ी राजनीतिक हिमाकत के रूप में देखा जा रहा था।

6. रूस यात्रा का पाकिस्तानी बचाव

पाकिस्तानी राजदूत असद मजीद खान ने इस दौरान अमेरिकी दबाव का मुकाबला करते हुए तर्क दिया कि इमरान खान का रूस दौरा कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं था, बल्कि यह कई सालों से तय शेड्यूलिंग का हिस्सा था। उन्होंने दलील दी कि जब प्रधानमंत्री मॉस्को पहुंचे थे, तब तक रूस ने यूक्रेन पर सैन्य हमला शुरू नहीं किया था। यह यात्रा पूरी तरह से द्विपक्षीय आर्थिक और व्यापारिक हितों पर केंद्रित थी, इसे रूस के सैन्य आक्रमण के समर्थन के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। गौरतलब है कि फरवरी 2022 में ठीक उसी वक्त इमरान खान रूस में मौजूद थे जब पुतिन ने यूक्रेन पर हमले का आदेश दिया था।

7. अफगानिस्तान संकट के हाशिए पर जाने का डर

इस गोपनीय बातचीत के दौरान अफगानिस्तान का मुद्दा भी उठा। पाकिस्तानी राजदूत ने अपनी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यूक्रेन संकट के चलते पूरी दुनिया का ध्यान भटक जाएगा और अफगानिस्तान का मुद्दा पूरी तरह पीछे छूट जाएगा। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने अफगान गृहयुद्ध की बहुत भारी कीमत चुकाई है, इसलिए वहां स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए रूस सहित सभी क्षेत्रीय महाशक्तियों के साथ लगातार संवाद बनाए रखना बेहद जरूरी है।

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8. अमेरिका के दोहरे रवैये पर पाकिस्तान की भड़ास

साइफर से यह भी साफ होता है कि पाकिस्तान लंबे समय से अमेरिकी बेरुखी से आहत था। असद मजीद खान ने अमेरिकी अधिकारी के सामने खुलकर कहा कि पिछले एक साल से इस्लामाबाद यह महसूस कर रहा है कि वाशिंगटन का नेतृत्व उनसे दूरी बना रहा है। अमेरिका हर अंतरराष्ट्रीय मंच पर तो पाकिस्तान से बिना शर्त समर्थन की उम्मीद करता है, लेकिन जब कश्मीर जैसे संवेदनशील मुद्दों पर पाकिस्तान की चिंताओं की बात आती है, तो उन्हें पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया जाता है।

9. भारत का जिक्र और चीन के नजरिए का चश्मा

इस बातचीत में भारत की विदेश नीति पर भी चर्चा की गई। पाकिस्तानी राजदूत ने शिकायत की कि अमेरिका, भारत और पाकिस्तान के साथ पूरी तरह से अलग और दोमुंहा व्यवहार कर रहा है। इस पर डोनाल्ड लू ने साफगोई से जवाब दिया कि अमेरिका-भारत संबंधों का आधार पूरी तरह से चीन के प्रभुत्व को रोकने के नजरिए (Anti-China Axis) से तय होता है। लू ने यह भी अनुमान लगाया कि यूक्रेन में फंसे भारतीय छात्रों के सुरक्षित बाहर निकलने के बाद संभवतः भारत की रूस नीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

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10. पाकिस्तानी राजदूत का अंतिम आकलन: अमेरिकी दूतावास के सामने विरोध की सिफारिश

इस तीन पन्नों के गोपनीय दस्तावेज का आखिरी और सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा राजदूत का अपना ‘असेसमेंट’ (मूल्यांकन) है। राजदूत असद मजीद खान ने अपने निष्कर्ष में साफ लिखा कि डोनाल्ड लू ने जिस कड़े और आक्रामक लहजे में यह चेतावनी दी है, वह अमेरिकी सरकार के शीर्ष स्तर की मंजूरी के बिना संभव ही नहीं है। लू ने जिस तरह पाकिस्तान के आंतरिक राजनीतिक घटनाक्रम (अविश्वास प्रस्ताव) पर खुलकर टिप्पणी की, उसे देखते हुए राजदूत ने अपनी सरकार को सुझाव दिया था कि पाकिस्तान को इस मामले को बेहद गंभीरता से लेना चाहिए और इस्लामाबाद में स्थित अमेरिकी दूतावास के सामने इस सीधी दखलअंदाजी के खिलाफ औपचारिक कूटनीतिक विरोध (Demarche) दर्ज कराने पर विचार करना चाहिए।

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